तेज आंधी, बरसात के साथ गिरे ओले, फसलों को हुआ नुकसान

शुक्रवार को दिन में दो बार हुई ओलावृष्टि, सरसों की फलियां टूटी, जमीन में बिखरे दाने, कलेक्टर के आदेश पर राजस्व अमले ने शुरू किया नुकसान का सर्वे

By: rishi jaiswal

Updated: 07 Mar 2020, 12:18 AM IST

भिण्ड। किसानों के सपनों पर कुदरत ने कहर बरपाते हुए उनके अरमानों को चकनाचूर कर दिया। शुक्रवार को सुबह और दोपहर में तेज अंाधी के साथ बेमौसम बरसात और नीबू के आकार के गिरे ओलों से खेतो में खड़ी फसल को ४० से ५० फीसदी नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। तेज आंधी से कई पेड़ भी धराशायी हो गए हैं। कलेक्टर के आदेश पर राजस्व विभाग के अमले ने नुकसान का सर्वे शुरू कर दिया है। एक सप्ताह में २० मिमी बरसात हो चुकी है।
शुक्रवार सुबह ५ बजे से ही आसमान में छाए गहरे बादलों ने तेज गर्जना के साथ घुमडऩा शुरू कर दिया था। ५.१५ बजे तेज हवाओं के साथ बरसात शुरू हुई। थोड़ी देर के बाद ही नीबू और बेर के आकार के ओलों से जमीन पर सफे द चादर पसर गई। सुबह बारिश के साथ ओलावृष्टि ने मेहगांव, अटेर क्षेत्र में भारी तबाही मचाई। दोपहर ३.३० बजे एक बार फिर से कुदरत का कहर शुरू हुआ। तेज हवाओं के साथ बरसात और ओलावृष्टि ने भिण्ड, ऊमरी, फूप, सुरपुरा, अमायन, भारोली, अटेर क्षेत्र में फसलों को नुकसान पहुंचाया। आंधी इतनी तेज थी कि सैकड़ों की संख्या में पेड़ धाराशायी हो गए। दोपहर बाद ५ से ५.४५ बजे तक झमाझम बरसात ने लोगों की मुसीबत बढ़ा दी। खेतों तैयार खड़ी सरसों की फलियां टूट जाने से दाने जमीन पर बिखर गए, वहीं तेज हवा की चपेट में आने तथा खेतों में पानी भर जाने से गेहंू की फसल भी पसर गई है। बाली निकल आने के कारण पौधे का खड़ा होना मुश्किल है। इससे उत्पादन प्रभावित होने की संभावना है। बरसात और ओलावृष्टि से चना, मटर, अरहर, आलू तथा सब्जियों को भारी नुकसान हुआ है। पिछले एक सप्ताह से हो रही ओलावृष्टि और बरसात से रबी सीजन की ४० हजार हेक्टेयर से अधिक की फसल को ४० से ५० फीसदी तक नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है। आसमान में छाए बादलों से किसानों के दिलों की धडक़ने बढ़ी हुई हैं। अंाधी में पेड़ गिरने से कई भवनों को नुकसान पहुंचा है। कलेक्टर के आदेश पर नुकसान का सर्वे शुरू कर दिया गया है।
बरसात थमी तो पहुंचे खेतों में, नुकसान देखकर छलके आंसू
दोपहर में करीब एक घंटे तक ओलावृष्टि और बरसात के बाद बंूदाबांदी थमी तो किसान दौड़े-दौड़े खेतों में पहुंचे। खेतों में ५ सेमी तक पानी भरा हुआ था। गेहंू की फसल जमीन पर बिछी हुईथी। ओलों की मार से सरसों की फलियां टूट जाने से दाने जमीन पर बिखरे हुए थे। इसी प्रकार चना, मटर, आलू की फसल में भारी नुकसान देखकर किसानों की आंखों से आंसू छलक पड़े। प्रभावित किसानों में कई ऐसे भी हैं जिन्होंने बंैक अथवा साहूकारों से लोन लेकर फसल बोई थी। गोरमी, अटेर क्षेत्र के तेजपुरा, टीकरी, मुकुटपुरा, परोसा, बघेलन का पुरा, शंकरपुरा, गोअरकला, पीपरी, अंगदपुरा, शुकलपुरा, उदोतगढ़, खिपौना, अटेर, नावली वृंदावन आदि गांवों में खरीफ की फसल चंबल में बाढ़ आने से चौपट हो गई थी। रबी की फसल भी नष्ट हो जाने से किसानों के चेहरे मुरझा गए हंै। भिण्ड के ऊमरी, अकोड़ा, बाराकला, कनावर, नुन्हाटा, विलाव, ककहरा, खरका, मोतीपुरा आदि दो दर्जन से अधिक गांवों को भारी नुकसान हुआ है। इसी प्रकार गोहद के एक दर्जन से अधिक गांवों में एक सप्ताह के भीतर तीसरी बार ओलावृष्टि होने से भारी नुकसान हुआ है। किसान महेश शुक्ला, बृजकिशोर, कल्लू चुरारिया, मंगलसिंह गुर्जर, देंवेंद्रसिंह गुर्जर, रामऔतार, रायसिंह भदौरिया आदि ने बताया कि फसल को ४० से ५० फीसदी नुकसान हुआ है। यदि सरकार से मदद न मिली तो किसान खड़ा नहीं हो पाएगा।
ओलावृष्टि से गिरा तापमान, मार्च माह में फरवरी जैसा अहसास
एक सप्ताह के अंदर तीन बार बारिश और ओलावृष्टि होने से मौसम ने करवट ले ली है। तापमान दो डिग्री तक नीचे आ गया है। गुरुवार को अधिकतम तापमान २६ तथा न्यूनतम १२ डिग्री दर्ज किया गया था, जबकि शुक्रवार को ओलावृष्टि होने से तापमान अधिकतम २४ और न्यूनतम १२ डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। लोगों ने गर्म कपड़े फिर से निकाल लिए हैं। सुबह बरसात होने के कारण परीक्षार्थी बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
वर्जन...
किसानों पर कुदरत का कहर टूटा है। फसल के नुकसान का आंकलन कराया जा रहा है। संकट की इस घड़ी में किसानों की हरसंभव मदद करने का प्रयास किया जाएगा। प्रभावित क्षेत्रों में पटवारी और आरआई को भेजा जा रहा है।
-छोटेङ्क्षसह, कलेक्टर भिण्ड
किसानों को बरसात के साथ ओलावृष्टि ने बर्बाद कर दिया है। फसल को ४० से ५० फीसदी तक नुकसान हुआ है। अभी तक न तो पटवारी आए हैं और न ही आरआई। आसमान में बादल छाए होने से संकट अभी भी बना हुआ है। सरकार से मदद न मिली तो किसान खड़ा नहीं हो पाएगा।
-राघवेंद्र सिंह भदौरिया, किसान किशूपुरा अटेर

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