यहां राशन के लिए जद्दोजहद है साहब, शराब आसानी से मिलेगी

रसद सामग्री की दुकानें बंद होने से लोगों को सहज राशन नहीं मिल पा रहा है। आलम ये है कि कई परिवार एक वक्त भोजन कर के ही वक्त गुजार रहे हैं। कुछ तो ऐसे भी हैं जिन्हें एक दिन बाद पेटभर खाना नसीब हो पा रहा है।

By: rishi jaiswal

Published: 27 Mar 2020, 10:02 PM IST

भिण्ड. कोरोना वायरस संक्रमण के बचाव में चल रहे लॉकडाउन में आम आदमी को राशन सामग्री नहीं मिल रही है, किसान फसल लेने के लिए डीजल तथा पेट्रोल के लिए तरस रहे हैं तो शुक्रवार से शराब सहजता से उपलब्ध होने लगी है।

ऐसे में किसी कवि की रचना के माध्यम से की गई कल्पना साकार होती नजर आ रही है। ऐ खुदा पीने वालों की बस्ती जुदा होती, जहां हुकमन पिया करते न पीते तो सजा होती।। एेसा प्रतीत हो रहा है कि पीने के लिए सरकारी आदेश है और न पीने वालों के लिए भोजन की सामग्री के विक्रय पर पाबंदी।

रसद सामग्री की दुकानें बंद होने से लोगों को सहज राशन नहीं मिल पा रहा है। आलम ये है कि कई परिवार एक वक्त भोजन कर के ही वक्त गुजार रहे हैं। कुछ तो ऐसे भी हैं जिन्हें एक दिन बाद पेटभर खाना नसीब हो पा रहा है। शासन या प्रशासनिक स्तर पर इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।

हालांकि जनप्रतिनिधियों के अलावा समाजसेवी संगठनों ने आगे आकर ऐसे परिवारों को खाना खिलाने का बीड़ा उठाया है। शहरभर में एक दर्जन से अधिक संगठन सक्रिय होकर लोगों को राशन और भोजन के पैकेट भी वितरित करा रहे हैं। भिण्ड व्यापार मेले में दुकान लेकर आए बलवीर खटीक के अनुसार करीब 70 व्यापारी ऐसे हैं जिनके लिए खाने का कोई इंतजाम नहीं है। बाजार बंद है, राशन उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

डीजल नहीं मिलने से खेतों में ही झड़ रही किसानों की फसल

जिलेभर में पेट्रोल पंप 24 घंटे में महज दो घंटे ही खुल रहे हैं। इनमें सिर्फ सरकारी कर्मचारियों को परिचय पत्र दिखाने पर डीजल व पेट्रोल दिया जा रहा है। परिचय पत्र पर ही मीडियाकर्मियों को भी फ्यूल दिया जा रहा है।

इन दिनों डीजल की सर्वाधिक जरूरत किसानों को है। कृषकों की सरसों की फसल खेतों में कटी रखी है। थ्रेसर से फसल कतरवाने के लिए डीजल चाहिए जो किसी नहीं मिल पा रहा है। अकोड़ा निवासी किसान केशव यादव बताते हैं कि ओलावृष्टि की मार से पहले ही सताए हुए हैं। फसल में जो दाने बचे हैं वह भी खेतों में ही झडऩा शुरू हो गए हैं।

इसी प्रकार बाराकला निवासी राजवीर सिंह कहते हैं फसल खेत से घर लाने के लिए डीजल की जरूरत है जिसके लिए पांच दिन से चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उपलब्ध नहीं हो रहा। वहीं छगूपुरा निवासी भारत सिंह ने बताया कि सरकार को राजस्व बढ़ाने की चिंता है किसानों की नहीं।

शराब की दुकानें फिक्र से खुलवा दीं जबकि पेट्रोल पंप बंद कर रखे हैं। गिरिंदपुरा निवासी पप्पू सिंह का कहना है कि फिलिंग सेंटर खुलने से कोरोना वायरस फैल रहा है शराब की दुकान खुलने से नहीं फैलेगा ये कैसी व्यवस्था है समझ में नहीं आ रही।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आदेश दिए है कि अगर किसी की भी दुकानदारी चालू रही तो उसके खिलाफ सख्त कार्यवाई की जाएगी।

पुलिसकर्मी बोले-

आवागमन करने से टोकने पर लोग कह रहे शराब की दुकान खुली है तो पौआ लेने आए हैं


किराना, सब्जी मंडी तथा गृहस्थी की अन्य उपयोगी वस्तुओं की दुकानें बंद हैं वहीं शराब की दुकानें खुलवााने से लोगों में खासी नाराजगी देखने को मिल रही है। यह आक्रोश उग्र रूप भी अख्तियार कर सकता है।

लोगों को सड़कों पर आवागमन करने से रोकने के लिए तैनात पुलिसकर्मी भी अब किसी व्यक्ति को आने जाने से रोक नहीं पा रहे हैं। थाना प्रभारी उदयभान सिंह यादव ने बताया कि हम यदि किसी के सड़क पर निकलने पर उसे टोकते हैं तो वह सीधा जवाब दे रहा है कि शराब की दुकान नियमानुसार खुली है तो पौआ लेने जा रहे हैं।

ऐसे में किसी जरूरतमंद को राशन तथा किसानों को डीजल के लिए भटकते देख पीड़ा महसूस हो रही है।

पत्रिका की कलेक्टर छोटे सिंह से सीधी-बात

लॉकडाउन में जब सब दुकानें बंद हैं तो शराब की दुकानें खुलवाने का क्या अर्थ है ?
कलेक्टर-

शासन के आदेश पर शराब की दुकानों को खुलवाया गया है, इसमें मैं कुछ नहीं कर सकता

पत्रिका-

आम आदमी को राशन नहीं मिल रहा और किसानों को डीजल और पेट्रोल के लिए भटकना पड़ रहा है जबकि शराब आसानी से उपलब्ध हो रही है, इसके लिए नियम शिथिल करने की क्या जरूरत पड़ गई ?

कलेक्टर-

इस पर फिलहाल ज्यादा चर्चा नहीं कर सकते मीटिंग में हैं, बाद में बात करेंगे

rishi jaiswal
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