24 हजार पेड़ लगाने का दावा पर नजर नहीं आता एक भी

24 हजार पेड़ लगाने का दावा पर नजर नहीं आता एक भी

Rajeev Goswami | Updated: 14 Jun 2019, 09:03:03 AM (IST) Bhind, Bhind, Madhya Pradesh, India

गड़बड़ी: निर्माण कंपनी ने कागजों में रोप 23800 पेड़, ग्वालियर-भिण्ड-इटावा राष्ट्र्रीय राजमार्ग नंबर 92 का मामला

भिण्ड. ग्वालियर-भिण्ड-इटावा राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर 92 पर 23 हजार 800 पेड़ कागजों में रोप दिए गए हैं। ग्वालियर से इटावा तक 108 किमी के दायरे में सडक़ के किनारे कथित रूप से रोपे गए ये पेड़ कहीं नजर नहीं आते। मई-जून के गर्म महीनों में इस राजमार्ग पर कोलतार की सडक़ आग उगलती है। भिण्ड जिले के अटेर विधायक डॉ अरविंदसिंह भदौरिया ने प्रदेश सरकार के लोक निर्माणमंत्री स"ानसिंह वर्मा द्वारा उनके विस प्रश्र पर एनएच पर ये पेड़ रोपे जाने की मिथ्या जानकारी दी गई है। विधायक भदौरिया ने अब इस मामले को विधानसभा की प्रश्रसंदर्भ समिति के समक्ष उठाया है। अगर यह जानकारी झूठी साबित हेाती है तो समिति मंत्री के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है।

इस एनएच का निर्माण 2010 में शुरू हुआ था। तब चौड़ीकरण के लिए इसके किनारे खड़े 2365 बड़े-बड़े पेड़ काट दिए गए थे। काटे गए पेड़ों के स्थान पर निर्माण कंपनी को यहां 10 गुना अधिक नए पेड़ नियमानुसार लगाना थे व उनके परिपक्व (बड़े) होने तक उनको खाद पानी व सुरक्षा देकर रखरखाव भी करना था। लेकिन निर्माण एजेन्सी के द्वारा पेड़ों के रोपण व संरक्षण के खर्च की राशि बचाने के लिए कोई पेड़ नहीं लगाते हुए कागजों में 23 हजार 800 पेड़ लगाना बता दिया गया। फरवरी 2019 में विधायक डॉ अरविंदसिंह भदोरिया ने यह मामला विधानसभा में उठाया तो लोनिवि मंत्री स"ानसिंह वर्मा ने जवाब दिया कि एनएच पर काटे गए पेड़ों के स्थान पर 23800 पेड़ लगाए गए हैं जो 22 से 25 फीट ऊंचे हो गए हैं।

314.53 करोड़ है एनएच की कुल लागत : ग्वालियर भिण्ड इटावा नेशनल हाईवे भोगांव (उप्र) तक गया है, जो 171 किलोमीटर लंबा है। ग्वालियर से इटावा तक इसकी लंबाई 108 किमी है। मार्ग का 75 किमी हिस्सा उत्तर प्रदेश में व 96 किमी हिस्सा मप्र की सीमा में है। इटावा में यह भोगांव में एनएच 24 से लिंक हुआ है। ग्वालियर के गोला का मंदिर से मालनपुर उद्योग क्षेत्र (भिण्ड) तक मार्ग को फोर लेन में बनाया गया है। इसके बाद इटावा तक यह टू-लेन में बना है। बीओटी (बिल्ट आपरेट ट्रांसफर) योजना के तहत इसका निर्माण 314.53 करोड़ में हुआ है जिसमें से शासन की हिस्सेदारी लगभग 27.00 करोड़ रुपए है। इसका निर्माण एमपी हाईवेज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी द्वारा कराया गया है।

एमपीआरडीसी ने कहा, निर्माण कंपनी से वसूली जाए पौधरोपण की राशि

दूसरी तरफ मध्यप्रदेश सडक़ विकास निगम (एमपीआरडीसी) द्वारा विधानसभा में जवाब के साथ प्रस्तुत की गई रिपोर्ट में बताया गया कि निर्माण कंपनी द्वारा सडक़ पर लगभग 23000 पेड़ रोपे गए थे जिनमें से 10 प्रतिशत ही जीवित हैं। बड़ी संख्या में पेड़ इण्डियन रोड कांग्रेस (आईआरसी) के प्रावधानों के विपरीत गलत जगहों पर रोपे गए। कंपनी द्वारा अगर उनका 5 साल तक नियमानुसार रखरखाव किया जाता तो अब तक वे 20 से 30 फीट तक ऊंचे हो चुके होते। इसलिए निर्माण कंपनी से नियमानुसार पेड़ न लगाकर पर्यावरण को क्षति पहुंचाने एवं उनके रोपण व रखरखाव आदि के नाम पर शासन से प्राप्त गई धनराशि की वसूली की जानी चाहिए।

&एनएच 92 के निर्माण के दौरान काटे गए कुल पेड़ों की जगह 10 गुना पेड़ लगाए जाना थे, पर सडक़ पर आज एक भी पेड़ नहीं दिखता। सरकार ने विधानसभा में झूठा जवाब दिया है कि इस सडक़ पर 23,800 पेड़ रोपे गए हैं। मैंने इस संबंध में विधानसभा की प्रश्र संदर्भ समिति को शिकायत की है।

डॉ अरविंदसिंह भदोरिया, विधायक अटेर

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