हाईवे-92 पर ओवरलोड ट्रैफिक, हर साल गंवानी जाती है 200 की जान

आठ साल पहले प्रतिदिन गुजरते थे 10500 वाहन, अब यह आंकड़ा 30 गुना से ’यादा पहुंचा

By: Rajeev Goswami

Published: 01 Mar 2020, 07:27 PM IST

भिण्ड. हाईवे-92 पर दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे वाहनों के बोझ से एक ओर आवागमन प्रभावित हो रहा है। दुघर्टनाओं में प्रति वर्ष औसतन 200 से 250 राहगीरों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ रहा है। क्षमता से अधिक वाहनों के दौैडऩे से हाईवे को टू लेन से सिक्स लेन में तब्दील किए जाने की मांग जोर पकडऩे लगी है। विकास की राह ताक रहे लोगों को उम्मीद है कि हाईवे के चौड़ीकरण से जिले में विकास के द्वार खुलने की संभावना है।

बीओटी स्कीम से ग्वालियर से लेकर बरही तक 108 किमी लंबे हाइवे का निर्माण 314.53 करोड़ की लागत से कराया गया था। वर्ष 2012 में इस रोड पर से वाहनो का आवागमन शुरू हो गया था। टोल बैरियरों के रिकॉर्ड के अनुसार वर्तमान में 24 घंटे के भीतर हाईवे-92 से होकर करीब 30 हजार से अधिक वाहनों का आवागमन रहता है जबकि चौड़ीकरण से पूर्व इस रोड से 10000 से 10500 तक वाहनोंं आवागमन रहता था। मप्र से उप्र को जोडऩे वाला यह अंचल का इकलौता और सबसे ’यादा व्यस्त मार्ग है। जाहिर है कि इन आठ सालों में हाईवे से निकलने वाले वाहनों की संख्या तीन गुना से अधिक हो गई है। कहने को यह मार्ग टूलेन है कि लेकिन बीच में डिवाईडर या रेडियम लाइनिंग न होने से इस मार्ग से होकर निकलने वाले वाहन चालक की जरा सी असावधानी से अनियंत्रित होकर दुघर्टनाग्रस्त हो जाते हैं। सडक़ की क्षमता से कई गुना अधिक वाहनों के दौडऩे से कई बार जाम के हालात बनते हैं। फूप से लेकर बरही पुल तक को महीनें में कई बार जाम लगने के हालात पैदा होते हैं। टै्रफिक विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार इस मार्ग पर प्रतिसाल 650 से लेकर 700 तक दुघर्टनाएं होती है और इनमें औसतन 200 से लेकर 250 राहगीरों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। विशेषज्ञों की राय है कि यदि इससे सिक्सलेन में तब्दील कर दिया जाए तो न सिर्फ दुघर्टनाओं में कमी आएगी बल्कि विकास के द्वार भी खुल सकते हैं।

तीन पुलों की लोड क्षमता 40 टन, निकल रहे हैं 70 टन बजनी वाहन

भिण्ड से इटावा तक 35 किमी की दूरी में क्वारी, चंबल और यमुना नदियों के पुल है। तीनों पुलों का निर्माण 60 साल पहले 40टन की क्षमता के अनुसार कराया गया था। वर्तमान में न सिर्फ वाहनोंं की संख्या कई गुना बढ़ी है बल्कि 70-70 टन बजन के ट्रोला भी रोज सैकड़ो की संख्या में जर्जर पुलों से गुजर रहे हैं। प्रशासन की ओर से चेतावनी बोर्ड तो लगा दिए गए है लेकिन ओवरलोडिंग रोकने के लिए कोई कोशिश नहीं की गई है। दो माह पहले ही लोनिवि राष्ट्रीय खंड -1 इटावा के कार्यपालन अभियंता ने इटावा और भिण्ड के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर हैवी लोड वाहनों पर नियंत्रण लगाने की अपील की थी। ये तीनों पुल इसी हाईवे-92 पर हैं।

-चंबल एक्सपे्रस वे से जिले के कुछ ही हिस्से को लाभ मिलना है जबकि हाईवे-92 के डपलपमेंट से जिले के 80 फीसदी से अधिक हिस्से को लाभ मिलेगा। भिण्ड में रिंग रोड बनने से शहर का भी विकास होगा। ये मेरा ड्रीम प्रोजेक्ट है इसके लिए हम केंद्र और रा’य सरकार से पहल क रेंगे।

-संजीव सिंह कुशवाह विधायक भिण्ड

-हाईवे -92 वाहनों का लोड दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। यदि इसको सिक्स लेन कर दें तो मालनपुर से बरही तक कई फ्लाई ओवर बन जाएंगे और कई रिसोर्ट आदि के साथ विकास की गतिविधियां शुरू हो जाएंगी। हाईवे-92 को सिक्स लेन बनाने के लिए सीएम के सामने प्रस्ताव रखेंगे। इससे चारों विधान सभा के लोगों को लाभ मिलेगा।

-रणवीर जाटव विधायक गोहद

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