खदानों से ओवरलोड ट्रक ढाबों और धर्मकांटों पर हो रहे खाली

ट्रक में 600 फीट रेत अंडरलोड माना जाता है जबकि खदान से ट्रक चालक 800 फीट तक लेकर आते हैं। चूंकि उप्र की सीमा में आईएसटीपी अनिवार्य कर दिए जाने से ओवरलोड रेत ले जाना संभव नहीं होता।

फूप. रेत माफिया ने उप्र में अवैध परिवहन को लेकर चल रही सर्तकता के बीच कमाई का नया फंडा तरीका अपना लिया है। खदानों से ओवरलोड आने वाले ट्रक अतिरिक्त रेत को हाइवे-92 पर चल रहे ढाबों और धर्मकाटों पर औने-पौने भाव में बेच जाते हैं। इसी रेत को ढाबा मालिक स्थानीय जरूरतमंदों को महंगे में बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।

जिले की विभिन्न खदानों से रेत का ट्रक भरकर लाने में 18 हजार का खर्च आता है। ट्रक में 600 फीट रेत अंडरलोड माना जाता है जबकि खदान से ट्रक चालक 800 फीट तक लेकर आते हैं। चूंकि उप्र की सीमा में आईएसटीपी अनिवार्य कर दिए जाने से ओवरलोड रेत ले जाना संभव नहीं होता। अधिकांश ट्रक चालक अतिरिक्त रेत को धर्मकांटो-ढाबों पर ही छोड़ जाते हैं। स्थानीय लोगों क ी मानें तो 200 फीट रेत बमुश्किल एक हजार रुपए में मिल जाती है जबकि यही रेत स्थानीय जरूरतमंदों को 2000 से 2500 में बेच दिया जाता है। रॉयल्टी की चोरी होने से शासन को प्रतिदिन लाखों का नुकसान होने के बाद भी प्रशासन और खनिज विभाग का रवैया उदासीनतापूर्ण है। कनकूरा से बरही करीब 12 किमी तक हाइवे पर अवैध रेत के 150 से अधिक डंप लगे हुए हैं। महीनों से यह कारोबार चलने के बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। सड़क के किनारे ढेर लगे होने से हादसों की संख्या में वृद्धि की संभावना है। हाइवे के अलावा गांवों की ओर जाने वाले एप्रोच रोड़ा पर भी कई स्थानों पर रेत के डंप लगे हुए हैं।

हाइड्रा लगाकर भरी जाती है टै्रक्टर और ट्रक में रेत
ढाबों और धर्मकाटोंं पर डंप रेत का जैसे ही किसी जरूरतमंद से सौदा होता है वैसे ही रेत को हाइड्रा से ट्रक और ट्रैक्टरों मेंभर का रवाना दिया जाता है। फूप और आसपास के दो दर्जन से अधिक गंावों में यदि किसी को रेत की जरूरत होती है तो वो सीधे ढाबों और धर्मकांटों पर ही संपर्क करता है। कई लोगों ने तो सिर्फ रेत का कारोबार करने के लिए ही रोड के किनारे ढाबे बना रखे हैं। प्रतिदिन 25 ट्रैक्टर-ट्राली और 10 से 15 ट्रक रेत का अवैध कारोबार ढाबो और धर्मकांटों से हो रहा है।

हाइवे पर लगे डंपों के बारे में कई बार खनिज विभाग को अवगत करा चुके हैं। पुलिस ने 15 दिन पहले ही कई डंपों की रेत नष्ट कराई थी। जिम्मेदारी खनिज विभाग की है। हमारी ओर से तो लिखित में सूचना भी दी जा चुकी है।

rishi jaiswal
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