प्रसूता से वसूले 2000 रुपए, डिलीवरी के बाद हालत बिगडऩे पर जिला अस्पताल भेजा, हुई मौत

  • पिता की मौत पर अंतिम दर्शन करने के लिए पीहर आई थी मृतका
  • बोले चिकित्सक - हीमोग्लोबिन कम था, परिजन बोले - प्रसव के लिए भर्ती करने के दौरान कुछ नहीं बताया, आक्रोशित होकर लगाया जाम

By: हुसैन अली

Published: 15 Sep 2021, 10:26 PM IST

भिण्ड. पिता की मौत पर अंतिम दर्शन के लिए पीहर आई गर्भवती बेटी को 14 सितंबर की रात करीब 10 बजे प्रसव पीड़ा होने पर अटेर के प्रसूतिगृह ले जाया गया जहां उसके परिजनों से पांच हजार रुपए की मांग की गई। अंतत: 2000 रुपए लेने के उपरांत भर्ती कर लिया गया। 15 सितंबर की सुबह उसने बेटी को जन्म दिया। प्रसव उपरांत महिला की हालत बिगडऩे पर उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया जहां पहुंचने से पूर्व उसकी मौत हो गई। अव्यवस्था से गुस्साए परिजनों ने अटेर की संबंधित नर्सों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए जच्चा का शव जिला अस्पताल के बाहर रखकर लश्कर रोड पर जाम लगा दिया।

जानकारी के अनुसार 14 सितंबर की रात 8 बजे 24 वर्षीय गर्भवती रीना पत्नी अजय वाल्मीक निवासी रामपुर बिठौली जिला आगरा यूपी अटेर कस्बे में अपने 70 वर्षीय पिता सूरतराम वाल्मीक के देहांत पर अंतिम दर्शन के लिए पति को साथ लेकर आई थी। पीहर पहुंचने पर रात करीब 10 बजे उसे प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। ऐसे में परिजन उसे अटेर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। रीना की चाची रामकली व सुशीला ने संयुक्त रूप से बताया कि प्रसूतिगृह में तैनात एएनएम ओमबती के अलावा अन्य दो नर्सों ने प्रसव कराने के एवज में पांच हजार रुपए की मांग की। ऐसे में उन्हें प्रसव पीडि़त रीना के पिता की मौत का हवाला देते हुए महज 2000 रुपए दे दिए। तदुपरांत रीना को भर्ती कर लिया गया। 15 सितंबर की सुबह ७ बजे रीना ने बेटी को जन्म दिया। उसके करीब आधा घंटे बाद रीना की हालत बिगडऩे लगी। ऐसे में अटेर अस्पताल की नर्सों ने ये कहते हुए उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया कि रीना का हीमोग्लोबिन कम है। जिला अस्पताल पहुंचने पर रीना ने दम तोड़ दिया।

अटेर में नहीं है शिशु एवं महिला रोग विशेषज्ञ चिकित्सक

उल्लेखनीय है कि अटेर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में महिला एवं शिशु रोग विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं हैं। ऐसे में प्रसव के लिए क्षेत्र की महिलाओं को जान दांव पर लगानी पड़ रही है। ऊपर से नर्सों द्वारा की जाने वाली अवैध उगाही भी लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। यदि विशेषज्ञ चिकित्सक मौजूद होता तो शायद रात में ही उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया होता। अगर रीना के शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी थी तो जिला अस्पताल में उसे के ग्रुप का रक्त उपलब्ध कराकर उसकी जान बचाई जा सकती थी। लेकिन नर्सों ने ऐसा नहीं किया। नतीजतन एक बेबश प्रसूता की जान अटेर अस्पताल में कार्यरत नर्सों की खुदगर्जी की भेंट चढ़ गई।

बॉक्स- दो वर्ष पूर्व हुई थी शादी, पहला था रीना का प्रसव

मृतका की चाची रामकली व सुशीला के अनुसार रीना की शादी दो वर्ष पूर्व हुई थी। पिता सूरतराम की मौत की खबर सुनकर वह अपने पति अजय वाल्मीक को लेकर पीहर आई थी। उसे क्या पता था कि यहां आकर वह अपनी जान से ही हाथ धो बैठेगी। आधा घंटे से अधिक समय तक रहे जाम को पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर मौजूद लोगों को समझाइश देकर खुलवाया। मृतका के परिजनों की मांग थी कि अवैध वसूली में जुटी नर्सों व एएनएम के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं। दोषी पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अटेर अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक की रिक्वायरमेंट भी शासन को भेजी जा चुकी है।

डॉ. अजीत मिश्रा, सीएमएचओ, भिण्ड

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