अधिकारियों को कानोंकान खबर नहीं, रेत माफिया ने सरकारी जमीन से निकाल दिए रास्ते

पोकलेन मशीन से रातोंरात चंबल के घाटों तक बनाए कच्चे रास्ते, रौंदी जा रही है किसानों की फसल
सेंचुरी, वन, राजस्व विभाग के अधिकारी एक दूसरे के सिर फोड़ रहे हंै ठीकरा

अंबरीश शुक्ला
फूप. चंबल सेंचुरी क्षेत्र में किसी भी प्रकार की मानवीय गतिविधि पर प्रतिबंध होने के बाद भी फूप सर्किल में आने वाले आधा दर्जन से अधिक घाटों तक जाने के लिए रेत माफिया ने सरकारी जमीन से ही अवैध रूप से रास्ते बना लिए हैं। सालों से रेत उत्खनन होने के बाद भी अधिकारियों को कानोकान खबर नहीं है। यही नहीं अधिकारी एक दूसरे के सिर पर ठीकरा फोड़ रहें हैं।
चार माह पहले तक चंबल से रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन करने के लिए गांव के पास से जाने वालेे रास्तों का उपयोग करता था, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के बाद माफिया ने उक्त गांवों से 500 मीटर से एक किमी की दूरी पर घाटों की ओर जाने के लिए रास्ते बना लिए हैं। बरही घाट तक जाने के लिए दो रास्ते बनाए गए हैं एक रास्ता गांव के पास से ही बीहड़ के रास्ते से जाता है तो दूसरा रानीपुरा के होकर गुजरता है। इसी प्रकार गढ़ा-चांचर, संाकरी गंाव से एक किमी दूर चंबल तक जाने के लिए कच्चा रास्ता बनाया है। रमा गंाव से दो किमी दूर अलग से रास्ता बनाया है। इन रास्तों की लंबाई 3 से 6 किमी तक हैै। उक्त सभी रास्ते राजस्व, चंबल सेंचुरी और वन भूमि की जमीन से बनाए गए हैं। स्थानीय लोगों की मानें तो रेत माफिया ने मीलों लंबे रास्ते दो या तीन दिनों में ही तैयार कर दिए हैं। कच्चे रास्ते बनाने के लिए कानपुर से पोकलेन मशीन मंगाई थी। इस मशीन ने दो-तीन दिनों ेमें ही रास्ते बना दिए हैं। ग्रामीणों ने गुप्त रूप से शिकायत भी की थी, लेकिन संबंधित विभाग के अधिकारियों ने संज्ञान ही नहीं लिया। कई गांवों में तो बीच में पडऩे वाली किसानों की जमीन से भी रास्ते निकाल दिए हैं। खेतों में खड़ी फसल भी वाहनों से रौंद दी है। चंबल के घाटों पर वन एवं सेंचुरी के एक-एक डिप्टी रेंजर तथा दो वनकर्मियों की तैनाती रहने के बाद भी माफिया पर शिकंजा नहीं कस पा रहा।
अवैध उत्खनन उजड़ रहें हंै बसेरे, संरक्षित जलीव, जीव-जंतुओं को भी खतरा
भिण्ड जिले में अंबाह-पोरसा से पचनदा तक 90 किमी चंबल का क्षेत्र घडिय़ालों तथा अन्य जलीय, जीव जंतुओं के लिए संरक्षित है। बिना केंद्र सरकार की अनुमति के यहां पर किसी प्रकार की गतिविधि नहीं की जा सकती। इसके बाद भी इस क्षेत्र में आने वाले सभी 18 घाटों पर सालों से अवैध उत्खनन हो रहा है। चंबल से रेत उत्खनन जितनी कड़ाई से प्रतिबंधित है, अधिकारी उतने ही बेपरवाह हैं। अवैध उत्खनन से जलीय, जीव जंतुओं के प्राकृतिक बसेरे उजड़ जाने से जीवों के जीवन पर खतरा पैदा हो गया है।
एक दूसरे पर फोड़ा ठीकरा
समय-समय पर कार्रवाई की जाती है। कई बार रास्ते बंद करने के लिए गड्ढे भी खुदवा दिए थे, लेकिन माफिया 10-15 दिन बाद ही फिर से रास्ते बना लेते हैं। कई जगह पर वन विभाग की जमीन है, उन्हें भी कार्रवाई करनी चाहिए।
एसडी अरोरा, रेंजर घडिय़ाल सेंचुरी परिक्षेत्र अंबाह
राजस्व एवं सेंचरी की जमीन से रास्ते बनाए गए हैं। इस संबध में उन्हें कार्रवाई करनी चाहिए। हमारे भूमि पर रास्ते नहीं बनवाए गए हंै। इसके बाद भी हम दिखवा रहे हंै, सीनियर अधिकारियों को अवगत कराएंगे।
वीएस सिकरवार, रेंजर वन विभाग रेंज अटेर
चंबल से रेत उत्खनन रोक ने के लिए संयुक्त दल बना दिया गया है। किसी भी कीमत पर अवैध उत्खनन नहीं करने देंगे। रास्ते भी नष्ट कर दिए जाएंगे। कुछ दिनों पहले ही ज्ञानपुरा घाट पर छापामार कार्रवाई हो भी चुकी है।
एसबी शर्मा, एसडीएम भिण्ड

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महेंद्र राजोरे Desk
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