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गरीब परिवार के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देकर संवार रहे भविष्य

एक दशक में 500 से ज्यादा बच्चों को नि:शुल्क कराई प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी,

भिंड

Published: February 18, 2022 10:09:54 pm

अब्दुल शरीफ भिण्ड. इस दौर में जहां शिक्षा का पूरी तरह से व्यवसायीकरण हो गया है वहीं शासकीय माध्यमिक विद्यालय रघु का पुरा में पदस्थ एक शिक्षक न सिर्फ अपने स्कूल में बच्चों को गुणवत्तायुक्त शिक्षा प्रदान कर रहे हैं बल्कि विद्यालय जाने से पहले एवं छुट्टी होने के उपरांत गरीब परिवार के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दे रहे हैं। यह सिलसिला एक दशक से चल रहा है।
अनिल सिंह कुशवाह पुत्र सोबरन सिंह कुशवाह निवासी वार्ड नंबर २३ विजय नगर भिण्ड वर्ष २००८ में सरकारी विद्यालय में बतौर शिक्षक नियुक्त हुए। नौकरी लग जाने के तीन साल बाद वर्ष २०११ से उन्होंने गरीब बच्चों का भविष्य संवारने का बीड़ा उठाया। नि:शुल्क शिक्षा देने से पूर्व संबंधित छात्र के घर जाकर वह उसकी माली हालत भी देखते हैं। वास्तविक रूप से जरूरतमंद छात्र, छात्रा को वे नि:शुल्क शिक्षा प्रदान करना शुरू कर देते हैं। गुजरे १० साल में उन्होंने ५०० से ज्यादा बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई। इनमें से करीब ३०० विद्यार्थी पुलिस सहित विभिन्न सरकारी सेवाओं में सेवारत हो गए हैं।
बॉक्स- ड्यूटी से पहले और ड्यूटी के बाद रोज होते हैं सेवा के लिए समर्पित
शिक्षक अनिल सिंह कुशवाह की दिनचर्या कुछ इस तरह है। सुबह चार बजे जागकर स्वयं ही उस कक्ष की सफाई करते हैं जहां वह बच्चों को पढ़ाते आ रहे हैं। तदुपरांत सुबह ७ बजे से ८ बजे तक विद्यार्थियों को पढ़ाने के उपरांत विद्यालय में ड्यूटी करने पहुंचते हैं। वहां से छुट्टी होने पर शाम को ७ बजे से रात ८ बजे तक पुन: छात्र, छात्राओं को पढ़ाते हैं। एक बैच में १० से १२ छात्र, छात्राओं को पढ़ाते हैं।
बॉक्स- इसलिए पढ़ा रहे नि:शुल्क ताकि गरीब तबके के बच्चे भी हों शिक्षित
शिक्षक अनिल सिंह कुशवाह बताते हैं कि वह नि:शुल्क इसलिए पढ़ा रहे हैं ताकि गरीब तबके के बच्चे भी शिक्षित होकर समाज की मुख्य धारा से जुड़ सकें। अनिल सिंह कहते हैं कि आज के दौर में शिक्षा इतनी महंगी है कि गरीब परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई का खर्च वहन नहीं कर पा रहे। कई परिवार मजबूरी में बच्चों की पढ़ाई बंद करवाकर उन्हें काम पर लगा देते हैं। पैसों के अभाव में किसी बच्चे की शिक्षा प्रभावित न हो इसलिए जीवन पर्यंत ऐसे बच्चों को पढ़ाते रहना चाहते हैं।
कथन-
नि:शुल्क शिक्षा प्रदान कर मेरे जीवन को संवारने में अनिल सर का बड़ा योगदान है। यदि वह नहीं पढ़ाते तो शायद महंगी शिक्षा के इस दौर में यह मुकाम नहीं मिल पाता।
आमिर खान, आरक्षक भोपाल
कथन-
हम चार भाईयों को सर ने नि:शुल्क शिक्षा प्रदान की। उनके इस योगदान से मैं आज पुलिस सेवा में हूं। इस तरह के शिक्षकों की संख्या बढ़ जाए तो समाज की दशा बदल सकती है।
अजय सीसोदिया, आरक्षक खण्डवा
-----------अब्दुल शरीफ
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