मुंह दबाकर हाथ पैर बांध दिए थे आरोपी ने

बारात देखने घर से निकली थी पीडि़ता, सख्त कानून बना, फिर भी नहीं है खौफ

By: monu sahu

Published: 25 Apr 2018, 05:52 PM IST

भिण्ड. भले ही १२ साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ रेप करने के आरोपी को फांसी दिए जाने का कानून बना दिया गया है। विकृत किस्म के हैवानों पर इसका कोई असर नहीं है। २२ अप्रैल की देर रात भिण्ड शहर के नगर पालिका कार्यालय के पीछे स्थित झुग्गी झोंपड़ी में रहने वाली १२ वर्षीय मासूम से दुष्कर्म इसका ज्वलंत उदाहरण है।

इंदौर के राजबाड़ा में गरीब परिवार की छह माह की दुधमुही बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या कर दिए जाने का मामला शांत भी नहीं हो पाया था कि भिण्ड में ऐसे ही एक गरीबी और बेरोजगारी से जूझ रहे परिवार की बच्ची के साथ हैवानियत कर दी गई। पीडि़त बच्ची का एक तीन वर्षीय भाई भी है। उसकी मां दिन भर कचरा बीनती है और शाम को उसे कबाडि़ए की दुकान पर बेचकर बच्चों के भरण पोषण का इंतजाम करती है। भले ही सरकार ने अत्यंत गरीब परिवारों के लिए कई प्रकार की योजनाएं संचालित कीं हैं लेकिन किसी योजना का लाभ पीडि़त बच्ची के परिवार को नहीं मिल रहा है। जीवन की बुनियादी जरूरत रोटी, कपड़ा और मकान है। लेकिन झोंपड़ी में रहकर तंगहाली से जूझ रही पीडि़त बालिका की मां को सुख सुविधाएं तो दूर बुनियादी हक भी नहीं मिल पा रहे हैं।

मुंह दबाकर ले गया फिर हाथ पैर भी बांधे

पीडि़त बालिका ने पुलिस को बताया कि वह बारात देख रही थी तभी आरोपी जयवीर सिंह उर्फ चीकरा ने आकर उसका मुंह दबा लिया और बस स्टैण्ड के पीछे सुनसान स्थल पर ले जाकर उसने हाथ पैर भी बांध दिए। जहां आरोपी ने उसके साथ हैवानियत का घिनोना कृत्य किया।

आरोपी बोला पता नहीं पुलिस क्यों पकड़कर लाई, मैने नहीं किया दुष्कर्म-

कोतवाली में बैठे आरोपी ने बताया कि उस पर झूठा आरोप लगाया जा रहा है। उसे घटना के बारे में कुछ भी नहीं मालूम। मैं तो वारदात के वक्त उधर से सामान लेने के लिए गुजरा था। पीडि़त बच्ची द्वारा आरोपी की पहचान कराने के अलावा उसके बयान भी पुलिस ने दर्ज कर लिए हैं। इससे पूर्व बच्ची का मेडिकल परीक्षण भी करा लिया गया है।

झोंपड़ी के बजाए घर में रह रही होती तो शायद बच्ची नहीं हो पाती हैवानियत का शिकार

पीडि़त बच्ची अपने परिवार के साथ नपा कार्यालय के पीछे एक झोंपड़ी में रहती है जिसमें न कोई दरवाजा है और ना सुरक्षा के अन्य इंतजाम। रात में खुले आसमान के नीचे पूरा परिवार सोता है। कूलर, पंखे जैसी सुविधाएं इनके लिए महज एक सपना है। पीडि़त बच्ची की नानी के मुताबिक २२ अप्रैल की रात परिवार के सभी सदस्य झोंपड़ी के बाहर खुले में सो रहे थे। रोड से बैंड बाजे के साथ बारात गुजरने पर बच्ची कब उठकर देखने चली गई किसी को भनक तक नहीं हुई। देर रात जब बच्ची अपनी चारपाई पर नहीं दिखी तो उसकी तलाश की गई। झोंपड़ी से कुछ ही दूरी पर घायल हालत में बेहोश पड़ी मिली मासूम।

-मामले की शिकायत के बाद बच्ची का मेडिकल परीक्षण कराया गया है। आरोपी को गिरफ्तार कर उसकी पहचान भी पीडि़त बच्ची से करा ली गई है। मामले की जांच की जा रही है।

शैलेंद्र सिंह कुशवाह, टीआई सिटी कोतवाली भिण्ड

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