पेड़ों का जायका ऐसा कि शहर को दिला दी प्रदेश में पहचान

भिण्ड के पेड़े ऐसे कि जिसने खाए वह नहीं भूल पाया स्वाद

भिण्ड. शहर को द्वारिका के पेड़ों के स्वाद ने प्रदेश भर में पहचान दिला दी है। जिसने भी एक बार चखा वह स्वाद को भूल नहीं पाया। लिहाजा पेड़े के स्वाद को स्वत: ही मिल रही मकबूलियत के चलते मध्य प्रदेश सरकार ने भी द्वारिका पेड़ा को बीते साल एमपी का ब्राण्ड घोषित कर दिया है।


शहर के किला रोड प्रधान डाकघर के बगल से संचालित द्वारिका पेड़ा हाउस पर ग्राहकों का जमावड़ा बना ही रहता है। विदित हो कि 50 साल से भी अधिक समय से संचालित द्वारिका पेड़ा की शाखाएं अब भिण्ड शहर के अलावा ग्वालियर में भी संचालित हो गई हैं। संचालक राजीव जैन बताते हैं कि उनके नाना ने यह विरासत उनके पिता को दी थी जिसे अब वह और उनके भाई संभाल रहे हैं।


शुद्धता के लिए करते हैं दूध लाने से लेकर मावा तैयार करने तक की मशक्कत

पेड़ों में शुद्ध मावा और अन्य सामग्री उपयोग करने के लिए राजीव जैन अपने अन्य भाइयों के साथ मिलकर संयुक्त रूप से न सिर्फ स्वंय दूध लेकर आते हैं बल्कि मावा भी डेयरी से लेने के बजाए खुद ही तैयार करते हैं। लिहाजा चीनी और अन्य सामग्री भी अपने ही हाथों से मिश्रण करने का काम करते हैं। पेड़े किसी बाहर के हलवाई से नहीं बल्कि घर के सदस्यों द्वारा ही तैयार किए जाते हैं।


खपत के मुकाबले नहीं बन पा रहे पेड़े

बतादें कि पेड़ों की भिण्ड शहर के अलावा अन्य शहरों में भी खपत होने के चलते मांग ज्यादा बनी रहती है। लिहाजा खपत के मुकाबले पेड़े तैयार नहीं हो पाते हैं। राजीव जैन बताते हैं कि किराये के कारीगरों का उपयोग पेड़े बनाने में नहीं किया जाता है, यही वजह है कि घर के सदस्य जितना काम कर पाते हैं उतने ही पेड़े ग्राहकों को उपलब्ध हो पाते हैं। असल में शहर के लोग दूर दराज के शहरों में रह रहे करीबी रिश्तेदारों के घर पर भी द्वारिका पेड़ा ही भेजते हैं। दीपावली पर पेड़ों की मांग सर्वाधिक होती है। राजीव जैन के मुताबिक दीपावली पर बिक्री के लिए वह दो माह पूर्व से ही पेड़ों का स्टॉक बढ़ाने की तैयारी शुरू कर देते हैं।

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महेंद्र राजोरे Desk
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