scriptWife's ornaments, plots, sold, debtors made of five lakhs in the treat | बेटे के इलाज में पत्नी के गहने, प्लाट, बिके, पांच लाख के बने कर्जदार | Patrika News

बेटे के इलाज में पत्नी के गहने, प्लाट, बिके, पांच लाख के बने कर्जदार

नहीं मिल रही सरकारी मदद, हर दिन मौत के करीब बढ़ रही बेटे की जिंदगी।

भिंड

Published: February 20, 2022 03:56:03 pm

रविभान . भिंड।
जब तक जिंदा रहा दवा को तरस गया, सरकारी इमदाद भी मौत के बाद मिली। साहित्यकार सुनीलकांत त्रिपाठी की रचना की यह पंक्तियां गोरमी निवासी देवेंद्र श्रीवास पर फबती नजर आ रही हैं। अपने इकलौते बेटे की गंभीर बीमारी के इलाज में पत्नी के गहने, आजीविका चलाने वाली दुकान और जमीन तक बिक जाने के बावजूद बेटे को बीमारी सेे निजात नहीं मिल पाई है। हैरानी की बात यह है कि अति गरीबी से गुजर रहे इस परिवार को सरकार की एक भी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है और न ही कोई जनप्रतिनिधि तथा सामाजिक कार्यकर्ता मदद के लिए हाथ बढ़ा रहा है। लिहाजा दस वर्षीय मासूम तिल तिल मौत की ओर बढ़ हो रहा है।
जिले के गोरमी निवासी दस वर्षीय दिव्यांश थैलसीमिया मेजर बीमारी से जूझ रहा है। उसके इलाज में मां अंजना के गहने बिक गए। वहीं पिता देवेंद्र श्रीवास का कारेाबार खत्म हो गया है। बता दें कि दिव्यांश को सात दिन में एक यूनिट ब्लड की जरुरत रहती है। गरीबी और बेबशी दिव्यांश को हर दिन जिंदगी से दूर और मौत के करीब ले जा रही है। दिव्यांश के इलाज में सब कुछ खत्म होने के बाद उसकी बहन किरण की शिक्षा भी प्रभावित हो रही है। जिला अस्पताल में बेटे के इलाज के लिए भिंड के श्रीवास नगर में किराए के मकान में रह रहे हैं।
आठ से दस लीटर पानी बनता है पेट में :
दिव्यांश के पेट में आठ से दस लीटर पानी हो जाता है। इस कारण से उसका पेट फूल जाता है। उसकी हालत इतनी बिगड़ जाती है कि वह दर्द के कारण न ही बैठ पाता है और न ही लेट पाता है। दर्द की स्थिति की कल्पना भी नहीं की जा सकती कि उस समय परिवार कितना परेशान होता है। परिवार दोहरी मार झेल रहा है। एक ओर धन का संकट और दूसरी और बेटे बीमारी को बोझ।
नहीं बन पा रहा आयुष्मान कार्ड :
देवेंद्र श्रीवास बेटे दिव्यांश के इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए जिला अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं। जिला अस्पताल में जब डॉक्टर ने बच्चे के पेट में पानी होने की स्थिति में निकालने मे आनाकानी की तो मजबूरी में दिल पर पत्थर रखकर देवेंद्र ने खुद ही निडिल से बेटे के पेट से पानी निकाला।
संकट से जूझ रहा परिवार :
दिव्यांश की बीमारी से परिवार के सदस्य पूरी तरह से टूट चुके हैं। धन के साथ साथ सामाजिक दबाव से भी जूझ रहे हैं। पांच लाख रुपए का कर्ज हैं। बेटे के इलाज का कर्ज चुकाने की चिंता और बेटे का इलाज की परेशानी के कारण परिवार के सदस्यों की रातों को नींद नहीं आ रही है।
बेटे के इलाज में पत्नी के गहने, प्लाट, बिके, पांच लाख के बने कर्जदार
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----रविभान---

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