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भिवाड़ी

अनुदान लेकर गायब हुई 54 इकाइयों पर उद्योग विभाग का 4.20 करोड़ बकाया

27 साल से डिफॉल्टर इकाइयों की तलाश में जुटा डीआईसी नहीं मिल रहा सुराग

भिवाड़ीJun 29, 2024 / 07:32 pm

Dharmendra dixit

भिवाड़ी. सरकारें समय-समय पर औद्योगिक इकाइयों को अनुदान देकर उन्हें संबल प्रदान करती हैं, जिससे कि औद्योगिक इकाई निर्माण क्षेत्र में आने वाली बाधाओं को सरकार के सहयोग से दूर कर सकें और उत्पादन को निर्बाध रूप से चला सकें। सरकार का उद्देश्य होता है कि एक बार औद्योगिक इकाइयों को दिए गए सहयोग से सरकार के खजाने को सालों तक राजस्व प्राप्त होगा और औद्योगिक माहौल विकसित होगा, लेकिन अनुदान का लाभ लेने के बाद भिवाड़ी उद्योग क्षेत्र में कुछ इकाइयां ऐसी हैं जिनकी जिला उद्योग केंद्र (डीआईसी) को 25 वर्ष से तलाश है लेकिन अब उनकी खोज-खबर नहीं मिल रही है। राजस्थान सरकार ने 1990 से 1997 तक पूंजी विनियोजन अनुदान योजना शुरू की थी। योजना के तहत निर्माण करने वाली इकाइयों को उनकी प्लांट, मशीनरी और उत्पादन क्षमता के अनुसार ऋण अनुदान दिया जाता था। इस अनुदान के तहत संबंधित फर्म को पांच साल तक अपनी उत्पादन संबंधी रिपोर्ट डीआईसी को देनी होती थी। पांच साल तक रिपोर्ट देने के बाद उसे मिला अनुदान पूरी तरह सरकार द्वारा माफ कर दिया जाता लेकिन क्षेत्र में 54 इकाई ऐसी हैं जिन्होंने सरकार से 4.20 करोड़ रुपए का अनुदान लिया लेकिन पांच साल तक अपना लेखा-जोखा डीआईसी को पेश नहीं किया। जिससे ये इकाई डिफॉल्टर की श्रेणी में आ गई। डिफॉल्टर होने पर इन इकाइयों को दिया गया अनुदान विभाग को वापस लेना था। 27 साल से विभाग ऐसी इकाइयों की तलाश में लगा है लेकिन उनका कोई सुराग नहीं लग रहा है। क्योंकि जिन औद्योगिक इकाई और उद्यमियों ने यह अनुदान लिया था, तब से अब तक उन औद्योगिक भूखंड का चार से पांच बार बेचान हो चुका है। साथ ही उनके द्वारा दिए गए एड्रेस का भी मिलान नहीं हो रहा है। सरकार ने नवंबर 2022 में ऐसे डिफॉल्टर उद्यमियों को राहत देने के लिए एमनेस्टी स्कीम शुरू की थी। छूट योजना के तहत उस समय दिए गए अनुदान की सिर्फ 50 प्रतिशत राशि चुकाकर, 50 प्रतिशत अनुदान राशि, ब्याज और पेनल्टी राशि में माफी दी गई। योजना 31 मार्च 2023 तक रही। योजना के तहत सात निवेशकों ने आवेदन कर 24 लाख रुपए का मूल अनुदान जमा कराकर 1.94 करोड़ रुपए की छूट प्राप्त की थी।

डिफॉल्टर निवेशकों को भेजे नोटिस

एमनेस्टी स्कीम के बाद तत्कालीन कलक्टर के निर्देश पर संबंधित डिफॉल्टर निवेशकों के पते पर नोटिस भी भेजे गए लेकिन कलक्टर के तबादला होने के बाद इस दिशा में ज्यादा काम नहीं हुआ। अब उद्योग विभाग एक बार दोबारा से ऐसे डिफॉल्टर निवेशकों पर कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है।

27 साल पहले सरकार ने जो मदद की लेकिन निवेशक जरूरी दस्तावेज भी जमा नहीं करा सके। ऐसे निवेशकों को जल्द ही नोटिस दिया जाएगा। उनकी नाम से दर्ज अन्य संपत्तियों को कुर्क कर राजस्व वसूली की जाएगी।
एसएस खोरिया, जीएम, डीआईसी

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