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12 साल में बदले एक दर्जन अधिकारी, 147 खातेदारों को नहीं मिली विकसित भूमि

सलारपुर उद्योग क्षेत्र अधिग्रहण के बाद काश्तकारों को जमीन आवंटन का इंतजार

भिवाड़ीJun 10, 2024 / 07:07 pm

Dharmendra dixit

भिवाड़ी. सलारपुर 424 हेक्टेयर में नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित हो रहा है। अधिग्रहण की प्रक्रिया 2012 में शुरू हुई। तब से अब तक यहां के काश्तकारों को अधिग्रहित जमीन के बदले मिलने वाली 25 प्रतिशत विकसित भूमि आवंटित नहीं हुई है। इस अवधि में एक दर्जन से अधिक यूनिट हेड के तबादले हो चुके हैं। विधानसभा चुनाव से पहले लॉटरी से आवंटन के लिए अधिकारियों की एक कमेटी गठित हुई लेकिन कमेटी भी आवंटन नहीं करा सकी है।

काश्तकारों को भूमि आवंटन के इंतजार में सालों बीत चुके हैं। इसकी वजह से काश्तकार आए दिन रीको द्वितीय कार्यालय के चक्कर लगाते हैं और उन्हें अधिकारी आश्वासन देकर वापस भेज देते हैं। बीते दो तीन महीने से तो काश्तकार रोजाना रीको कार्यालय का पगफेरा कर रहे हैं। काश्तकारों का कहना है कि अधिकारी उनके पूर्वजों की जमीन लेने के बाद भी उन्हें भ्रमित कर रहे हैं। काश्तकारों का कहना है कि उन्हें जमीन के आरक्षण पत्र देने से पहले ही रीको ने यहां पर उद्यमियों को उद्योग लगाने भूखंड आवंटन कर दिया है। करीब 80 बीघा भूमि पर एक कलस्टर 2017 में विकसित हो चुका है। नवंबर 2022 से भूखंड के ऑक्शन लगाकर आवंटन शुरू कर दिए हैं। काश्तकारों का कहना है कि रीको को नियमानुसार सभी काश्तकारों को आरक्षण पत्र देने और जमीन आवंटन के बाद क्षेत्र का विकास करना चाहिए, काश्तकारों की जमीन का लॉटरी से आवंटन होने के बाद ही उद्यमियों को प्लॉट बेचने चाहिए। रीको अधिकारी काश्तकारों के हितों की अनदेखी कर रहे हैं। जो जमीन काश्तकारों के लिए रखी गई है उस पर विकास कार्य नहीं कराए जा रहे। काश्तकारों ने अपनी जमीन दे दी, अब उनके पास रोजगार का साधन नहीं है। ऐसी स्थिति में रीको को जल्द भूमि विकसित करने के बाद लॉटरी करनी चाहिए, जिससे काश्तकार अपना रोजगार शुरू कर सकें।

हाईकोर्ट के आदेश भी पांच साल बाद लागू

सलारपुर औद्योगिक क्षेत्र में 87 हेक्टेयर के 147 खातेदारों को आरक्षण पत्र जारी किए गए हैं। 31 खातेदारों के आपसी विवाद चल रहे हैं। 301 हेक्टेयर भूमि के खातेदारों को रीको ने नगद भुगतान कर दिया है या उनका पैसा कोर्ट में जमा कर दिया है। 23 हेक्टेयर के 22 खातेदार हाईकोर्ट चले गए थे। हाईकोर्ट ने 2017 में आदेश दिया कि उक्त काश्तकारों को जमीन के बदले 25 फीसदी विकसित भूमि दी जाए। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी रीको ने काश्तकारों को आरक्षण पत्र जारी करने में पांच साल लगा दिए। आवंटन अभी तक नहीं हुआ है।

विकास कार्य जारी

सलारपुर में विकास कार्य हो रहे हैं। सडक़, नाली-नाले और बिजली लाइन सहित अन्य जरूरी काम कराए जा रहे हैं। अगस्त 2019 को विकास कार्यों के लिए प्रशासनिक स्वीकृति जारी हुई थी। गांव वालों की मांग पर भूमि के बदले भूमि देने पर प्लॉट के साइज छोटे किए गए, पूर्व में तीन सौ वर्गमीटर और उससे अधिक आकार के भूखंड थे। भूखंड का आकार छोटा करने के लिए दोबारा से योजना तैयार कर स्वीकृति के लिए फाइल मुख्यालय भेजी गई है। अभी डिमार्केशन प्लॉट, जमीन को समतल, सडक़ निर्माण, डे्रनेज के काम चल रहे हैं।

इस तरह भूमि का उपयोग

83 हेक्टेयर में आवासीय और व्यावसायिक उपयोग होगा। उद्योग के लिए एक हजार वर्गमीटर से ऊपर के प्लॉट हैं। ऑटो जोन के लिए 249 हेक्टेयर, इलेक्ट्रोनिक मैन्यूफैक्चरिंग क्लस्टर (ईएमसी) के लिए 26 हेक्टेयर जमीन और जनरल जोन के लिए 26.74 हेक्टेयर जमीन रखी गई है।

आरक्षण पत्र बने कागज

जिन काश्तकारों को आरक्षण पत्र जारी हुआ है, उनकी जमीन पर फैक्ट्रियां लग चुकी हैं लेकिन अभी उनको विकसित जमीन का आवंटन नहीं हुआ है। काश्तकारों का कहना है कि ऐसे आरक्षण पत्र से किसान क्या करें, जिससे सालों बाद भी उन्हें भूमि नहीं मिली है। किसानों के हिस्से की एक चौथाई भूमि का पहले विकास होना चाहिए, उसके बाद ही ऑक्शन के लिए भूखंड लगाने चाहिए।

फाइल मुख्यालय भेजी गई है, जल्द ही लॉटरी की जाएगी।
आदित्य शर्मा, यूनिट हेड, रीको

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