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भिवाड़ी

अवैध बोरिंग और ईटीपी संचालन की जांच नहीं बढ़ सकी आगे

प्रभारी सचिव ने दो मार्च की बैठक में उक्त बिंदुओं पर दिए थे कार्रवाई के निर्देश
तब से दो बार जिले के दौरे पर आए प्रभारी सचिव

भिवाड़ीJun 27, 2024 / 07:40 pm

Dharmendra dixit

भिवाड़ी. जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए दो मार्च को प्रभारी सचिव ने क्षेत्र का दो दिवसीय दौरा किया। स्थानीय अधिकारियों के साथ लगातार बैठक कर कार्ययोजना तैयार की। प्रभारी सचिव की बैठक के बाद जिन बिंदुओं पर स्थानीय अधिकारियों को जांच कर कार्रवाई करनी थी, अभी उन मुद्दों पर भी जांच पड़ताल आगे नहीं बढ़ सकी है। जबकि प्रभारी सचिव के दौरे को चार महीने का समय निकल चुका है। प्रभारी सचिव ने बैठक में उद्योग एवं व्यावसायिक क्षेत्र में अवैध रूप से बिना अनुमति के संचालित बोरिंग पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके साथ ही जिन फैक्ट्रियों के अंदर ईटीपी हैं, उनकी वास्तविक स्थिति जानने के लिए निर्देशित किया था। उक्त दोनों बिंदुओं पर अभी तक जांच आगे नहीं बढ़ सकी है। मई के पहले सप्ताह में कुछ फैक्ट्रियों की जांच हुई बाद में मामला ठंडा हो गया।

अन्य आंकड़ें अभी तक नहीं बताए

प्रभारी सचिव नकाते शिवप्रसाद मदान की अध्यक्षता में हुई बैठक में कुछ बिंदु निकलकर सामने आए। इनमें सबसे महत्वपूर्ण था कि खुले में पानी छोडऩे वाली इकाइयों पर सख्ती की जाए। प्रशासन ने 15 मार्च को जो आंकड़े जारी किए उसके अनुसार 1100 इकाइयों का सर्वे किया गया था, जिसमें से खुले में प्रदूषित पानी छोडऩे पर 33 इकाइयों को बंद कराया गया था। 164 इकाइयों को मेमो नोटिस जारी किया गया था। मेमो नोटिस जारी 120 इकाईयों में निरीक्षण करने पर दूसरे माध्यम से छोड़ रहे पानी स्त्रोत को बंद कर दिया गया था। नियमों की पालना करने पर बंद इकाइयों को भी दोबारा चालू कराया गया है। प्रभारी सचिव की बैठक में जिन बिंदुओं पर कार्रवाई करने के लिए योजना बनाई गई थी, उनमें से अधिकांश पर अभी तक प्रशासन ने आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं। सिर्फ खुले में पानी छोड़ते पकड़े जाने वाली इकाइयों पर ही कार्रवाई की जानकारी दी गई है।

इसका अभी तक इंतजार

कितनी फैक्ट्रियों के अंदर ईटीपी लगे हुए हैं, उनमें कितना पानी शोधित होता है। उनका कितना स्लज निकलता है। ईटीपी वास्तव में सही रूप से काम कर रहे हैं या नहीं। औद्योगिक इकाइयों में बोरिंग की जांच, बोरिंग के पानी को हतोत्साहित करना, बिना अनुमति वाली बोरिंग पर कार्रवाई करना। बोरवेल सर्वे का उच्चाधिकारी द्वारा आकस्मिक सर्वे करना। इन बिंदुओं पर प्रशासन ने अभी तक जानकारी नहीं दी है।

अवैध बोरिंग पर रोक जरूरी

क्षेत्र में संचालित कुछ इकाइयों ने प्रदूषण मंडल से मिलकर कंसर्न टू ऑपरेट (सीटीओ) में भी गड़बड़ की है। बिना अनुमति के बोरिंग चल रहे हैं। सीटीओ सिर्फ उत्पादन शुरू करने के लिए एक जुगाड़ी दस्तावेज बनकर रह गया है। मिलीभगत से नियमों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। अधिकांश इकाइयों के अंदर चल रहे भूमिगत जल स्त्रोत के लिए अनुमति नहीं ली गई है। अगर इन बोरिंग की अनुमति और सीटीओ का मिलान हो तो हकीकत सामने आ जाएगी। अवैध बोरिंग और ईटीपी का सही प्रकार से काम नहीं करने की वजह भी जलभराव का बड़ा कारण है।

ईटीपी की जांच नियमित की जाती है, अभी हाल में ईटीपी में गड़बड़ी जैसा कुछ सामने नहीं आया है। अवैध बोरिंग को लेकर प्रशासन को कार्रवाई करनी है, बीच में आचार संहिता की वजह से जांच रोकी गई थी।
अमित शर्मा, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण मंडल

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