scriptसीएचसी से जिला अस्पताल में उन्नयन लेकिन स्टाफ का संकट | Patrika News
भिवाड़ी

सीएचसी से जिला अस्पताल में उन्नयन लेकिन स्टाफ का संकट

चिकित्सक एवं नर्सिंग स्टाफ नहीं होने से कैसे मिलेगा अच्छा इलाज

भिवाड़ीJun 20, 2024 / 06:56 pm

Dharmendra dixit

भिवाड़ी. उद्योग क्षेत्र में सरकार ने सीएचसी को पहले उप जिला और बाद में जिला अस्पताल घोषित कर दिया। जिला अस्पताल के घोषित होने से इलाज की बेहतर सुविधाएं और अच्छे चिकित्सकों की नियुक्ति होने की संभावना जागी थी लेकिन अस्पताल में अभी भी स्टाफ की बेहद कमी है। जिला अस्पताल में चिकित्सकों के 34 पद स्वीकृत हैं जिसमें से 18 रिक्त चल रहे हैं और 16 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। इस तरह चिकित्सकों के 50 फीसदी पद खाली हैं। इसी तरह नर्सिंग स्टाफ के 99 पद स्वीकृत हैं जिसमें से 40 स्थायी, 20 यूटीबी मिलाकर 60 कार्मिक हैं। नर्सिंग स्टाफ के 39 पद रिक्त हैं। अस्पताल में अप्रेल 2023 से मार्च 2024 तक 253163 मरीजों ने ओपीडी में इलाज कराया। इस तरह प्रतिदिन औसतन सात मरीज ओपीडी में इलाज कराने पहुंचे। चिकित्सकों की कमी होने, कभी चिकित्सकों के अवकाश पर होने से ओपीडी में दिखाने वाले मरीजों की लाइन लग जाती है। काफी देर में मरीजों का नंबर आता है।

इस तरह गड़बड़ होता है सिस्टम

जिला अस्पताल में प्रबंधन का काम डिप्टी कंट्रोलर संभालता है लेकिन पद रिक्त होने से पीएमओ को ही सारा कार्यभार करना पड़ता है। सर्जन का पद रिक्त होने से ऑपरेशन हर्निया, अपेडिंस, गॉल ब्लेडर और पेट के ऑपरेशन नहीं होते हैं जबकि अस्पताल में ऑपरेशन थियेटर तैयार है। मनो चिकित्सक का पद रिक्त होने से दिमागी रोग, मिर्गी के दौरे जैसी बीमारियों का इलाज नहीं हो पाता है। पैथोलोस्टि नहीं होने जांच की गुणवत्ता में सुधार नहीं होता। ब्लड बैंक शुरू नहीं हो सकती है। इस तरह कुछ चिकित्सकों के कार्यरत नहीं होने पर बहुत प्रभाव पड़ता है। अस्पताल में वर्तमान में एसएस मेडिसिन, एसएस सर्जन, एसएस गायनिक, एसएस पीडिएट्रिशियन, जेएस साइट्रिक, जेएस रेडियोलॉली, जेएस सर्जन, जेएस पैथलिस्ट और जेएस ऑर्थो के पद रिक्त हैं।

बेहतर सेवाएं कैसे मिलेंगी

मरीजों की सार संभाल एवं बेहतर सेवाएं देने की जिम्मेदारी नर्सिंग स्टाफ की होती है। चिकित्सक मरीज को दवा देकर उपचार करते हैं। इसी तरह नर्सिंग स्टाफ मरीज के साथ 24 घंटे खड़े रहते हैं। रोग में सुधार एवं परेशानी बढऩे संबंधी सभी गतिविधि का ध्यान नर्सिंग स्टाफ रखता है। जब नर्सिंग स्टाफ की कमी हो तब मरीजों को बेहतर उपचार कैसे मिलेगा।

त्वचा रोग का नहीं इलाज

जिला अस्पताल में त्वचा रोग के मरीज बड़ी संख्या में आते हैं। फैक्ट्रियों के अंदर केमिकल संबंधी काम करने वाले श्रमिक हों या उद्योग क्षेत्र में प्रदूषण की मार झेल रहे आमजन, उद्योग क्षेत्र में त्वचा रोग संबंधी बीमारियां अधिक संख्या में होती है। अस्पताल में त्वचा रोग विशेषज्ञ का पद काफी समय से रिक्त हैं। ऐसी स्थिति में ओपीडी में आने वाले श्रमिकों को मायूस होकर लौटना पड़ता है।

अस्पताल में आने वाले प्रत्येक मरीज को अच्छा इलाज मिले हमारी यही कोशिश रहती है। जल्द ही नया अस्पताल निर्मित हो जाएगा, इसके बाद इलाज की सुविधाएं अच्छी हो जाएंगी।
डॉ. प्रदीप अग्रवाल, कार्यवाहक पीएमओ

Hindi News/ Bhiwadi / सीएचसी से जिला अस्पताल में उन्नयन लेकिन स्टाफ का संकट

ट्रेंडिंग वीडियो