ट्रेन के टॉयलेट की छत में छिपाया था 1 क्विंटल गांजा

राजस्व खुफिया निदेशालय इंदौर की टीम ने समता एक्सप्रेस के स्लीपर कोच की दो अलग-अलग टॉयलेट से गांजा जब्त किया। आरपीएफ और जीआरपी को नहीं लगी भनक

By: मनोज अवस्थी

Published: 07 Jun 2018, 08:32 AM IST

भोपाल। राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआइ) इंदौर की टीम ने समता एक्सप्रेस के स्लीपर कोच की दो अलग-अलग टॉयलेट से लगभग १०० किलो गांजा बरामद किया है। गांजे को टायलेट की छत को खोलकर तस्करों ने छिपाकर रखा था। तस्करों ने गांजा रखकर छत की प्लाई को स्क्रू से फिर पैक कर दिया था। हालांकि टीम को गांजे के तस्कर हाथ नहीं लगे। बताया गया कि डीआरआइ की छापेमारी और ट्रेन में गांजा छिपा होने की आरपीएफ, जीआरपी को भनक तक नहीं लगी।

डीआरआइ इंदौर को सूचना मिली थी विशाखापट्टनम से निजामुद्दीन तक चलने वाली समता एक्सप्रेस के स्लीपर कोच-एस-३, एस-६ के टायलेट में बड़ी मात्रा में गांजे की तस्करी की जा रही है। टीम बुधवार तडक़े इंदौर से भोपाल पहुंची। जैसे ही ट्रेन भोपाल स्टेशन के प्लेटफार्म दो पर खड़ी हुई टीम ने दोनों कोच की तलाशी शुरू कर दी। तलाशी के दौरान कोच के दो टॉयलेट की छत पर गांजे के ५० पैकेट मिले। पुलिस ने ट्रेन में संदेही तस्करों को पकडऩे का प्रयास किया, लेकिन कोई संदिग्ध नहीं मिला।

 

डॉग स्क्वॉड से कभी नहीं होती जांच
गांजा तस्करी से जुड़े लोगों का कहना है कि ट्रेन में गांजा को पुलिस आसानी से नहीं पकड़ सकती। स्नीफर डॉग ही उसे पकड़ पाता है, लेकिन सुरक्षा बल स्नीफर डॉग से ट्रेन की जांच नहीं कराता। ऐसे में आसानी से तस्करी की जाती है।

इतना टेप चिपकाया कि हवा भी नहीं घुस सके
गांजा रखने के लिए तस्करों ने खास तरह के पैकेट बनाए थे। पैकेट में गांजा को कम्प्रेस कर भरा गया था। हर पैकेट का करीब दो किलो वजन था। पैकेट को टेप से इस तरह से चिपकाया गया था कि उसमें हवा तक नहीं निकल सकती थी। अधिकारियों को सैंपल देखने के लिए पैकेज को नुकीली चीज से खोलना पड़ा।

टॉयलेट में नहीं मिला तो छत के खोले स्क्रू
टीम ने जब ट्रेन की तलाशी शुरू की तो गांजा की खेप नहीं मिली। इसी बीच डीआरआइ की अधिकारी दिशा पाटनी ने टॉयलेट की छत खोलकर तलाशी लेने के लिए कहा। जवानों ने जैसे ही छत खोली गांजा से भरे पैकेट भरभराकर गिरने लगे। करीब ३० मिनट तक ट्रेन की तलाशी चलती रही।

रेलवे कर्मचारियों की संलिप्तता का संदेह
सूत्रों की मानें तो तस्करी का यह फिल्मी तरीका रेलवे स्टॉफ के बगैर संभव नहीं है। तस्करों के साथ रेलवे स्टाफ की भूमिका की टीम जांच कर रही है। टीम वॉशिंग शेड के स्टाफ की जांच करेगी। इस तरह के काम में करीब दो घंटे लगेंगे जबकि इतने समय तक ट्रेन कहीं भी नहीं रुकती।

विशाखापट्टनम-ओड़ीसा से आ रही खेप
विशाखापट्टनम, ओड़ीसा से बड़ी मात्रा में गांजे की खेप आ रही है। बिहार, दिल्ली के कई गैंग ट्रेन के जरिए गांजा की तस्करी कर रहे हैं। गांजा तस्करी से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि विशाखापट्टनम के आगे दुबड़ा, अल्कापल्ली रेलवे स्टेशन से गांजा ट्रेनों में लोड किया जाता है।

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मनोज अवस्थी
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