लाउडस्पीकर और डीजे से लोग परेशान, रोज हो रही शिकायत पर नहीं सुन रहे जिम्मेदार

डायल-100 के पास रोज पहुंच रही औसतन 14 शिकायतें, रात में 10 बजे के बाद डीजे और लाउडस्पीकर...

By: योगेंद्र Sen

Published: 10 Feb 2018, 08:30 AM IST

भोपाल. बोर्ड परीक्षाएं सिर पर है। स्टूडेंट्स दिन-राज पढ़ाई में लगे हैं। अभिभावक भी उनके लिए हर सुविधाएं जुटाने में लगे हैं। इसके बाद भी शहर में देर रात तक बजने वाले लाउडस्पीकर और डीजे उनकी पढ़ाई में खलल डाल रहे हैं।

धार्मिक आयोजनों और धर्मस्थलों पर लगने वाले कोन स्पीकर भी लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। इन तेज आवाज वाले लाउडस्पीकरों से पढ़ाई ही नहीं लोगों को स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है। स्थिति यह है कि रात में १० बजे के बाद डीजे और लाउडस्पीकर बजाने से परेशान १४ लोग हर रोज डायल-१०० में शिकायतें कर रहे हैं।

इन पर नियंत्रण के लिए मध्यप्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम भी बना हुआ है। इसके प्रावधानों में केवल सक्षम पदाधिकारी से अनुमति लेकर ही १२५ डेसीबल से ज्यादा साउंड वाले लाउडस्पीकर का उपयोग किया जा सकता है और वो भी सुबह छह से लेकर रात १० बजे तक ही।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं : सुप्रीम कोर्ट ने रात १० बजे के बाद डीजे पर रोक लगा रखी है, लेकिन शहर में इसका पालन नहीं हो रहा है। इस वजह से आसपास के रहवासियों खासतौर से बच्चे, बुजुर्ग, बीमार और परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं को परेशानी उठानी पड़ती है।
बढ़ रही है शिकायत करने वालों की संख्या: २०१६ में ४ हजार ६७१ लोगों ने डायल-१०० पर फोन कर इस तरह की शिकायत की थी। वहीं २०१७ में संख्या बढ़कर ५ हजार ७६८ हो गई। यानी औसतन हर रोज १४ शिकायतें आ रही हंै। पिछले साल के मुकाबले २०१७ में लाउडस्पीकर से परेशान शिकायतकर्ताओं में २० फीसदी तक बढ़ी है।

फरवरी-मार्च में ज्यादा शिकायतें : परीक्षाओं के दौरान छात्रों को तेज आवाज से काफी परेशानी होती है। डायल-१०० को शुरू हुए करीब ढ़ाई साल हो चुके हैं। नवंबर २०१५ से लेकर दिसंबर २०१७ तक कुल ११ हजार ९४ शिकायत सिर्फ उच्च शोर को लेकर की गई है। इसमंे २०१६ के फरवरी में ७१० और मार्च में 498 शिकायत की गई हैं। वहीं 2017 के फरवरी में 516 और मार्च में 532 शिकायतें दर्ज हुई हंै। हालांकि डायल-100 के पास कॉल आने के बाद पुलिस मौके पर जाती है और डीजे बंद करा देती है।

मद्रास हाईकोर्ट ने की तीखी टिप्पणी
हाल ही में मद्रास हाईकोर्ट ने प्रतिबंध के बावजूद जगह-जगह धार्मिक आयोजनों में बजने वाले कोन स्पीकर्स पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने राज्य के पब्लिक सेक्रेटरी को निर्देश दिए कि वे सभी कलेक्टरों को कोन स्पीकर्स पर प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने के निर्देश दें।२००३ में मद्रास हाईकोर्ट के जस्टिस ने भी इस मामले में तीखी टिप्पणी की थी।
1985 में बनाया गया है नियम
- ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए मध्यप्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम 1985 में बनाया गया है।
- इस कानून के अनुसार तेज ध्वनि वाले लाउडस्पीकर जिसमें ध्वनि का विस्तार करने के लिए एंप्लीफायर का उपयोग होता है रात १० से सुबह ६ बजे के बीच नहीं बजाए जाएंगे।

- किसी भी सार्वजनिक स्थान पर इनका उपयोग लोकल अथॉरिटी से अनुमति लेकर ही किया जा सकेगा।

- अस्पताल, नर्सिंग होम, टेलीफोन एक्सचेंज, कोर्ट, शैक्षणिक संस्थान, हॉस्टल, सरकारी कार्यालय, बैंक आदि के २०० मीटर के दायरे में लाउडस्पीकर का उपयोग नहीं किया जाएगा।

कोन टाइप लाउडस्पीकर को तभी परमिशन मिलेगी जब उन्हें लकड़ी की कैबिनेट में बंद किया गया हो। इनका उपयोग केवल प्राइवेट परिसर में किया जाएगा। साथ ही यह ध्यान रखा जाएगा कि ध्वनि परिसर के बाहर न जाए।

- सभी राष्ट्रीय त्यौहारों के साथ सभी धर्मों के त्यौहारों के दिन लाउडस्पीकर बजाने की छूट होगी।
- इस कानून का उल्लंघन करने वालों को ६ माह तक की कैद और एक हजार रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।

- कानून के तहत हेड कांस्टेबल से लेकर उच्च स्तर के सभी पुलिस अधिकारियों को उल्लंघन पाए जाने पर लाउडस्पीकर और डीजे सीज करने की शक्तियां दी गई हैं। वहीं जिला मजिस्ट्रेट को सायलेंस जोन घोषित करने की शक्तियां हैं।

योगेंद्र Sen Reporting
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