script11200 crore loan for electricity in MP | 26055 करोड़ के बजाय 12690 करोड़ दिए, 11200 करोड़ का लेना पड़ा कर्ज | Patrika News

26055 करोड़ के बजाय 12690 करोड़ दिए, 11200 करोड़ का लेना पड़ा कर्ज

कैग रिपोर्ट में बिजली में अनियमितता उजागर, देनदारी चुकाने में देरी
से घाटा कम हुआ नहीं, कर्ज भी बढ़ा, तय लक्ष्य अधूरे रहे

भोपाल

Published: September 23, 2022 01:48:50 pm

भोपाल. बिजली के मामले में कैग ने मध्यप्रदेश में अनियमितता का पहाड़ पाया है। दरअसल बिजली में प्रोजेक्ट उदय के तहत बिजली कंपनियों को आत्मनिर्भर करने के लिए 26055 करोड़ रुपए का कर्ज राज्य सरकार को अपने पास अधिगृहीत करना था लेकिन सिर्फ 12690 करोड़ का कर्ज ही अधिगृहीत किया। नतीजा ये हुआ कि कर्ज बढ़ता गया और घाटा भी कम होने के बजाय बढ़ता गया। कैग ने ऑडिट में पाया कि बिजली कंपनियों को आत्मनिर्भर करने के बजाय प्रदेश सरकार उल्टे बिजली कंपनियों को देनदारी को चुकाने में ही देरी करती रही। इससे कंपनियों की आर्थिक स्थिति और खराब हुई।
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देनदारी चुकाने में देरी से घाटा कम हुआ नहीं
कैग रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष.2016.17 से 2019.20 के लिए केंद्र का उदय प्रोजेक्ट आया था। इसके तहत मध्यप्रदेश को बिजली कंपनियों को आत्मनिर्भर करने उनके कर्ज को अधिगृहीत करना था। अगस्त 2016 में इसके समझौते पर हस्ताक्षर हुए। सितंबर 2015 की स्थिति में कंपनियों पर 34739 करोड़ रुपए का कर्ज था। इसका 75 फीसदी कर्ज राज्य सरकार को तय शर्तों के तहत अधिगृहीत करना था। इसमें केंद्र के उदय प्रोजेक्ट के तहत मदद मिलनी थी। इस 75 फीसदी हिस्से के तहत राज्य सरकार को 26055 करोड़ रुपए के कर्ज को अधिगृहीत करना था लेकिन सरकार ने सिर्फ 12690 करोड़ रुपए के कर्ज को ही अधिगृहीत किया। बाकी राशि नहीं दी गई। इससे पूरा प्रोजेक्ट खत्म होने के बावजूद मुख्य उद्देश्य पूरा नहीं हो पाया.
अतिरिक्त कर्ज लेना पड़ा
कैग ने पाया कि जिस अवधि में सरकार को 75 प्रतिशत कर्ज अधिगृहीत करना था उसी अवधि में कंपनियों को अतिरिक्त कर्ज लेना पड़ा। राशि 11200 करोड़ रही। यदि सरकार तय राशि के कर्ज का अधिग्रहण करती तो इस अतिरिक्त कर्ज की जरूरत ही नहीं पड़ती।
सुधर सकते थे कंपनियों के हाल
कैग ने माना कि जब बिजली कंपनियां घाटे में हैं तो देनदारियों को समय पर चुकाने से आर्थिक हालात सुधर सकते थे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मप्र में इस अवधि में ही सरकार पर 1606.23 करोड़ की बिजली भुगतान की राशि बची रही। इससे कंपनियों का आर्थिक संचालन में मुश्किल आई। बिजली कंपनियों और सरकार के बिजली महकमे के स्तर पर लक्ष्य पूरे करने और आर्थिक संचालन में कैग ने कोताही पाई। इसके चलते बोझ अप्रत्यक्ष रूप से उपभोक्ताओं पर आया।
- बिजली कंपनियों के परफॉर्मेंस के मामले में भी कैग नेमाना कि तय लक्ष्यों को पूरा नहीं किया जा सका।
- ट्रांसमिशन लॉस जो कम करना था वो बढ़ गया।
- बिजली कंपनियों को समग्र तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानि 15 प्रतिशत तक लानी थी जो 2015-16 में 23.45 प्रतिशत थी। इसके लिए चरणबद्ध कमी के लक्ष्य तय किए गए थे
- 2019.20 में हानि बढ़कर 33.08 प्रतिशत तक पहुंच गई। यह स्थिति कंपनियों के लिए आर्थिक परेशानी बढ़ाने वाली थी।

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