2 निकायों ने नहीं कराया जीआईएस सर्वे, समय पर नहीं हो पाएगा टैक्स का सही आंकलन

- सभी नगरीय निकायों को मार्च तक सर्वे कराने के निर्देश
- भोपाल में बैठकर अधिकारी देख सकेंगे टैक्स कलेक्शन की स्थिति

भोपाल। सरकार ने सभी निकायों को शहरी क्षेत्र के भवनों और व्यावसायिक संपत्तियों का जीआईएस बेस्ड मल्टीपरपज हाउस होल्ड सर्वे करने के लिए कहा है। इसमें सर्वे में एक दर्जन निकायत रुचि नहीं ले रहे हैं। इन निकायों ने अभी तक जीआईएस हाउसहोल्ड सर्वे कराने के लिए न तो टेंडर जारी किया है और न ही कोई तैयार की है। इन निकायों को जीएस सर्वे कराने के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने मार्च तक का समय दिया है।

जीआईएस हाउसहोल्ड सर्वे के बाद नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अधिकारी भोपाल में बैठे यह देख सकेंगे कितनी प्रापर्टियों के टैक्स अभी तक जमा नहीं हुए हैं। इतना ही नहीं, यह भी ऑकलन कर सकेंगे कि प्रापर्टी का जितना टैक्स निर्धारित है उतना टैक्स अधिकारियों ने वसूला है अथवा नहीं।

बताया जाता है कि जबलपुर, सागर, देवास, उज्जैन, बुरहानपुर, कटनी, सतना, रीवा, सिंगरौली, कटनी और रतलाम ने सर्वे कराने के लिए अभी तक निविदा जारी नहीं किया है। विभाग ने इन निकायों को सर्वे के लिए सभी निकायों को मार्च तक का समय दिया है।

टैक्स का होगा मिलान
मकान अथवा प्रपर्टी मालिकों ने अपने मकान का जितना टैक्स जमा किया है उसका मिलान जीआईएस सर्वे से किया जाएगा। अगर जीआईएस में मकान के अनुसार टैक्स नहीं जमा किया है तो बकाया की राशि मकान मालिक से वसूली की जाएगी। मकान मालिकों ने भवन अनुज्ञा के बिना ही अतिरिक्त मकान, दुकान बना लिया है अथवा उसका विस्तार कर लिया है, तो जीआईएसा सर्वे रिपोर्ट के अनुसार उसकी वसूली की जाएगी।

इसके साथ ही नगर निगम के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और प्रापर्टी मालिकों पर पेनाल्टी लगाई जाएगी। जीईएस सर्वे के डाटा को प्रापर्टी टैक्स के डाटा के साथ लिंक किया जाएगा। इसमें मकान मालिक, मकान का क्षेत्रफल और प्रापर्टी टैक्स का अपडेट हिसाब किताब नगरीय निकायों के पास रहेगा।

जीआईएस से शहर का प्लान भी होगा तैयार
सरकार जीआईएस हाउसहोल्ड सर्वे का उपयोग शहर के डेवलपमेंट प्लान, मास्टर प्लान तैयार करने में भी उपयोग करेगी। सड़कों और शासकीय जमीनों पर अतिक्रमण की स्थिति का भी पता लगाया जा सकेगा। इसके अलावा यह भी देखा जा सकेगा कि वर्तमान में जो खाली प्लाट अथवा भूखंड वर्षों से पड़े हैं वो किसके हैं। जिसके नाम से मकान बनाने की अनुमति ली गई है उसमें वही व्यक्ति रह रहा है अथवा उसमें कोई और रह रहा है। तालाब, नदी-नालों में अतिक्रमण की स्थिति का भी पता लगाया जा सकेगा।

राजस्व के डिजिटल मैप से लिंक होगा सर्वे
जीआईएस सर्वे का पूरा रिकार्ड राजस्व विभाग के डिजिटल मैप से लिंक किया जाएगा। इससे राजस्व विभाग को निजी भूमि और शासकीय भूमि के सही आंकलन करने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा अपने रिकार्ड में यह देख सकेगा कि जो भूखंड राजस्व रिकार्ड में जिसके नाम पर दर्ज है, उस पर उसी का कब्जा है अथवा किसी और का है। कितने भू-खंडों का नामांत्रण नहीं कराया गया है। वहीं टीएनसीपी लैंड यूज की हकीकत के संबंध में पता लगा सकेगा। उसे मौके पर अथव राजस्व विभाग से रिकार्ड नहीं बुलाना पड़ेगा।

झुग्गी बस्तियों में नहीं होगा फर्जीबाड़ा
जीआईएस सर्वे के बाद झुग्गी बस्तियों में पट्टे वितरण और सर्वे कार्य में भी किसी तरह से फजीबाड़ा नहीं हो सकेगा। एक-एक झुग्गी के स्थितियों डिजिटल रिकार्ड नगर निगम, जिला प्रशासन और मैप आईटी के पास रहेगा। जीआईएस से खाली और शासकीय जमीन पर रातोंरात बनने वाली झुग्गियों का भी पला लगाया जा सकेगा।

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Ashok gautam
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