पत्रकारिता विवि में घोटाले और गड़बडिय़ों की 181 शिकायतें, कमेटी ने बैठक कर मांगे दस्तावेज

माध्यम में शनिवार को कमेटी ने शिकायतों की जांच के लिए की बैठकजांच पूरी होने में 02 से 03 दिन का लग सकता है समय

By: Sumeet Pandey

Published: 03 Mar 2019, 06:09 AM IST

भोपाल. माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में घोटालों और गड़बडिय़ों की जांच कर रही समिति के पास 181 शिकायतें पहुंची हैं। इन शिकायतों में भोपाल, नोएडा परिसर में हुई नियुक्तियां, बिशनखेड़ी में हो रहे नवीन विवि परिसर के निर्माण, विवि के नाम पर की गई तमाम खरीदी और लोगों को उपकृत करने जैसे मामले सामने आए हैं। इन शिकायतों की जांच के लिए शासन द्वारा गठित की गई तीन सदस्यीय समिति ने शनिवार को मप्र माध्यम बैठक की। शिकायतों की हकीकत जानने के लिए विवि प्रशासन से दस्तावेज मांगे। जिन्हें विवि प्रबंधन ने शनिवार को उपलब्ध कराया।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार ने 19 जनवरी को जांच के लिए जनसंपर्क विभाग के एसीएस एम गोपाल रेड्‌डी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की थी । यह समिति विवि में 2003 के बाद की गई सभी नियुक्तियों सहित विवि में विभिन्न स्रोतों से आई शिकायतों की जांच कर रही हैं। हालांकि समिति को 15 दिन में रिपोर्ट सौंपनी थी, लेकिन शिकायतों की संख्या बहुत अधिक और प्रकरण बहुत गंभीर होने के कारण इसमें डेढ़ माह से अधिक का समय लग गया है। अनुमान है कि दो से तीन दिन में इस जांच को पूरा कर रिपोर्ट सौंपी जा सकती है।

ये लगे आरोप, ऐसी आई शिकायतें--

- आरोप है कि वर्तमान में राज्यसभा सांसद एवं आरएसएस के पदाधिकारी रहे राकेश सिन्हा को विवि में 13 अक्टूबर 2017 से 14 मार्च 2018 तक विवि में एसोसिएट प्रोफेसर के तौर पर नियुक्ति दिखाकर वेतन प्रदान किया गया। जबकि इस दौरान वे एक भी दिन विवि में शैक्षणिक कार्य के लिए उपस्थित नही हुए।
- पूर्व कुलपति बीके कुठियाला के कार्यकाल में 200 से अधिक नियुक्तियां प्रदान की गईं। इनमें से अधिकांश नियुक्तियां नियम विरुद्ध हैं। एक विचारधारा विशेष के लोगों को उपकृत किया गया है। ये नियुक्तियां विवि के भोपाल और नोएडा परिसर में की गई हैँ।

-- विवि में की गई कई खरीदारियों की भी शिकायतें आई हैं। इसमें इंडिया इंटरनेशनल सेंटर दिल्ली में बैठकर पी गई शराब के बिल भी विवि से चुकाए गए हैं।
-- आरोप है कि व्यक्तिगत विलासिता के लिए विवि के संसाधनों का दुरुपयोग किया गया है।

 

Sumeet Pandey Desk
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