गांधी जयंती विशेष : राजधानी से जुड़ी है महात्मा गांधी की खास यादें, इन जगहों से रहा है उनका गहरा नाता

भोपाल से जुड़ी है महात्मा गांधी की खास यादें...

By: Faiz

Published: 02 Oct 2020, 01:37 AM IST

भोपाल/ 2 अक्टूबर 2020 यानी आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 151वीं जयंती का जश्न मनाया जा रहा है। उनकी याद में उनके जीवनमंत्र याद किये जा रहे हैं। 2 अक्टूबर 1869 में गुजरात के पोरबंदर में मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म हुआ, जिसने अपने जीवन आदर्शों के ज़रिये पूरे विश्व को अहिंसा का पाठ पढ़ाया। भारत ही नहीं बल्कि, पूरा विश्व उन्हें अहिसां के पुजारी के रूप में जानता है। देश की आज़ादी में गांधी जी के अतुल्य योगदान था। उन्होंने अपने सादे जीवन और उच्च विचारों के दम पर हर भारतीय के दिल में बापू का स्थान बनाया। गांधी जी ने ही विश्व को सत्य की शक्ति से परिचय करवाया। गांधी के सत्याग्रह की ही बदौलत अंग्रेज भारत छोड़ने पर मजबूर हुए। वैसे तो देश की आज़ादी के खातिर गांधी जी ने पूरे भारत की यात्रा की लेकिन, उनकी कुछ यादें नवाबों के शहर भोपाल से भी जुड़ी हुई हैं। आइये आज हम उन यादों की चर्चा करते हैं।

 

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दो बार झीलों की नगरी आए थे बापू

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आज से 91 साल पहले महात्मा गांधी पहली बार भोपाल आए थे। सबसे पहले 1929 में महात्मा गांधी भोपाल प्रवास पर आए थे। इसके बाद अगली बार भोपाल वासियों को उनके दर्शन का मौका 1933 में मिला। बापू की उस यात्रा के दौरान कई ऐतिहासिक चीजें हुईं, जिन्हें आज भी याद किया जाता है। भोपाल आकर बापू जहां-जहां गए, आज भी उनकी यादें वहां से जुड़ीं हैं। बापू की यात्रा ऐतिहासिक तो थी ही, जिसके कारण बापू की उस यात्रा को याद रखा जाता है, तो आइए पहले जानते हैं भोपाल यात्रा के दौरान महात्मा गांधी किन-किन स्थानों पर गए थे।

 

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इन स्थानों से जुड़ी हैं बापू की यादें

-राहत मंजिल

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भोपाल नवाब के आवास अहमदाबाद पैलेस के करीब बनी इस शानदार इमारत को कभी बापू के गेस्ट हाउस के रूप में इस्तेमाल किया गया था। महात्मा गांधी खादी से सजी इस इमारत में 8 सितंबर से 10 सितंबर 1929 तक ठहरे थे। 9 सितंबर को इसके प्रांगण में प्रार्थना सभा आयोजित की गई थी, जिसमें बापू के साथ बा और मीराबेन सहित अन्य आमंत्रित अतिथियों तथा नवाब भोपाल परिवार ने भी भाग लिया था। बापू के यहां आने के 20 साल बाद भोपाल विलीनीकरण के संबंध में विचार विमर्श और एग्रीमेंट साइन करने के लिये रियासत विभाग के सचिव वी.पी. मेनन के अनेकों बार भोपाल आना हुआ, उस दौरान वो भी राहत मंजिल में ही ठहरते थे।

 

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-बेनज़ीर ग्राउंड

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भोपाल के इस मैदान में मोहनदास करमचंद गांधी की पहली आमसभा हुई थी, जिसकी सफलता के कारण देशभर में उसकी चर्चा भी हुई। नवाब शाहजहां बेगम द्वारा समर रेस्ट हाउस के रूप में बनवाए गए इस सुंदर महल के प्रांगण में स्थित मैदान में 10 सितंबर 1929 को बापू की ऐतिहासिक जनसभा हुई थी। नवाब भोपाल की पूरी कोशिश यही थी कि बापू की भोपाल यात्रा के रेलमार्ग की सही जानकारी, प्लेटफार्म नंबर से लेकर प्रस्थान तक पूरी जानकारी पूर्णतया गुप्त रखी जाए, जिससे भोपाल के राष्ट्रवादी गतिविधियों में शामिल लोग उन तक ना पहुंच सकें। लेकिन, बापू की रेल यात्रा के बीच खंडवा से प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी, कवि और पत्रकार, 'कर्मवीर' के सम्पादक पं. माखन लाल चतुर्वेदी और आगरकर समेत उनके साथ भोपाल में प्रवेश प्रतिबंधित होने के बावजूद बापू के साथ बने रहे। ये ऐतिहासिक सभा स्थल विगत 9 दशकों से पूर्णतया उपेक्षित है।

 

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-मोढ़ों की बगिया

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मोढ़ों की बगिया भोपाल की उन जगहों में से एक है जहां बापू को सम्मानित किया गया था। 10 सितंबर 1929 को बापू के भोपाल प्रवास से वापसी करने के लिए स्टेशन लौट रहे थे। इस दौरान स्टेशन मार्ग में स्थित इस प्रांगण में स्थानीय गुजराती वणिक मोड़ समाज द्वारा सम्मान किया गया था। इस सम्मान समारोह में बापू को हरिजन फंड के लिए 501 रुपये धनराशि भी भेंट की गई थी, जो इसी दिन सुबह बेनजीर मैदान में आयोजित भव्य जनसभा में प्राप्त धनराशि से बहुत ज्यादा थी।

 

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-भोपाल रेलवे स्टेशन

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साल 1933 में महात्मा गांधी ने हरिजन यात्रा के तहत पूरे देश में अनेक स्थानों की यात्रा की थी। इस यात्रा के बीच ट्रेन बदलने के लिए बापू कुछ समय के लिए भोपाल रेलवे स्टेशन पर रुके थे। प्रभात फेरी वालों से इसका समाचार शहर भर में फैल गया, जिसके बाद बड़ी संख्या में भोपाल के लोग स्टेशन पर इक्ट्ठे हो गए थे। लोगों को देखकर बापू भी कुछ देर के लिए रुक गए। इस दौरान बापू ने लोगों को संबोधित तो किया ही, साथ ही लोगों से देशहित में दान करने की भी अपील की। इसी क्रम में एक छोटी बालिका की अंगूठी दान देने का भी दिलचस्प प्रसंग हुआ, जो महात्मा गांधी के जीवन से जुड़े 150 रोचक प्रसंग के संकलन में से एक रहा।

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