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Encroachment bhopal गुमठी माफियाओं की जेब में रोजाना 20 लाख रुपए

Encroachment bhopal भोपाल. शहर के गुमठी माफिया नए हॉकर्स कॉर्नर के निर्माण से लेकर निर्मित हो चुके हॉकर्स कॉर्नर को शुरू होने में लगातार बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। गुमठी माफिया की ताकत इससे ही समझ सकते हैं कि इस समय शहर में करीब 20 हजार गुमठियां है।

भोपाल

Published: March 27, 2022 08:37:37 pm

Encroachment bhopal

इनसे रोजाना 20 लाख रुपए माफियाओं की जेब में जा रहे हैं। यही वजह है कि जहां भी गुमठी हटाने की कार्रवाई होती है, स्थानीय रसूखदार-नेता कार्रवाई रोकने पहुंच जाते हैं। एमपी नगर में की गई कार्रवाई का जिस तरह स्थानीय नेताओं ने विरोध किया, उसने इस गठजोड़ को जाहिर भी किया है।
Encroachment bhopal गुमठी माफियाओं की जेब में रोजाना 20 लाख रुपए
Encroachment bhopal गुमठी माफियाओं की जेब में रोजाना 20 लाख रुपए
शासन व निगम द्वारा नए हॉकर्स कॉर्नर विकसित करने आवंटित राशि तक का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। अवैध गुमठी माफियाओं को सड़क और फुटपाथ पर कारोबार ही कमाई का बड़ा जरिया है। यही वजह है कि बीते वित्तवर्ष में निगम ने नए हॉकर्स कॉर्नर के लिए 11.25 करोड़ रुपए की बड़ी राशि तय की थी, लेकिन महज 1.94 करोड़ रुपए ही खर्च हो पाए। जो हॉकर्स विकसित हुए, वे भी संचालित नहीं हो पा रहे हैं।
85 हॉकर्स कॉर्नर बनने से महज 13 ही बन पाए
शहर में हॉकर्स कॉर्नर को लेकर प्लानिंग तो काफी बनी। निगम परिषद में बकायदा शहर के हर वार्ड में कम से कम एक हॉकर्स कॉर्नर बनाने का तय किया गया। कुल 85 नए हॉकर्स कॉर्नर बनाने का दावा था, लेकिन बीते पांच साल में महज 13 ही विकसित हो पाए। इस समय शहर में महज 30 हॉकर्स कॉर्नर ही विकसित है, बाकी सड़क पर ही पूरा कारोबार हो रहा है।
ऐसे देखें गुमठी माफियाओं से कैसे लोग परेशान
- शाहपुरा तालाब किनारे आईकफ आश्रम के सामने फुटपाथ पर ही शेड लगाकर हॉकर्स कॉर्नर विकसित कर दिया। इसमें आवंटन और उद्धाटन कुछ नहीं हुआ, लेकिन यहां गुमठियां रखकर कारोबार शुरू हो गया। पूरी तरह से बेतरतीब और नियमों को तोड़कर यहां पूरा हॉकर्स कॉर्नर चल रहा है।
- एमपी नगर में प्रगति के सामने अतिक्रमण कर लगे ठेले-गुमठियों को बीआरटीएस की वजह से ट्रैफिक के लिए बड़ी बाधा बन गई है। निगम ने यहीं पर हॉकर्स कॉर्नर विकसित कर दिया, लेकिन पुरानी बाधक दुकानों को हटाने की बजाय, उन्हें और अधिक स्थान दे दिया।
- ज्योति टॉकीज के पास से हटाई दुकानें बिजली कार्यालय के पीछे की लाइन से बैंक स्ट्रीट तक पूरे एमपी नगर में रखा गई। स्थानीय रसूखदारों ने दबाव बनाते हुए इनसे क्षेत्र को मुक्त नहीं होने दिया।
- शाहपुरा एसबीआई के पास से बांसखेड़ी में रोड किनारे गुमठियां रखा गई। ये अघोषित हॉकर्स कॉर्नर विकसित हो गया।
- कोलार रोड किनारे स्वर्ण जयंती पार्क के सामने बोर्ड ऑफिस से महज 23 गुमठियां शिफ्ट की थी, लेकिन यहां गुमठी माफिया ने 58 से अधिक गुमठियां रखवा दी और ये लगातार बढ़ रही है।
- छोटा तालाब किनारे गिन्नौरी से हाथी खाना तक नई गुमठियां रखा गई, विरोध के बावजूद इन्हें कोई नहीं हटा पा रहा।
- एमपी नगर में रेलवे लाइन किनारे कोचिंग संस्थानों के सामने रखी गुमठियां विरोध के बावजूद अब शुरू होने लगी है।
हॉकर्स नीति लागू हो तो मिले राहत
मप्र शासन ने हॉकर्स नीति बनाई हुई है। इसके लिए सभी प्रक्रियाएं पूरी कर ली, लेकिन 2015 से अब तक इसे लागू नहीं किया। इसमें सभी गुमठी वालों के लिए स्थान समेत अन्य दिक्कतों को दूर करने के उपाय है। इनका संगठन बनाकर चुनाव कराने और स्थान आवंटन व अवैध गुमठी के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया है। शासन की पॉलिसी में के तहत जिलाधिकारी के साथ निगम के अफसरों और वेंडर्स को शामिल करते हुए एक कमेटी कनेगी। इसके चुनाव होंगे। शहर में काम करने वाले हर वेंडर को इस कमेटी की मंजूरी जरूरी होगी। उसे स्थान दिया जाएगा और वह तय स्थान से हटकर काम नहीं कर पाएगा। यदि कमेटी ने अनुमति निरस्त की तो वेंडर फिर काम नहीं कर पाएगा। ऐसे में एक सिस्टम तय होता और सड़क, फुटपाथ से अवैध वेंडर, गुमठियां, हॉकर्स हट जाते, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया है।
1100 क्वार्टर से 3 किलोमीटर में 3000 गुमठियां
1100 क्वार्टर से 3 किलोमीटर दायरे में ही सड़क किनारे, फुटपाथ पर 3000 से अधिक गुमठियां है। बड़ा बाजार विकसित है। ये हॉकर्स कॉर्नर में होती तो निगम को हर माह करीब 15 लाख रुपए के राजस्व मिलता। हॉकर्स कॉर्नर की नई नीति में भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों, मुख्य मार्गों, स्कूलों और अस्पतालों के साथ सरकारी दफ्तरों के 100 मीटर के दायरे में गुमटियां और ठेले नहीं लगाने का प्रावधान है। स्थानीय नेताओं की शह पर हर कहीं अवैध गुमटी बाजार विकसित हो गए हैं। गुमठी माफियाओं की हकीकत 1100 क्वार्टर हनुमान मंदिर से लगी रोड के फुटपाथ पर लगी दुकानों, शाहपुरा तालाब किनारे, 12 नंबर साईं बोर्ड क्षेत्र में लगी गुमठियों से ही समझ सकते हैं। अकेले कोलार और बैरागढ़ क्षेत्र में ही दो हजार से अधिक अवैध गुमठियां और हाथ ठेले हैं, जिनसे निगम को हर माह करीब 10 लाख रुपए की चपत लग रही है। नगर निगम के कर्मचारी शहर की अवैध गुमटियों और ठेलों से 20 रुपए की रशीद काट कर पैसे वसूलते हैं।
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एक्सपर्ट्स कोट्स
भोपाल को गुमठी राजधानी बनने से बचाने की जरूरत है। मेरे कार्यकाल में मैनें काफी प्रयास किए। निगम प्रशासन ने भी कार्रवाईयां की। नए हॉकर्स कॉर्नर शुरू कराने हमारी परिषद ने ही बजट में राशि तय की। बावजूद इसके मैं स्पष्ट करना चाहूंगा कि पुराना शहर हो या नया शहर, अवैध गुमठियों को शह नहीं देना चाहिए। इसके लिए शासन ने जो पॉलिसी बनाई है, लागू करना चाहिए। गुमठी वालों को भी एक व्यवस्थित जगह मिले और रोड पर आवाजाही में दिक्कत न आए, इसका ध्यान रखना चाहिए। अभी भी प्रशासन से मैं यही कहना चाहूंगा कि हॉकर्स के लिए जग तय करें। जो काम हमारे कार्यकाल में शुरू हुए, लेकिन बंद है, उन्हें पूरा कराएं तो लोगों को राहत मिलेगी।
- आलोक शर्मा, पूर्व महापौर

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