मप्र में प्रतिदिन 28 लोग करते हैं आत्महत्या

मप्र में प्रतिदिन 28 लोग करते हैं आत्महत्या

hitesh sharma | Publish: Sep, 11 2018 09:07:56 PM (IST) Bhopal, Madhya Pradesh, India

मानव संग्रहालय में समूह चर्चा का आयोजन

 

भोपाल। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में सोमवार को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर एक समूह चर्चा जीवन संकल्प (सहयोग, समझाइश और समन्वय) का आयोजन संग्रहालय के शैलकला सभागार में किया गया। इस समूह चर्चा में बीयू में राजीव गांधी पीठ से प्रो. एसएन चौधुरी, एनएलआईयू से प्रो. तपन मोहंती, बीएसएसएस से प्रो. विनय मिश्रा, एम्स से डॉ. अभिजीत आर. रोजातकार ने प्रतिभागिता की। इसमें विशेषज्ञों ने उपस्थित दर्शकों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दिए तथा उनके सुझावों को भी नोट किया।

Indira Gandhi National Human Museum

कार्यक्रम संग्रहालय के संयुक्त निदेशक दिलीप सिंह द्वारा यह बतलाया गया कि वर्तमान में मप्र में प्रतिदिन 28 आत्महत्याएं हो रही है, जबकि भोपाल शहर में वर्ष 2014 में 40 आत्महत्याएं एवं वर्ष 2015 में 378 आत्महत्याएं हुई हैं। इसी कारण अब इस ज्वलंत समस्या पर बहस अतिआवश्यक है।

Indira Gandhi National Human Museum

स्ट्रेस, रोजगार व अन्य कारणों से यूथ जल्दी टूट जाते हैं और आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठा लेते हैं। प्रो. एसएन चौधुरी ने कहा कि आधुनिकता के भवन का निर्माण पारंपराओं की कब्र पर भविष्य में होगा। अत: इस पर संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता है।

Indira Gandhi National Human Museum

आपस में घुलना-मिलना जरूरी
डॉ. तपन मोहंती ने अपने उद््बोधन में शहरी समाजों में पाई जाने वाली अलगाव की मौजूदगी एवं आपस में घुलने-मिलने में प्रवृत्ति में कमी होने को भी इस समस्या का एक प्रमुख कारण बताया। वहीं, डॉ. अभिजीत आर. रोजातकार ने आत्महत्या की रोकथाम कैसे की जा सके उसपर प्रकाश डालते हुए बतलाया कि हमें यदि किसी व्यक्ति में निराशा के भाव नजर आएं और जीने के प्रति अरूचि दर्शाए तो सावधान होने की आवश्यकता है।

इस दौरान प्रो. विनय मिश्रा ने कहा कि वतावरण में होने वाले बदलावों एवं उनकी बदलती हुई गतिविधियों एवं आदतों के साथ बच्चों पर नजर रखना आवश्यक है। उनके माता-पिता को चाहिए कि उनकी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए उनके साथ दोस्ताना व्यवहार रखकर उनकी परेशानियों को हल करें।

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