तीन lakh से ज्यादा छात्रों को admission की दरकार, आधी fee मांग रहे कॉलेज

. उच्च शिक्षा विभाग ने आर्थिक तंगी को देख हजार रुपए में प्रवेश की बनाई व्यवस्था, हुई अनदेखी

. ई-प्रवेश में रजिस्ट्रेशन, ज्यादा फीस लेने पर विभाग नहीं कर पा रहा कार्रवाई

 

By: शकील खान

Published: 25 Sep 2020, 01:58 AM IST

भोपाल. कोरोना महामारी के बीच छात्रों की पढ़ाई में आर्थिक संकट आड़े नहीं आए इसलिए उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेज में एक हजार रुपए फीस जमा कर प्रवेश देने की व्यवस्था बनाई है। लेकिन कई निजी कॉलेज और अटल बिहारी वाजपेई हिंदी विश्वविद्यालय छात्रों से आधी फीस जमा करने के लिए कह रहे हैं। जिसकी वजह से यूजी और पीजी में एडमिशन की संख्या लगातार गिरती जा रही है।
जानकारी के मुताबिक बीएड में एडमिशन की प्रक्रिया के दौरान उच्च शिक्षा विभाग को जानकारी मिली कि आधी फीस भरने के चलते छात्र एडमिशन नहीं ले रहे हैं। आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। जिसके चलते हजार रुपए में प्रवेश की व्यवस्था बनाई थी लेकिन इस नियम को पालन करने में कॉलेजों और विश्वविद्यालयों ने लापरवाही बरतना शुरू कर दी। जिसका सीधा असर प्रवेश पर पड़ा। मेरिट लिस्ट जारी होने के बाद भी कई एडमिशन नहीं हुए।
जो छात्र प्रवेश ले रहे हैं। उन पर विश्वविद्यालय और प्राइवेट यूनिवर्सिटी के संचालक आधी फीस जमा करने के लिए दबाव बना रहे हैं।

दो लाख विद्यार्थी पहुंचे दाखिला लेने

जानकारी के मुताबिक यूजी की मेरिट लिस्ट में एक लाख से ज्यादा छात्र ऐसे थे जिन्होंने एडमिशन नहीं लिया। ये जब दाखिले के लिए कॉलेज पहुंचे तो हजार रुपए की बजाए आधी फीस जमा करनी पड़ी। दो लाख से ज्यादा छात्र अभी एडमिशन लेने की लाइन में हैं कॉलेज की शर्त है कि उन्हें आधी फीस जमा करनी होगी। यह स्थिति अटल बिहारी हिंदी विश्वविद्यालय में भी देखने को मिली है। वेबसाइट में सीधे आधी फीस जमा करने के लिए निर्देश दिए गए हैं। उच्च शिक्षा विभाग भी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।

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उच्च शिक्षा विभाग ने छात्रों की आर्थिक तंगी को देखते हुए हजार रुपए में एडमिशन की व्यवस्था बनाई है। जिसे आवश्यक रूप से सभी शिक्षण संस्थानों को लागू करना चाहिए। यदि कोई भी संस्थान आधी फीस वसूल रहा है तो उस पर कार्रवाई का अधिकार विभाग के पास है। हालांकि कुछ संस्थानों ने 100 रुपये में भी प्रवेश की व्यवस्था की है।
डीके शुक्ला,
ओएसडी, उच्च शिक्षा

शकील खान
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