राज्यसभा की तीन सीटें आज खाली

दिग्विजय-सिंधिया को करना होगा और इंतजार
- कोरोना के कारण बने सियासी हालात
- मध्यप्रदेश में ऐसा पहला मौका

 

By: Arun Tiwari

Updated: 08 Apr 2020, 05:36 PM IST

भोपाल : कोरोना ने राज्य के सियासी हालात भी बदल दिए हैं। प्रदेश में ये पहला मौका है जब राज्यसभा की तीन सीटें रिक्त होने के बाद भी खाली ही रहेंगी। इससे पहले प्रदेश में कभी राज्यसभा की सीटें कभी खाली नहीं रहीं। 9 अप्रैल को इनका कार्यकाल खत्म हो गया है। कांग्रेस के दिग्विजय सिंह, भाजपा के प्रभात झा और सत्यानारायण जटिया के राज्यसभा का कार्यकाल पूरा होने के कारण ये तीन सीटें खाली हुई हैं। इन सीटों पर 26 मार्च को चुनाव होना था लेकिन कोरोना संक्रमण के हालातों के चलते ये चुनाव टाल दिया गया है। चुनाव की अगली तारीख अभी घोषित नहीं हुई है इसलिए राज्यसभा के आगामी चुनाव तक इन सीओं को खाली ही रहना पड़ेगा।

अप्रैल में खाली हो रही 17 राज्यों की 55 राज्यसभा सीटें :
देश में राज्यसभा की 55 सीटें इस महीने खाली हो रही हैं। इनमें से 37 सीटों पर तो निर्विरोध चुना जाना तय है बाकी 18 सीटों पर चुनाव के हालात बने हैं। मध्यप्रदेश की 3 सीटों के साथ ही राजस्थान की 3, गुजरात की 4, आंध्रप्रदेश की 4, झारखंड की 2, मणिपुर की 1, मेघालय की 1, छत्तीसगढ़ की 2, महाराष्ट्र की 7, तमिलनाडु की 6, उड़ीसा की 4, पश्चिम बंगाल की 5, असम की 3, बिहार की 5, हरियाणा की 2, हिमांचल प्रदेश की 1 और तेलंगाना की 2 राज्यसभा सीटें शामिल हैं।

09 अप्रैल को खाली हो रही राज्यसभा सीटें :
मध्यप्रदेश के साथ ही कुल 12 राज्य ऐसे हैं जहां पर राज्यसभा सीटें रिक्त होने के साथ ही खाली रह जाएंगी। यानी इन राज्यों की राज्यसभा सीटों का कार्यकाल भी प्रदेश की सीटों के साथ 09 अप्रैल को खाली हो रहा है। इन राज्यों में गुजरात, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, बिहार, हिमांचल प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और मणिपुर की 32 सीटें शामिल हैं। इनके अलावा 2 अप्रैल को जिन राज्यों की सीटों का कार्यकाल खत्म हुआ है उनमें महाराष्ट्र, उड़ीसा, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की 22 सीटें शामिल हैं। मेघालय की 1 सीट का कार्यकाल 12 अप्रैल को खत्म होगा।

दिग्विजय-सिंधिया को करना होगा इंतजार :
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को सांसद बनने के लिए अभी और इंतजार करना होगा। कांग्रेस की ओर से दिग्विजय सिंह और फूलसिंह बरैया उम्मीदवार हैं जबकि भाजपा की तरफ से ज्योतिरादित्य सिंधिया और सुमेर सिंह सोलंकी को उम्मीदवार बनाया गया है। इन तीन सीटों में समीकरण के हिसाब से दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया का निर्वाचन तय है जबकि तीसरी सीट के लिए कांग्रेस के बरैया और भाजपा के सोलंकी में मुकाबला है। वर्तमान हालातों में सोलंकी का पलड़ा भारी नजर आ रहा है।

यह सही है कि लोकसभा, राज्यसभा या विधानसभा की सीट रिक्त होने के छह माह के अंतराल में चुनाव होना चाहिए। लेकिन यदि कोई विशेष परिस्थितियां हैं तो चुनाव आगे टाले जा सकते हैं। पूरे देश में राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई थी, विशेष परिस्थितियों के चलते चुनाव आयोग ने इन चुनावों को टाला है। संविधान में इसका उल्लेख नहीं है कि टाले गए चुनाव तक कराए जा सकते हैं। चुनाव आयोग को लगता है कि स्थितियां सामान्य हैं तो वह चुनाव करा सकता है।

- सुभाष कश्यप, संविधान विशेषज्ञ

- ऐसा प्रदेश में तो पहले कभी नहीं हुआ जब राज्यसभा की सीटें रिक्त हों और खाली भी रह जाएं। यह एक नया अनुभव है। अब आपदा ही ऐसी आई है जिसने सियासी हालातों को भी इस कदर प्रभावित किया है। ऐसा पहले तो कभी नहीं हुआ है। - भगवानदेव इसराणी संविधान विशेषज्ञ -

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Arun Tiwari Reporting
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