राजस्व वसूली में 35000 करोड ़पिछड़ा मध्यप्रदेश

घाटे की चिंता : अंतिम तिमाही में लक्ष्य पूरा करने की योजना

भोपाल. कमलनाथ सरकार को वित्तीय घाटे की चिंता सताने लगी है। तमाम सरकारी महकमे राजस्व वसूली में पिछड़ गए हैं। ये इस वित्तीय वर्ष में लक्ष्य से 30 से 35 हजार करोड़ रुपए पीछे हैं। कांग्रेस सरकार को पिछली भाजपा सरकार से पहले ही खाली खजाना मिला था। जीएसटी, केंद्र के बजट कम करने और राजस्व वसूली में कमी के कारण वित्तीय हालात और खराब हो गए हैं। ऐसे में सभी विभागों से उनके राज्य और जिलों में रखे बजट की रिपोर्ट तलब की है, ताकि हकीकत पता चल सके। राजस्व वसूली लक्ष्यों का रिव्यू किया जा रहा है, ताकि अंतिम तिमाही में लक्ष्य पाया जा सके। राज्य सरकार हर साल राजस्व वसूली का लक्ष्य तय करके काम करती है, ताकि खर्च और आमदनी का संतुलन बना रहे।
- विभागों को लिखा- पूरी रिपोर्ट दो
वित्त विभाग ने दिसंबर तक सभी विभागों से बैंक खातों में जमा राशि की जानकारी मांगी है। इससे राजकोषीय घाटे पर असर की आशंका जताई है। सभी विभागों से पूछा गया है कि कितनी राशि अनुपयोगी पड़ी है।
- केंद्र के बजट घटाने का भी असर
केंद्र सरकार ने अपने मुख्य बजट में मध्यप्रदेश के करीब 2700 करोड़ रुपए कम कर दिए थे। मप्र को पहले केंद्र से 63700 करोड़ से ज्यादा राशि मिलना थी, जो घटकर करीब 61000 करोड़ पर सिमट गई थी। इस समायोजित करने में भी मध्यप्रदेश को परेशानी आई है।

- नए निर्माण कार्यों से परहेज
सरकार ने नए निर्माण कार्यों और नए प्रोजेक्ट से परहेज कर रखा है। अब वित्तीय स्थिति न संभलने के कारण पुराने कामों को ही पूरा करने पर फोकस रहेगा। इसका असर आगामी मुख्य बजट पर भी पड़ेगा। इसमें केवल कांग्रेस के पूर्व निर्धारित वचनों को ही रखा जाएगा।
- अनुपूरक बजट में भी खींचतान
सरकार को अनुपूरक बजट के लिए भी भारी खींचतान से गुजरना पड़ रहा है। बारिश से 17 हजार करोड़ का नुकसान हुआ है। केंद्र से राज्य सरकार ने 6700 करोड़ मांगे हैं, लेकिन कोई राशि नहीं मिली है। अब अनुपूरक बजट में फसलों के नुकसान के मुआवजे, सड़क मरम्मत और अन्य अधोसंरचना से संबंधित कामों के लिए पैसा रखने को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके चलते विभिन्न विभागों की अन्य मांगों को वित्त विभाग ने खारिज करना शुरू कर दिया है। कमलनाथ सरकार का पहला अनुपूरक बजट 17 दिसंबर से शुरू होने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र में लाया जाएगा।
- बजट से ज्यादा खर्च पर पाबंदी
आदिम जाति कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव दीपाली रस्तोगी ने मंजूर बजट से ज्यादा खर्च करने पर पाबंदी लगा दी है। अब पहले खर्च करके बाद में बजट मंजूर नहीं कराया जा सकेगा। आदिवासी उप योजना का पैसा भी तब तक नहीं मिलेगा, जब तक कि अन्य मदों का बजट शेष है। दरअसल, सरकार ने बजट पर नियंत्रण के लिए आदिवासी इलाकों के बजट एपू्रवल और खर्च को लेकर नई गाइडलाइन जारी कर दी गई है। इसके तहत आदिवासी छात्रावास, आश्रम या अन्य भवनों के लिए विभाग में पहले से मंजूर बजट तक ही खर्च की सीमा रहेगी। कुछ जिलों ने मंजूर बजट से ज्यादा खर्च करने के बाद प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा था, जिस पर अतिरिक्त राशि देने से इनकार कर दिया गया है। यदि कहीं पर आदिवासी उपयोजना से पैसा लिया जाता है, तो मुख्यालय को उसका पूरा ब्योरा भेजना अनिवार्य रहेगा।

पिछली भाजपा सरकार ने चुनाव के समय सरकारी खजाने का दुरुपयोग किया। इसके बाद खराब हालत में सरकारी खजाना हमें मिला है। बारिश से फसलें तबाह हुई, लेकिन यहां भी केंद्र से राहत राशि नहीं मिली। हमने बिना कोई नया टैक्स लगाए सारे वित्तीय प्रबंधन को संभाला है।
- तरुण भनोत, वित्त मंत्री

anil chaudhary
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