महिला उत्पीडऩ पर विरोध जताएं और चुप्पी तोडें

विरोध जताने और चुप्पी तोडऩे की प्रवृत्ति विकसित करनी होगी, मानवाधिकार दिवस पर कार्यशाला में निकली बात।

By: मनोज अवस्थी

Published: 11 Dec 2017, 08:45 AM IST

भोपाल. मध्यप्रदेश में महिला अपराध में वृद्धि सरकार के साथ-साथ समाज के लिए भी चिंता का विषय है। इस दिशा में हम सबको सहभागी होना होगा। महिला उत्पीडऩ पर विरोध जताने और चुप्पी तोडऩे की प्रवृत्ति विकसित करनी होगी।

अदालतों में भी 40 फीसदी मामले महिला उत्पीडऩ से संबंधित हैं। इनमें दहेज और घरेलू हिंसा के सबसे ज्यादा प्रकरण हैं। आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों में भय पैदा करने के लिए कानून जरूरी है। यह बातें मप्र मानवाधिकार आयोग की ओर से अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यशाला में शामिल विशेषज्ञों ने कहीं।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि महिला-बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनीस ने कहा कि महिलाओं की प्राथमिकता को उनकी कमजोरी नहीं समझना चाहिए।

वहीं यहां उपस्थित कई जानकारों का कहना था कि महिला अपराध में वृद्धि समाज के लिए भी चिंता का विषय है। महिलाओं के विरुद्ध अपराधों के प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के लिए स्थाई व्यवस्था स्थापित की जाना चाहिए।

यदि महिला, मातृत्व संबधी कारणों से कुछ गतिविधियों को विशेष अवधि में कम समय देती है तो यह उनकी कमजोरी नहीं, उनके विशेष अधिकार हैें जिसे संवेदनशीलता के साथ देखा जाना चाहिए। महिला अधिकारों और महिलाओं की सुरक्षा तथा सशक्तिकरण के लिए बनाए गए कानून की जानकारी देने के लिए प्रदेश की 92 हजार आंगनबाड़ी में गठित शौर्या दलों के माध्यम से विशेष अभियान चलाया जाएगा।

कार्यशाला में न्यायाधीश जेपी गुप्ता ने कहा कि अदालतों में 40 प्रतिशत मामले महिला उत्पीडऩ से संबंधित हैं, जिनमें दहेज और घरेलू हिंसा से संबंधित मामलों का प्रतिशत बहुत अधिक है। उन्होंने कानूनों और प्रक्रिया को व्यवहारिक बनाने की आवश्यकता भी बताई।

मानव अधिकार आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष मनोहर ममतानी ने कहा कि महिला अपराध में वृद्धि समाज के लिए भी चिंता का विषय है। महिलाओं के विरुद्ध अपराधों के प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के लिए स्थाई व्यवस्था स्थापित की जाना चाहिए। मानव अधिकार आयोग के सदस्य सरबजीत सिंह, प्रमुख सचिव महिला बाल विकास जेएन कंसोटिया, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अरुणा मोहन राव तथा अन्य विषय विशेषज्ञ उपस्थित थे।

मनोज अवस्थी
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