शिक्षकों के 45 हजार पद खाली, फिर भी ले रहे गैर शैक्षणिक काम

शिक्षकों के 45 हजार पद खाली, फिर भी ले रहे गैर शैक्षणिक काम

Yogendra Sen | Publish: Mar, 14 2018 10:07:28 AM (IST) Bhopal, Madhya Pradesh, India

- विधानसभा में बोले बाबूलाल गौर

भोपाल. पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने मंगलवार को अपनी ही सरकार की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए। उन्होंने कहा, प्रदेश में शिक्षकों के 45,654 पद खाली हैं। इसके बावजूद शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य करवाए जा रहे हैं। एेसे में शिक्षा व्यवस्था चौपट हो रही है। इसका असर परीक्षा परिणामों पर पड़ रहा है।

गौर ने प्रश्नकाल के दौरान सरकार से पूछा कि निर्वाचन कार्य में किन शासकीय सेवकों को बीएलओ बनाया जा सकता है। उन शिक्षकों की संख्या बताएं, जिन्हें बीएलओ बनाया गया या निर्वाचन कार्य में लगाया गया है। इस पर सामान्य प्रशासन राज्यमंत्री लालसिंह आर्य ने कहा कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था बेहतर है। परीक्षा परिणामों में भी सुधार हुआ है।

उन्होंने बताया कि राज्य में निर्वाचन का अलग से कॉडर नहीं होता, इसलिए सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों से कार्य लिया जाता है। इसमें अन्य विभागों के साथ शिक्षक भी शामिल होते हैं। मंत्री आर्य ने कहा कि निर्वाचन कार्य अवकाश के दिनों में किया जाता है। इससे शिक्षण कार्य प्रभावित नहीं होता। आर्य के जवाब से असंतुष्ट गौर इस पर अड़ गए कि उत्तर आज और अभी आना चाहिए।

प्रस्ताव पर निगेटिव रिपोर्ट की होगी जांच : आर्य
सामान्य प्रशासन मंत्री लाल ङ्क्षसह आर्य ने कहा कि रजक और धोबी समाज को अनुसूचित जाति में शामिल किए जाने के सदन में पारित हुए संकल्प पर विभाग ने इसकी निगेटिव रिपोर्ट कैसे दी, इसकी जांच दो माह में कराई जाएगी। मंत्री बोले, वे स्वयं इस जाति को अनुसूचित जाति में शामिल किए जाने के पक्ष में हैं। यह मामला 'पत्रिका' ने प्रमुखता से उठाया था।

प्रश्नकाल के दौरान कांगे्रस के रामनिवास रावत ने कहा कि सदन से तीन बार संकल्प पारित होने के बाद भी सरकार की ओर से विपरीत रिपोर्ट दी गई। विभाग के अफसरों ने मंत्री का अनुमोदन लिए बिना केन्द्र को जानकारी भेज दी। उन्होंने संबंधित अफसर पर कार्रवाई की मांग भी की। नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा कि केन्द्र और राज्य में भाजपा की सरकार है। यदि सरकार वास्तव में गंभीर है तो जांच तो क्या सरकार इसे केन्द्र से मंजूर भी करा सकती है।

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