script47 percent employees under stress in mental health survey | तनाव से गुजर रहे 47 प्रतिशत कर्मचारी, 20 फीसदी ने छोड़ी नौकरी | Patrika News

तनाव से गुजर रहे 47 प्रतिशत कर्मचारी, 20 फीसदी ने छोड़ी नौकरी

मेंटल हेल्थ सर्वे के अनुसार खराब मानसिक स्वास्थ्य से आर्थिक व्यवस्था में भी भारी नुकसान, राजधानी में कार्यस्थल से जुड़े सर्वे

 

भोपाल

Published: September 14, 2022 12:02:31 pm

भोपाल. हाल ही में आए डेलॉयट के मेंटल हेल्थ सर्वे के मुताबिक भारत के 47 फीसदी लोगों ने माना कि कार्यस्थल से संबंधित तनाव उनके मानसिक स्वास्थ्य को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। भोपाल में भी काम की वजह से लोगों में स्ट्रेस है। कई लोग तो मदद लेने के लिए प्रोफेशनल्स के पास भी आते हैं।
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डेलॉयट के मेंटल हेल्थ सर्वे के मुताबिक तनाव के चलते कई लोगों ने नौकरी छोड़ी तो कई ने ब्रेक लिया। 33 फीसदी कर्मचारियों ने खराब मानसिक स्वास्थ्य के बावजूद काम करना जारी रखा जबकि 29 प्रतिशत ने समय निकाला और 20 प्रतिशत ने इस्तीफा दे दिया।
भोपाल में 15 फीसदी लोग लेते हैं मदद
भोपाल में भी काम की वजह से लोगों में स्ट्रेस है। कोरोना के बाद इनमें इजाफा हुआ है। लगभग आधे से ज्यादा लोग अपने काम की वजह से तनाव में हैं लेकिन 15 फीसदी ही मदद लेने के लिए प्रोफेशनल्स के पास आते हैं। मनोचिकित्सकों के मुताबिक इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है लोग अपने काम से खुश नहीं हैं। वहीं कुछ लोग अपने लीडर्स से परेशान हैं। कई मनपसंद का काम करना चाहते हैं लेकिन पारंपरिक कामों से बंधे हैं।
ऐसे हुआ तनाव कम
32 वर्षीय सोहन -बदला नाम- मंडीदीप की फर्म में काम करते थे। बहुत दिनों से वर्कप्लेस की वजह से स्ट्रेस में थे। उन्हें जो भी काम दिया जाता वे पूरा नहीं कर पाते। कई कंपनियां भी बदली लेकिन स्ट्रेस बढ़ता गया। आखिर में जब कांउसलर की मदद ली तो प्रॉब्लम की जड़ तक पहुंच पाए।
काम पर होने वाले तनाव से ऐसे निपटें
साइकॉलोजिस्ट एवं लाइफ कोच डॉ सुमित साहनी के मुताबिक सही समय पर काउंसलर्स की मदद लें। कॉगनिटिव बिहैवियर थेरेपी से तनाव की असली वजह जानें। अगर कॅरियर के लेकर स्ट्रेस है तो लाइफ कोच के पास जाएं। इसके अलावा मेडिटेशन और माइंडफुलनेस भी कारगर हैं।
मनोचिकित्सक डॉ सत्यकांत त्रिवेदी के अनुसार सभी वर्कप्लेस पर मेंटल हेल्थ पॉलिसी होनी चाहिए। कर्मचारी तनावमुक्त रहें इसके लिए हर लीडर का पेशेवर और करूणामयी होना जरूरी है। स्ट्रेस मेनेजमेंट लेक्चर्स और कांउसलर्स की मदद से समय.समय पर वर्कर्स की स्क्रीनिंग होनी चाहिए।
सोशल स्टिग्मा अब भी बड़ी वजह- वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन के मुताबिक विश्व में मानसिक स्वास्थ्य की समस्या के मामलों में भारत की हिस्सेदारी करीब 15 फीसदी है। मानसिक समस्या से जूझ रहे लगभग 39 फीसदी लोग उससे छुटकारा पाने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाते हैं क्योंकि उन्हें समाज का डर होता है।

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