भूखों का पेट भरने लंगर को 6 साल पूरे, समाज सेवियों का सम्मान

- इस मौके पर कव्वालियों का आयोजन, रातभर चला जोरदार मुकाबला

By: शकील खान

Published: 04 Apr 2019, 09:20 AM IST

 

भोपाल । ऐसे कई लोग हैं जिन्हें पेट भरने के लिए दो वक्त का खाना भी नसीब नहीं होता। इनकी मदद के लिए करीब 6 साल पहले नादरा बस स्टैंड के पास एक छोटी सी शुरुआत हुई जो अब पूरे शहर के लिए मिसाल बन गई है। शैरी अख्तर वेलफेयर सोसायटी के जरिए कराए जा रहे इस लंगर को 6 साल पूरे हो गए। इस मौके पर यहां एक आयेाजन रखा गया। जहां समाजसेवियों के सम्मान के साथ कव्वालियों का जोरदार मुकाबला हुआ।

सूफी अख्तर वेलफेयर सोसायटी के जरिए हर शाम लंगर में करीब 250 से 300 लोगों को खाना बांटा जाता है। छह साल पूरे होने के उपलक्ष्य में नादरा बस स्टैंड पर एक आयोजन रखा गया। यहां मशहूर क़व्वालों द्वारा सूफिय़ाना क़व्वाली पेश की गई। उदयपुर (राजस्थान) से कव्वाल आसिफ़ नियाज़ी तथा कपासन शरीफ़ से क़व्वाल यासीन हमराज और क़व्वाल हाजी मुकरऱ्म वारसी के बीच कव्वालियों का जोरदार मुकाबला हुआ। स्थिति ये थी कि देर रात तक सैकड़ों की संख्या में यहां जमे हुए थे। पूरा माहौल सूफियाना हो गया।

इस मौके पर यहां सूफी अख्तर वेलफेयर सोसायटी ने उन लोगों का सम्मान किया जो समाज सेवा में बेहतर योगदान दे रहे हैं। सोयायटी के जरिए आचार्य हुुकुम चंद संकुशल, संस्थापक, भारतीय योग अनुसंधान केन्द्र, भोपाल, अब्दुल कऱीम अंसारी, समाज सेवी मुंगावली, जि़ला अशोक नगर, व्हीपीएस भदौरिया, डीजीएम सर्कुलेशन पत्रिका, समाजसेवी नसीम मंसूरी, वरिष्ट पत्रकार मनोज राठौर, अनस इब्राहिम, समाज सेवी राजीव गुलाटी को सम्मानित किया है।

 

अब तक हजारों को बांटा खाना

सूफी अख्तर वेलफेयर सोसायटी के मक़बूल अहमद ने बताया कि इन छह सालों में हजारों जरूरतमंदों को खाना बांट चुके हैं। हर रोज 250 से 300 लोग यहां से खाना लेकर जाते हैं। खाने का सामान लोगों की मदद से जुटाया जाता है। मकबूल के मुताबिक उन्होंने अपने पिता की दी गई सीख और सोसायटी के जरिए एक छोटी सी शुरुआत की थी जो अब बड़ा रूप ले चुकी है। इसमें शहर के कई लोग जुड़ गए हैं। भूखों को खाना खिलाया जा सके इसके लिए शहर के कई और स्थानों पर इस तरह से लंगर शुरू करने की योजना है।

शुरू किया रोटी बैंक

लोगों की मदद से रोटी बैंक भी यहां शुरू हुआ। मकबूल के मुताबिक ये एक पहल है यह लोगों में एक सोच पैदा करने की कोशिश की। इसके लिए जरिए ये सीख देने की कोशिश की जा रही है कि दूसरे के बारे में सोचे। रोटी बैंक के लिए शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में जिम्मेदार बनाए गए हैं। इसे आगे बढ़ाने की कोशिश है।

शकील खान
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