प्रदेश के 70 फीसदी ग्रेजुएट युवा चाहते हैं सरकारी नौकरी, 2 लाख में से 10 हजार ने ही लिया निजी कंपनी में रोजगार

प्रदेश के 70 फीसदी ग्रेजुएट युवा चाहते हैं सरकारी नौकरी, 2 लाख में से 10 हजार ने ही लिया निजी कंपनी में रोजगार

Arun Tiwari | Updated: 22 Sep 2019, 02:14:58 AM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

- उच्च शिक्षा विभाग ने लिया युवाओं का फीडबैक
- निजी कॉलेजों की तर्ज पर सरकारी कॉलेजों में भी कैंपस सिलेक्शन

 

 

भोपाल : एक तरफ बेरोजगारों की लंबी कतार है तो दूसरी तरफ सरकारी कॉलेज में स्नातक करने वाले युवा सरकारी नौकरी चाहते हैं। निजी कंपनी की छोटी नौकरी उनको मंजूर नहीं है।

उच्च शिक्षा विभाग की स्वामी विवेकानंद कॅरियर गाइडेंस स्कीम के तहत कॉलेज छात्रों से मिले फीडबैक में इसी तरह की चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है।

सरकारी कॉलेजों में बीए,बीकॉम और बीएससी करने वाले अंतिम वर्ष के छात्र-छात्राओं से फीडबैक फॉर्म भरवाया गया जिसमें उनकी महत्वाकांक्षा और लक्ष्य के बारे में पूछा गया।

70 फीसदी छात्रों ने अपना मकसद सरकारी नौकरी हासिल करना बताया। वे कर्मी कल्चर यानी शिक्षाकर्मी, पंचायतकर्मी,निगमकर्मी जैसी नौकरियों से प्रभावित नजर आए। इस जानकारी से सरकार हैरत में है।

सरकार अब इन छात्रों की काउंसलिंग कर उनको आज के दौर में रोजगार का महत्व समझा रही है। विशेषज्ञों के जरिए छात्रों को ये बताया जा रहा है कि सरकार के पास इतनी नौकरी नहीं हैं कि सबको दी जा सकें इसलिए रोजगार का प्रमुख साधन निजी कंपनियां और स्वरोजगार ही है।

युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर प्रशासनिक सेवाओं में जाने के बारे में भी बताया जा रहा है।

इसलिए लिया छात्रों का फीडबैक :
सरकार ने ज्यादा से ज्यादा रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रायवेट कॉलेजों की तर्ज पर सरकारी कॉलेजों में भी कैंपस सिलेक्शन की प्रक्रिया शुरु की है। इसमें स्नातक करने वाले युवाओं को निजी कंपनियों में नौकरी दिलाई जाती है। साल 2018-19 में 10 हजार छात्रों की कैंपस सिलेक्शन के जरिए निजी कंपनियों में नौकरी लग गई।

प्रदेश में 516 सरकारी कॉलेज हैं जिनमें स्नातक करने वाले छात्रों की संख्या करीब दो लाख है। दो लाख छात्रों में सिर्फ दस हजार छात्रों ने ही नौकरी में दिलचस्पी दिखाई। अधिकांश छात्र कैंपस सिलेक्शन के लिए ली गई परीक्षा में तो बैठे लेकिन उनकी रुचि नौकरी पाने में नहीं थी। निजी कंपनी की नौकरी के लिए मना करने वाले छात्रों की बड़ी संख्या देखकर विभाग ने इनसे फीडबैक फॉर्म भरवाए। इन फॉर्म में इन छात्रों ने अपनी पसंद सरकारी नौकरी या प्रशासनिक सेवा में बड़े पद को बताया।

सरकारी कॉलेजों में कैंपस सिलेक्शन :
स्वामी विवेकानंद कॅरियर गाइडेंस स्कीम के तहत सरकारी कॉलेजों में कैंपस सिलेक्शन आयोजित किया जाने लगा है। पहले कॅरियर मेला लगाकर छात्रों को आगे बढऩे की जानकारी दी जाती थी लेकिन अब इसका स्वरुप कैंपस सिलेक्शन में बदल गया है।

इस स्कीम को संचालित करने वाले अधिकारी निजी कंपनियों से संपर्क करते हैं और उनकी आवश्यकता के हिसाब से मानव संसाधन के लिए अपने कॉलेज में बुलाते हैं। जिस सेक्टर की कंपनी होती है उस तरह के कॉलेज में इन कंपनी प्रतिनिधियों को ले जाया जाता है।

स्नातक के अंतिम वर्ष के छात्र ही इनमें भाग ले सकते हैं। जिन सेक्टर की कंपनियां ग्रेजुएट युवाओं को नौकरी देती हैं उनमें कॉल सेंटर जिनमें विप्रो और टीसीएस जैसी कंपनियां भी शामिल हैं, वित्तीय संस्थाएं जो निवेश के लिए प्रोत्साहित करती हैं जैसे आईसीआईसीआई बैंक,एचडीएफसी बैंक, प्राइवेट स्कूल या कोचिंग सेंटर, शॉपिंग मॉल, मान्यता प्राप्त सुरक्षा एजेंसी जिनको सुपर वायजर की जरुरत होती है, सीए जैंसे प्रोफेशनल्स और वर्धमान टेक्सटाइल शामिल हैं।

इस साल जो छात्र इन निजी कंपनियों में चयनित हुए हैं जिनको योग्यता और कुशलता के आधार पर 8 से 20 हजार रुपए महीने का वेतन मिलता है।

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