दस्तावेज सत्यापन के बिना हर माह जुड़ रहे हैं 60 हजार पेंशनरों के नाम

दस्तावेज सत्यापन के बिना हर माह जुड़ रहे हैं 60 हजार पेंशनरों के नाम

Ashok Gautam | Updated: 14 Jul 2019, 07:36:08 AM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

दस्तावेज सत्यापन ( document verification ) के बिना हर माह जुड़ रहे हैं 60 हजार पेंशनरों के नाम

समग्र पोर्टल में उपलब्ध जानकारी और दस्तावेजों की जांच के बाद ही होगा पेंशनरों का चयन

भोपाल. प्रदेश में प्रतिमाह लगभग 60 हजार नए पेंशन ( pensioners ) के प्रकरण मंजूर हो रहे हैं। इसमें से अधिकांश बिना सत्यापन ( verification ) के मंजूर हो रहे हैं। ये प्रकरण समग्र पोर्टल पर दर्ज जानकारी और उपलब्ध दस्तावेजों ( document ) के आधार पर ही मंजूर कर दिए गए हैं। इसके चलते कई अपात्र व्यक्ति भी सामाजिक सुरक्षा की पेंशन का लाभ उठाने में सफल हो रहे हैं।

पेंशन पोर्टल ( pension portal ) में यह पाया गया है कि वर्ष 2019-20 में हर माह करीब 60 हजार हितग्राहियों के नए नाम पेंशन पोर्टल में जोड़े जा रहे हैं। पेंशन की पात्रता समग्र पोर्टल पर दर्ज जानकारी के आधार पर तय की जा रही है। समग्र पोर्टल पर यह जानकारी वर्षों पहले अपलोड की गई थी। वर्तमान में हितग्राही की क्या स्थिति है, उसके पास पेंशन की पात्रता संबंध सभी दस्तावेज हैं या नहीं, इसकी जानकारी पोर्टल पर अपलोड नहीं की जाती है।

नगरीय प्रशासन एवं पंचायत विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए है कि अब जिन हिग्राहियों के पेंशन प्रकरण स्वीकृत किए जाएं, उसके पास उपलब्ध दस्तावेजों का सत्यापन आवेदन लेते समय ही करें। बिना सत्यापन के किसी भी हितग्राही को पेंशन स्वीकृत न करें। जिन हितग्राहियों के नाम समग्र पोर्टल में दर्ज है उनके भी दस्तावेजों की जांच करें, जिनकी पेंशन स्वीकृत है और दस्तावेजों की जांच करने पर वे हितग्राही अपात्र पाए जाते हैं तो उनकी पेंशन पात्रता निरस्त करने की कर्रवाई करें।

अगर अपात्र हितग्राही को पेंशन देने की शिकायत मिलती है और जांच करने पर शिकायत सही पाई जाती है तो स्वीकृतकर्ता अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

इन्हें हैं पेंशन स्वीकृत का अधिकार

नवीन पेंशन स्वीकृत का अधिकार नगरीय निकाय तथा पंचायत के अधिकारियों को दिए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पेंशन स्वीकृत के अधिकार मुख्य कार्यपालिका अधिकारी जनपद पंचायत और ग्राम पंचायत सचिव को तथा नगरीय निकायों में आयुक्त नगर निगम, मुख्य नगर पालिका अधिकारी तथा नगर पंचायत और नगर परिषद को दिए गए हैं। इसमें हितग्राहियों के नाम परिषद में रखे जाते हैं, लेकिन हितग्राहियों का चयन और उनके दस्तावेजों का सत्यापन पहले अधिकारियों को करना पड़ता है।

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