script7000 crore budget of PWD, demand for construction of more than one tho | पीडब्ल्यूडी का 7000 करोड़ का बजट, एक हजार से अधिक सड़कों के निर्माण की डिमांड | Patrika News

पीडब्ल्यूडी का 7000 करोड़ का बजट, एक हजार से अधिक सड़कों के निर्माण की डिमांड

- बजट के अभाव में अभी तक नहीं बन पाई ढाई सौ सड़कें, तीन हजार किमी सड़कें मांग रही है पेंच वर्क

- विभाग ने नए बजट में करीब आठ हजार करोड़ रुपए की डिमांड की है

भोपाल

Published: February 27, 2022 10:18:12 pm

भोपाल। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) का बजट सात हजार करोड़ रुपए है, जिसमें से अभी तक पांच सौ करोड़ रुपए खर्च नहीं हो पाए हैंं। हालत यह है कि इस वित्तीय वर्ष के बजट में प्रावधान की गई करीब ढाई सौ सड़कें अभी नहीं बन पाई हैं। वहीं करीब तीन हजार किलोमीटर सड़कें खराब भी हैं, जिन्हें नए सिरे से बनाया जाना है। इसके चलते विभाग ने नए बजट में करीब आठ हजार करोड़ रुपए की डिमांड की है।
सांसद, विधायक सहित अन्य जन प्रतिनिधियों की तरफ से पिछले एक वर्ष के अंदर जिलों की एक हजार छोटी-छोटी सड़कें बनाने के लिए लोक निर्माण विभाग के पास में डिमांड आई है। इन सड़कों के बनाने के लिए विभाग को दस हजार करोड़ से अधिक राशि की जरूरत है, इसके अलावा पुरानी सड़कें भी हैं, जिन्हें समय समय पर रिपेयर करना होता है। इसके अलावा बजट के अभाव में पिछले वर्षों के बजट की सड़कें ही अभी तक नहीं बन पाई हैं। जन प्रतिनिधियों ने सड़कों के अलावा ओवर ब्रिज के सहित पुल-पुलिया की भी डिमांड की है।

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प्रति वर्ष चार से पांच हजार किमी सड़कें होती है खराब
बारिश के दौरान प्रति वर्ष चार से पांच हजार किमी सड़कें खराब होती हैं। इसके पेंच वर्क में ही विभाग को हजारों करोड़ रुपए खर्च करना होता है। इस वर्ष की स्थिति कुछ अलग टाइप की थी, इस वर्ष पेंच वर्क का पूरा पैसा ग्वालियर-चंबल संभाग में आई बढ़ की बली चढ़ गया। बाढ़ में इस संभागों की सभी सड़कें बह गई थी, जिसके रिपेयर और नए सिरे से निर्माण में राशि खर्च हो गयी। बाकी जिलों में जो सड़कें उखड़ी थी उनमें थोड़ा बहुत पेंच वर्क करा दिया गया, लेकिन अब ये सड़के फिर से उखडऩा शुरू हो गई हैं।

ग्रमीण सड़कें की सबसे ज्यादा खराब
लोक निर्माण विभाग की ग्रामीण सड़कों की हालत सबसे ज्यादा खराब है। यह सड़कें किसी हल्के वाहनों के हिसाब से डिजाइन की गई थीं, लेकिन अब इनसे होकर बड़े-बड़े वाहन भार लेकर गुजरने लगे हैं। खास तौर पर उन क्षेत्र में जहां रेत सहित अन्य खनिजों की खदानें हैं। वर्तमान में बड़ी सड़के मप्र सड़क विकास निगम के पास हैं, जिला मुख्य मार्गों को सरकार विश्व बैंकों से लोन लेकर बना रही है। विभाग के पास एप्रोच रोड और छोटी-छोटी सड़कें ही बची हैं।

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