7th Pay Commission: सरकार की गलती से बिगड़ा साढ़े 6 लाख कर्मचारियों का गणित

मध्यप्रदेश सरकार के वित्त विभाग की एक गलती से सरकारी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता कम कर देने से करीब साढ़े छह लाख कर्मचारियों का हिसाब किताब गड़बड़ा गया है। पहले वे बढ़े हुए सात फीसदी महंगाई भत्ते (डीए) के हिसाब से अपनी सैलरी का अनुमान लगा रहे थे।

By: Manish Gite

Published: 11 Jul 2017, 09:46 AM IST


भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार के वित्त विभाग की एक गलती से सरकारी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता कम कर देने से करीब साढ़े छह लाख कर्मचारियों का हिसाब किताब गड़बड़ा गया है। पहले वे बढ़े हुए सात फीसदी महंगाई भत्ते (डीए) के हिसाब से अपनी सैलरी का अनुमान लगा रहे थे। अचानक सरकार ने इसे बड़ी चूक मांगते हुए चार फीसदी कर कर दिया गया। कर्मचारियों को लगे इस झटके के बाद से वे अब तक नाराज हैं।

डीए घटाने का फैसला वापस लेने के पीछे वित्त विभाग की बड़ी चूक थी। इससे सातवें वेतनमान की गणना कर रहे कर्मचारियों का हिसाब-किताब ही गड़बड़ा गया। वित्त विभाग ने केंद्र सरकार के आदेश को अनदेखा कर 4 फीसदी की जगह सात फीसदी महंगाई भत्ता देने का आदेश दे दिया था। खास बात यह है कि यह मामला कैबिनेट में भी मंजूर हो गया था और इतनी बड़ी गलती को कोई भी पकड़ नहीं पाया था। 


गुस्सा हैं शासकीय कर्मचारी
7 फीसदी महंगाई भत्ते की सौगात का इंतजार कर रहे सरकारी कर्मचारियों में इस फैसले से नाराजगी है। कर्मचारियों का मानना है कि  इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब सरकार को महंगाई भत्ते के आदेश जारी होने के बाद उसे घटाने का फैसला करना पड़ा हो।


एक सप्ताह पहले ही दी थी सौगात
सरकार के वित्त सचिव ने 15 मई को यह आदेश जारी किया था। इसमें शासकीय कर्मचारियों के  DA में 7 फीसदी बढ़ौत्तरी 1 जनवरी 2017 से की गई थी। इसका आदेश कैबिनेट की बैठक में अनुमोदन के बाद ही जारी किया गया था।


यह है वजह
मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक डीए घटाने के पीछे वजह यह माना जा रहा है कि केंद्र सरकार के वित्त विभाग ने जिन कर्मचारियों को 6वां वेतनमान दिया जा रहा है उन्हें एक जनवरी 2017 से चार फीसदी डीए बढ़ाकर देने के आदेश जारी किए थे। 7 अप्रैल 2017 को इसके आदेश जारी हुए थे।


MP सरकार भी केंद्र सरकार के कर्मचारियों की ही तरह समान महंगाई भत्ता देती है। ऐसे में वित्त विभाग की गलती या फिर आदेश को ताक पर रखाना बताया जा रहा है। इसके बाद मध्यप्रदेश सरकार ने चार से बढ़ाकर 7 फीसदी डीए की वृद्धि कर दी थी।


पहली बार हुई सरकार से ऐसी गलती
इतिहास में यह पहला मामला है जब वित्त विभाग से इतनी बड़ी चूक हो गई। सूत्रों ने ब्यूरोक्रेसी पर भी आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि ब्यूरोक्रेसी किस तरह कार्य कर रही है यह बड़ा उदाहरण है। डीए बढ़ाने का प्रस्ताव कैबिनेट में गया और अनुमोदन के बाद आदेश जारी किए गए, लेकिन किसी अधिकारी ने यह गलती नहीं पकड़ी।

इसके लिए दोषियों के खिलाफ विरूद्ध कार्रवाई हो सकती है। यह भी माना जा रहा है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो 7वां वेतनमान निर्धारण संबंधी आदेश में भी बड़ी चूक हो सकती है। 


कैबिनेट में यह भी हुए फैसले
डीए को 7 से घटनाकर 4 फीसदी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके अलावा अन्य प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई है। 

-मप्र निजी विश्वविद्यालय संशोधन अध्यादेश 2017 के जरिये vit भोपाल विवि सीहोर, सेज विवि इंदौर और रैनेसा विवि इंदौर की स्थापना एवं डीसी विश्वविद्यालय इंदौर का परिसमापन  का प्रस्ताव मंजूर।

-हाईकोर्ट जबलपुर की परीक्षा सेल के लिए पदों का सृजन का प्रस्ताव मंजूर।
- मप्र राज्य न्यायिक अकादमी के लिए विभिन्न काडर के पदों का सृजन का प्रस्ताव मंजूर।
-नक्सली ऑपरेशन या कानून व्यवस्था के दौरान घायल अथवा मृत पुलिस कर्मियों को मप्र पुलिस कर्मचारी वर्ग असाधारण परिवार पेंशन नियम 1965 का लाभ देना। यह प्रस्ताव भी मंजूर हो गया।

-नर्मदा घाटी विकास विभाग के कर्मचारी एएल ठाकुर और अन्य 55 के मामले में हाईकोर्ट जबलपुर द्वारा पारित निर्णय का अन्य प्रकरणों में अनुपालन का प्रस्ताव मंजूर
-बीना संयुक्त सिंचाई और बहुउद्देशीय परियोजना की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति का प्रस्ताव स्वीकृत।
-आंवलिया मध्यम सिंचाई परियोजना की प्रशासकीय स्वीकृति का प्रस्ताव स्वीकृत, इस परियोजना से खंडवा जिले के 31 गांव को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा।
- हिरवार सूक्ष्म सिंचाई नहर परियोजना की प्रशासकीय स्वीकृति का प्रस्ताव।
-पिछली कैबिनेट में तय हुआ था कि हर मंत्री अपने विभाग का रोडमेप प्रस्तुत करेंगे, अभी कृषि विभाग और उद्यानकी विभाग के रोड मैप का प्रजेंटेशन हो रहा है।

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