8 सीटों पर वोटिंग कल: 2014 में 7 भाजपा ने जीतीं, 6 सीटें बीजेपी तो एक सीट कांग्रेस का अभेद्द गढ़; 1 पर दोनों का प्रभाव

8 सीटों पर वोटिंग कल: 2014 में 7 भाजपा ने जीतीं, 6 सीटें बीजेपी तो एक सीट कांग्रेस का अभेद्द गढ़; 1 पर दोनों का प्रभाव

Pawan Tiwari | Publish: May, 11 2019 03:45:56 PM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

छठवें चरण में देश के सात राज्यों की 59 सीटों पर वोटिंग होगी। इस बार भोपाल लोकसभा सीट पर रोचक मुकाबला।

भोपाल. लोकसभा चुनाव के छठवें चरण में मध्यप्रदेश की आठ लोकसभा सीटों पर वोटिंग होनी है। भोपाल लोकसभा सीट भाजपा का गढ़ है और इस बार के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर देश की नजर है। क्योंकि यहां से कांग्रेस ने पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह को तो भाजपा ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, इस चरण के चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया , केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर जैसे दिग्गजों के भाग्य का फैसला होना है। इस चरण में मध्यप्रदेश की जिन आठ सीटों पर वोटिंग होनी है वो सीटें हैं मुरैना , भिंड, ग्वालियर , गुना , सागर, विदिशा, भोपाल और राजगढ़ में मतदान होना है।

 

मुरैना लोकसभा सीट
इस लोकसभा सीट पर भाजपा के कद्दावर नेता और केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर मैदान में हैं। वहीं, उनका मुकाबला कांग्रेस के रामनिवास रावत से है। इस सीट को भाजपा का गढञ कहा जाता है। इस सीट पर बीजेपी पिछले 6 चुनावों से जीत हासिल करते आ रही है। कांग्रेस को आखिरी बार इस सीट पर जीत साल 1991 में मिली थी। 2014 के लोकसभा चुनाव में अनूप मिश्रा ने बसपा के वृन्दावन सिंह सिकरवार को हराया था। यहां की 78.23 फीसदी ग्रामीण क्षेत्र और 21.77 फीसदी जनसंख्या शहरी क्षेत्र में रहती है। मुरैना में 19.97 फीसदी अनुसूचित जाति के लोग और 6.73 फीसदी अनुसूचित जनजाति के लोग रहते हैं। नरेन्द्र सिंह तोमर 2014 में ग्वालियर लोकसभा सीट से चुनाव जीते थे इस बार उनकी सीट बदली गई है। पार्टी ने उन्हें ग्वालियर की जगह मुरैना से उम्मीदवार बनाया है। 2009 में नरेन्द्र सिंह तोमर यहां से सांसद रह चुके हैं।


भिंड लोकसभा सीट
इस सीट को भी भाजपा का गढ़ कहा जाता है। मध्य प्रदेश की भिंड लोकसभा सीट बीजेपी के मजबूत किले में से एक है। इस सीट से राजमाता विजयाराजे सिंधिया भी चुनाव जीत चुकी हैं। फिलहाल इस सीट पर पिछले 8 चुनाव से बीजेपी का ही कब्जा है। कांग्रेस को इस सीट पर सिर्फ 3 बार जीत पाई है। इस बार भाजपा ने यहां से संध्या राय को उम्मीदवार बनाया है तो वहीं, कांग्रेस ने इस सीट से देवाशीष जरारिया को उम्मीदवार बनाया है। यहां की 75.3 फीसदी आबादी ग्रामीण क्षेत्र और 24.7 फीसदी आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है। भिंड में 23.1 फीसदी आबादी अनुसूचित जाति की है।

 

ग्वालियर लोकसभा सीट
मध्य प्रदेश की यह सीट राज्य ही नहीं देश की वीवीआईपी सीटों में से एक है। इस सीट से देश के कई दिग्गज नेता सांसद रह चुके हैं। बीते तीन चुनावों में यहां से भाजपा की जीत हो रही है। इस सीट में सिंधिया राज घराने का वर्चश्व रहा है। 2014 के चुनाव में नरेंद्र सिंह तोमर ने कांग्रेस के अशोक सिंह को शिकस्त दी थी। यहां की 51.04 फीसदी आबादी ग्रामीण क्षेत्र और 48.96 फीसदी आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है। ग्वालियर में 19.59 फीसदी लोग अनुसूचित जाती के हैं और 5.5 फीसदी लोग अनुसूचित जनजाति के हैं।

गुना लोकसभा सीट
इस सीट में कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया 2002 से सांसद हैं। वो लगातार यहां से चुनाव जीत रहे हैं। वो एक बार फिर से इस सीट से मैदान में हैं यहां से इस बार भाजपा ने केपी यादव को अपना उम्मीदवार बनाया है। ज्योतिरादित्य से पहले यह सीट उनके पिता माधवराव सिंधिया और दादी विजयाराजे सिंधिया की थी। गुना शहर में हिन्दू, मुस्लिम तथा जैन समुदाय के लोग रहते हैं। यहां की 76.66 फीसदी आबादी ग्रामीण क्षेत्र और 23.34 फीसदी आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है। गुना में 18.11 फीसदी लोग अनुसूचित जाति और 13.94 फीसदी लोग अनुसूचित जनजाति के हैं।

 

सागर लोकसभा सीट
यह सीट भी भाजपा का गढ़ है। इस सीट में कांग्रेस को आखिरी बार 1991 में जीत मिली थी। इस सीट पर पिछले 6 चुनावों से बीजेपी का ही कब्जा है। इस बार भाजपा ने यहां से राज बहादुर सिंह को उम्मीदवार बनाया है वहीं, कांग्रेस ने इस सीट से प्रभु सिंह ठाकुर को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के लक्ष्मी नारायण यादव ने कांग्रेस के गोविंद सिंह राजपूत को हराया था। इस बार भाजपा ने मौजूदा सांसद लक्ष्मी नारायण का टिकट काट दिया है। यहां की 72.01 फीसदी आबादी ग्रामीण क्षेत्र और 27.99 फीसदी आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है। सागर की 22.35 फीसदी आबादी अनुसूचित जाति के लोगों की है और 5.51 फीसदी आबादी अनुसूचित जनजाति के लोगों की है।


विदिशा लोकसभा सीट
इस सीट से मौजूदा समय में केन्द्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज सांसद हैं। सुषमा स्वराज यहां से 2009 और 2014 में सासंद बनी थीं। यह सीट भाजपा की सबसे सुरक्षित सीटों में से एक है। यहां से मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान लगातार चार बार सांसद रहे तो पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी भी यहां से सांसद रहे चुके हैं। यहां की 81.39 फीसदी आबादी ग्रामीण और 18.61 फीसदी आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है. विदिशा में 18.68 फीसदी लोग अनुसूचित जाति के हैं और 5.84 अनुसूचित जनजाति के हैं। सुषमा स्वराज के चुनाव लड़ने से इंकार के बाद इस बार भाजपा ने यहां से रमाकांत भार्गव को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, कांग्रेस ने शैलेन्द्र पटेल को टिकट दिया है।

 


भोपाल लोकसभा सीट
2019 के चुनाव में भोपाल लोकसभा सीट देश की सबसे हाइ प्रोफाइल सीटों में से एक है। इस सीट पर इस बार कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को उम्मीदवार बनाया है तो वहीं, भाजपा ने यहां से साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को टिकट दिया है। पिछले 8 चुनावों में यहां पर सिर्फ बीजेपी को ही जीत मिली है। भोपाल की जनसंख्या 26,79,574 है. यहां की 23.71 फीसदी आबादी ग्रमीण क्षेत्र में रहती है, जबकि 76.29 फीसदी शहरी इलाके में रहती है। भोपाल की 15.38 फीसदी जनसंख्या अनुसूचित जाति की है और 2.79 फीसदी अनुसूचित जनजाति की है।

राजगढ़ लोकसभा सीट
इस सीट को कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का गढ़ माना जाता है। यहां से दिग्विजय सिंह खुद दो बार सांसद रहे हैं जबकि उनके भाई इस सीट लक्ष्मण सिंह 5 बार सांसद रहे हैं। 2014 के चुनाव में भाजपा ने जीत दर्ज की थी। इस बार भी भाजपा ने मौजूदा सांसद रोडमल नागर का अपना उम्मीदवार बनाया है। वहीं, कांग्रेस ने मोना सुस्तानी को उम्मीदवार बनाया है। यहां की 81.39 फीसदी जनसंख्या ग्रामीण इलाके में रहती है और 18.61 फीसदी आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है. इस क्षेत्र में गुर्जर, यादव और महाजन वोटर्स की संख्या ज्यादा है।

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