H-DAY: 80 फीसदी पुलिसकर्मी बीमार, वाइफ भी तोड़ रहीं रिश्ता, पढ़ें ये रिपोर्ट...

  H-DAY: 80 फीसदी पुलिसकर्मी बीमार, वाइफ भी तोड़ रहीं रिश्ता, पढ़ें ये रिपोर्ट...
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ज्यादातर पुलिस जवानों में कमर दर्द, पीठ दर्द, शुगर, बीपी, डायबिटीज और कार्डियक सहित कई बीमारियां की शिकायत रहती है।

प्रवीण श्रीवास्तव @ भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के पुलिसकर्मी तनाव में हैं। 80 फीसदी पुलिसकर्मी अपने परिवार को समय नहीं दे पात। इस तनाव का असर उनके पारिवारिक जीवन एवं रिश्तों पर भी पड़ रहा है। पुलिसकर्मी 24 घंटे की ड्यूटी के चलते गंभीर बीमारियों की जद में हैं। यह चौंकाने वाली बात गांधी मेडिकल कॉलेज के सामुदायिक स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए शोध में सामने आई है। आइए पढ़ें इस रिपोर्ट से जुड़े कुछ रोचक फैक्ट.....




पुलिसवालों का जीवन संघर्ष से भरा
जब तीज-त्योहार पर पूरा शहर खुशियां मनाता है, तब पुलिस जवान परिवारों से दूर ड्यूटी दे रहा होता है। यही नहीं इन कामों से मुक्ति मिलते ही उन्हें अफसरों-मंत्रियों के घर के काम में लगा दिया जाता है। शोध रिपोर्ट के मुताबिक कामकाजी जीवन का संघर्ष और निराशा उनके पारिवारिक जीवन पर भी बुरा असर डाल रही है। 24 घंटे की ड्यूटी, परिवारों से दूरी और बदहाल ठिकानों के बीच पुलिसकर्मियों की ना केवल सेहत बल्कि पारिवारिक रिश्तों को डोर भी कमजोर होती जा रही है।




ऐसे किया सर्वे 200 पुलिसकर्मियों से की बात
सर्वे टीम के सदस्य डॉ. भविष्य राठौर ने बताया कि बताया कि सर्वे के लिए उन्होंने सितंबर 2016 से नवंबर 2016 के बीच शहर के 12 पुलिस थानों में पदस्थ 200 पुलिसकर्मियोंं और उनके परिवार से बात की। सर्वे के लिए दिनचर्या, पारिवारिक, मानसिक, शारीरिक स्थिति सहित विभिन्न पहलुओं पर बात की।

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गंभीर बीमारियों के शिकार
ज्यादा काम के चलते पुलिसकर्मियों में तनाव, व्यववहार में चिड़चिड़ेपन की शिकायत हो जाती है। ज्यादातर पुलिस जवानों में कमर दर्द, पीठ दर्द, शुगर, बीपी, डायबिटीज और कार्डियक सहित कई बीमारियां की शिकायत रहती है। इन बीमारियों की वजह से इनकी औसतन लाइफ 10 से 15 साल तक कम हो रही हैं। 

डर : परिवार टूटने की रहती है चिंता
सर्वे में सामने आया कि पत्नी और परिवार इस कठिन नौकरी से परेशान हैं। इस दौरान कई कांस्टेबल की पत्नियों ने बताया कि कभी परिवार को समय देना तो दूर, बच्चों के साथ बैठकर बात भी नहीं कर पाते हैं। छुट्टियां नहीं मिलने से रिश्तेदार भी कटने लगे हैं। परिवार बिखरने का डर भी बना रहता है।




ये करना चाहिए 
मनोचिकित्सकों के मुताबिक पुलिसकर्मियों के तनाव को दूर करने के लिए विभागीय और स्वयं के स्तर पर कार्य करना चाहिए।




यह होना चाहिए
- समय-समय पर छुट्टी देते रहें।
- बर्थ डे और उपलब्धि को सेलिब्रेट करें।
- प्रमोशन और अन्य पॉलिसी क्लीयर हो।
- ड्यूटी को रोटेट किया जाए।
- तनाव से मुक्त देने वाले कार्यक्रम हों।


स्वयं यह करें
- काम की दिक्कत होने पर अधिकारियों से बात करें। 
- परिवार से परेशानियों को साझा करें। 
- तनाव से बचने के लिए नशे का उपयोग न करें। 
- जब भी छुट्टी मिले तो अपने पसंदीदा काम करें। 


इनका कहना है...
हमने पुलिसकर्मियों कामकाज और उसका उनके पारिवारिक जीवन पर प्रभाव को जांचा। करीब दो महीने चले सर्वे में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। 
- डॉ. जीवन सिंह मीणा, असिस्टेंट प्रोफेसर, कम्युनिटी मेडिसिन विभाग जीएमसी
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