स्कूल बसों के लिए अलग से बनेगी नीति, उल्लंघन पर जेल और जुर्माना का प्रावधान-Video

mp govt स्कूल की मान्यता भी हो सकती है रद्द

भोपाल। छात्र-छात्र सुरक्षित स्कूल और सुरक्षित घर पहुंचे। इसके लिए अब सरकार अब स्कूल संचालक और बस संचालक की जिम्मेदारी भी तय करने जा रही है। इसके लिए एक अलग से लाई जा रही परिवहन नीति मेंं विशेष प्रावधान किए जा रहे हैं। नियमों का उल्लंघन करने पर जेल और जुर्माना सहित स्कूल की मान्यता खत्म करने का भी प्रावधान नीति मेंं किया गया है।

 

वर्तमान में लागू परिवहन नीति की बात करें तो इसमें स्कूल बसों के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं है। इससे कई बार स्कूल बसों के मामले में मनमानी होती है। अब ऐसा नहीं होगा। मंत्री ने कहा कि उन्होंने स्वयं औचक निरीक्षण कर स्कूल बसों की स्थिति देखी है। कई खामियां भी पाई गई हैं। इन्हें दूर किए जाने के निर्देश दिए गए। कई स्कूल बसों पर कार्यवाही भी की गई। नई नीति में स्कूल बस संचालक और स्कूल संचालकों भी भरोसे में लिया जा रहा है।

 

नियमों का उल्लंघन करने पर दण्ड का प्रावधान -
मोटर व्हीकल एक्ट में वैसे भी बस मालिकों के परमिट इत्यादि के प्रावधान हैं, इस प्रस्तावित नीति में भी एेसी व्यवस्था की जा रही है जिससे स्कूल संचालक या फिर बस मालिक नियमों का उल्लंघन न कर सके।

इसके लिए दण्ड का भी प्रावधान है। स्कूल की मान्यता निरस्त किए जाने की अनुंशसा के साथ बस मालिकों को दण्ड जुर्माना से लेकर जेल तक हो सकती है।

 

 

पुरानी बसों को हतोत्साहित करने का प्रयास -
राज्य सरकार का प्रयास है कि सड़क पर पुरानी बसें न दौड़े। पिछले बार सरकार ने कोशिश की थी कि १५ साल से अधिक पुरानी स्कूल बसें न चलें। इसको लेकर बस संचालकों के विरोध के चलते यह प्रस्ताव ठण्डे बस्ते में चला गया था। तर्क दिया गया था कि इन बसों अधिक आय नहीं होती। मोटर व्हीकल एक्ट में पुराने वाहनों पर अधिक टेक्स लगाए जाने के प्रावधान किए जा चुके हैं। बस संचालकों को नई बसें खरीदने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

 

टेक्स में छूट का न हो दुरुपयोग -
स्कूल बसों को सरकार टेक्स में छूट देती है, इस छूट का दुरुपयोग की शिकायतें आ रही थीं। कई स्कूल संचालक और बस संचालक इनका व्यवसायिक उपयोग करने लगे थे। लेकिन अब एेसा संभव नहीं हो पाएगा। इसकी निगरानी होगी।

 

किसकी क्या होगी जिम्मेदारी -

बस संचालक -
नई प्रस्तावित नीति में बस संचालकों की जिम्मेदारी होगी कि बस का फिटनेस बेहतर रखे। सुरक्षित परिवहन के पर्याप्त इंतजाम हों। ड्रायवर, कंडक्टर प्रशिक्षित हों। ड्रेस कोड का पालन करें। पुलिस बेरिफिकेशन भी हो।

स्कूल संचालक -
अभिभावक और बस संचालकों के बीच सवन्वयक का काम करेंगे। प्रतिमाह दोनों पक्षों की बैठक करेंगे। आपत्तियों का निराकरण करेंगे। जरूरत पडऩे पर जिला प्रशासनकी मदद लेंगे।

बच्चों के अभिभावक -
वह अपने बच्चे को स्कूल वाहन में भेजने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट है और वाहन चालक के पास लायसेंस। सुरक्षा की दृष्टि से खिड़की में ग्रिल इत्यादि लगे हैं कि नहीं। बस में चलने वाले स्टाफ का व्यवहार कैसा है।

बेहतर परिवहन के लिए सरकार विभाग लगातार प्रयासरत है। इसमें स्कूल बस भी शामिल हैं। इसलिए इसके लिए अलग से नीति लाई जा रही है। नियम का उल्लंघन करने पर सजा का प्रावधान इस नीति में किया गया है।
- गोविंद सिंह राजपूत, परिवहन मंत्री

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दीपेश अवस्थी
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