पद्मश्री सम्मान से पत्नी और बच्चों के गमजदा चेहरों पर छाई मुस्कान

गैस पीडि़तों के लिए काम करने वाले एक्टिविस्ट अब्दुल जब्बार को पद्मश्री, परिजन बोले-उनके जिंदा रहते मिलता सम्मान तो और बेहतर होता

भोपाल. गैस पीडि़तों को इंसाफ दिलाने के लिए संघर्ष करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अब्दुल जब्बार के परिवार को शनिवार दोपहर तीन बजे पद्मश्री सम्मान से नवाजे जाने की सूचना मिली। दो अधिकारी राजेन्द्र नगर स्थित उनके निवास पर जानकारी देने आए थे। ये सुन पत्नी सायरा बानो और बच्चों के साथ भाई अब्दुल शमीम के गमजदा चेहरों पर मुस्कान तो आई, लेकिन एक टीस भी दिखी कि सरकार उनके जीवित रहते ये सम्मान देती तो और बेहतर था। दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी भोपाल गैस कांड से लाखों लोग प्रभावित हुए, वहीं 15 हजार से ज्यादा की मौत हुई थी। प्रभावितों को इंसाफ दिलाने सामाजिक कार्यकर्ता अब्दुल जब्बार ने जीवनभर संघर्ष किया। लंबी बीमारी के बाद 14 नवंबर 2019 को उनका निधन हो गया था। अंतिम दिनों में उन्हें 50 फीसदी तक दिखना बंद हो गया था और दुनिया की सबसे खराब औद्योगिक आपदा भोपाल गैस त्रासदी में फेफड़े से जुड़ी समस्या का सामना करना पड़ा था। जब्बार ने 1984 की गैस त्रासदी में माता-पिता और भाई को भी खो दिया था। वो खुद भी इस भीषणतम गैस त्रासदी
से पीडि़त थे।
परिवार में नहीं कोई कमाने वाला
परिवार में पत्नी सायरा बनो (45) व 3 बच्चे साहिल, समीर और मरियम हैं। जब्बार के भाई अब्दुल शमीम ने बताया कि वर्तमान में परिवार के पास रोजगार का कोई जरिया नहीं है।
लाखों लोग हुए थे प्रभावित
दो व तीन दिसंबर 1984 की भयावह रात को हादसा हुआ था। यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से जहरीली गैस का रिसाव हुआ। इसकी चपेट में आने से 6 लाख लोग प्रभावित हुए।
जिन लोगों को इंसाफ दिलाने के लिए लड़ते हुए जब्बार भाई दुनिया से चले गए। सरकार
उन गैस पीडि़तों को इंसाफ नहीं दे रही।
रसीदा बी, भोपाल गैस पीडि़त महिला स्टेशनरी मोर्चा
गैस पीडि़तों को इंसाफ दिलाने के लिए लड़ाई लड़ रहे लोगों के लिए ये गर्व की बात है। सभी को इससे प्रोत्साहन मिलेगा।
बालकृष्ण नामदेव, भोपाल गैस पीडि़त निराश्रित पेंशन भोगी मोर्चा

Pushpam Kumar Desk
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