बड़ा खुलासा: सिर्फ 10 मिनट में निकाली जा रही है आपके आधार कार्ड की पूरी डिटेल, जानिए कैसे

ऐसे निकाली जा रही है आपके आधार कार्ड की डिटेल...

By: Ashtha Awasthi

Published: 04 Jan 2018, 02:36 PM IST

भोपाल। हाल ही में आयोजित की गई मध्यप्रदेश पटवारी परीक्षा में कई अभ्यार्थी परीक्षा देने से वंचित रह गए थे। इसका बड़ा कारण सामने आया आधारकार्ड। कई अभ्यार्थियों के आधारकार्ड मोबाइल से लिंक नहीं थे, या फिर उनके पास थे ही नहीं। हम सभी जानते हैं कि अब सभी योजनाओं, बैंक खाते, डाकघर सहित सब्सिडी के लिए आधार कार्ड आवश्यक हो गया है। सरकार ने हर सरकारी और गैर सरकारी काम के लिए आधार कार्ड जरूरी कर दिया इसलिए यदि अब भी आपके पास आधार कार्ड नहीं है तो बिना देर किए इसे बनवाएं। क्योंकि साल 2018 की शुरुआत के साथ ही कई जगह इसकी अनिवार्यता हो गई है।

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यहां पर बन रहे आधार कार्ड

शहर के टीटी नगर मुख्य डाकघर में आधार कार्ड निर्माण एवं अपडेशन की सुविधा शुरू हो गई। बता दें कि इस सेंटर का शुभारंभ महाप्रबंधक वित्त डाक लेखा एसएल भालौटिया ने किया है। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश के 473 डाकघरों में नामांकन अर्थात नए आधार निर्माण एवं अपडेशन की सुविधा रहेगी। 544 आधार सेवा सेंटर्स पर आधार कार्ड के डॉटा में संशोधन का कार्य किया जा सकेगा। साथ ही शहर के ही रॉयल मार्केट स्थित जीपीओ दूसरा ऐसा आधार सेवा सेंटर होगा, जहां नामांकन और अपडेशन की सुविधा रहेगी।

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सुरक्षित नहीं है आपका आधार कार्ड

बीते साल आधार बनाने वाली अथॉरिटी यूआईडीएआई ने लोगों को ये विश्वास दिलाया था कि सभी का आधार कार्ड पूरी तरह से सुरक्षित है। आधार कारड का डेटा किसी भी तरह से लीक नहीं हो सकता है। हालही में एक अग्रेंजी अखबार द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है कि आधार कार्ड की जानकारी बिलकुल सेफ नहीं है। जानकारी ये भी मिली है कि सिर्फ 500 रुपए देकर आप 10 मिनट में करोड़ों आधार कार्ड की जानकारी एकत्रित कर सकते हैं। इस अग्रेंजी अखबार ने एक तहकीकात की जिसमें उन्होंने व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से मात्र 500 रुपये में यह सर्विस खरीदी और करीब हर भारतीय के आधार कार्ड का एक्सेस मिल गया।

 

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आसानी से मिल जाती है सारी जानकारी

अखबार की तहकीकात में एक एंजेट के बारें मे जानकारी मिली है। इस एजेंट ने अपना नाम अनिल कुमार दिया है। जब अखबार के पत्रकारों ने अनिल से आधार कार्ड की डिटेल मांगी तो अनिल ने पहले ने पहले एक एक्सेस पोर्टल बनाने को कहा है। इसके बाद अनिल ने नाम, ई-मेल और मोबाइल नंबर मांगा जिसके बाद उसने एक नंबर दिया जिस पर पेटीएम के माध्यम से 500 रुपए ट्रांसफर करने को कहा। पैसे मिलने के बाद एजेंट ने मात्र 10 मिनट में एक गेटवे दिया और लॉग-इन पासवर्ड दिया। उसके बाद उन्हें सिर्फ आधार कार्ड का नंबर डालना था और किसी भी व्यक्ति के बारे में आसानी से आधार कार्ड की सारी जानकारियां मिल गई।

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300 रुपए में देते हैं प्रिंट

सारी जानकारी मिलने के बाद जब पत्रकारों ने जानकारी का एक प्रिंट मांगा तो अनिल ने पेटीएम के माध्यम से फिर से 300 रुपये लिए और फिर रिमोट से 'टीम व्यूवर' के माध्यम से एक तहकीकात करने वाली रिपोर्टर के कंप्यूटर में एक सॉफ्टवेयर इंस्टाल किया और जैसे ही काम खत्म हुआ तो उसने तुरंत सॉफ्टवेयर डिलीट कर दिया। इस पूरे मामले के बारे में जानकारी मिलने पर यूआईडीएआई अधिकारियों ने तुंरत ही मामले की जांच की और बेंगलुरु में टेक्निक्ल टीम को पूरी जानकारी दी। चंडीगढ़ में यूआईडीएआई की रिजनल एडशिनल डॉयरेक्टर-जनरल, संजय जिंदल ने बताया कि अगर ये सही है तो काफी चौंकाने वाला है क्योंकि डॉयरेक्टर-जनरल और मेरे अलावा किसी और के पास लॉग-इन पासवर्ड नहीं होता।

तीन लाख ग्रामीणों को किया टारगेट

बताया जा रहा है कि ये ग्रुप बीते 6 महीने से चल रहा है और अब तक इसने करीब तीन लाख से ज्यादा उन गांव वालों को टारगेट किया है जिन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से कॉमन सर्विस सेंटर स्कीम के तहत जो सेंटर खोले थे। उन्होंने इन लोगों से आधार के बारे में सारी जानकारी निकालना आसान समझा और उन्हें ही अपने जाल में फंसा लिया।

Ashtha Awasthi
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