#ChangeMaker_राजनीतिक बदलाव में वकील बनेंगे हमराह : Video Also here

Deepesh Tiwari

Publish: May, 18 2018 01:13:42 PM (IST)

Bhopal, Madhya Pradesh, India
#ChangeMaker_राजनीतिक बदलाव में वकील बनेंगे हमराह : Video Also here

राजनीतिक बदलाव में वकील बनेंगे हमराह, पत्रिका चेंजमेकर अभियान के तहत जिला न्यायालय में अधिवक्ताओं की बैठक...

भोपाल। जिला न्यायालय के सभागार में पत्रिका चेंजमेकर अभियान के तहत अधिवक्ताओं के साथ संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें अधिवक्ताओं ने राजनीति में स्वच्छता की जरूरत और इसके लिए चेंजमेकर जैसे अभियान की उपयोगिता पर परिचर्चा कर महाभियान से जुडऩे की बात कही।


सभी ने एक सुर में कहा कि अब राजनीति में गंदगी का प्रवेश होने लगा है, इसे दूर करना आज सबसे बड़ी जरूरत है। पत्रिका ने अभियान चलाकर समाज को एक नया रास्ता दिखाया है, इस पर चलकर राजनीति में बदलाव लाया जा सकता है। इसके लिए स्वच्छ और साफ छवि के के लोगों को आगे आना होगा।

Advocates

खासकर युवाओं और महिलाओं को इससे जुडऩा होगा। संगोष्ठी में उपस्थित वकीलों ने राजनीति में बदलाव लाने के लिए हर कदम पर साथ रहने की वकालत की।

कार्यक्रम के प्रारंभ में पत्रिका भोपाल संस्करण के स्थानीय संपादक पंकज श्रीवास्तव ने चेंजमेकर अभियान की रूपरेखा और वर्तमान परिदृश्य में इसकी जरूरत की जानकारी दी।

भोपाल के जोनल हेड गजराज भंडारी ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन जिला अभिभाषक संघ के सचिव डॉ. पीसी कोठारी ने किया। कार्यक्रम में पत्रिका के डीजीएम सर्कुलेशन वीपीएस भदौरिया सहित गणमान्य अधिवक्ताओं ने शिरकत की।

वकीलों ने ये रखे अपने विचार:
1. विजय चौधरी - सदस्य, राज्य अधिवक्ता परिषद: पत्रिका ने यह मुद्दा उठाया है, इस बारे में कहना चाहता हूं कि वकीलों को भी चाहिए कि स्वच्छ राजनीति के लिए काम करें। अधिवक्ता किसी वर्ग का किसी दल का नहीं होता है। एक बार काला कोट पहन लिया तो वह सिर्फ अधिवक्ता होता है। एेसे में अधिवक्ताओं को चाहिए कि अपनी जिम्मेदारी निभाएं। सबसे पहले आस-पड़ोस को देखें, फिर समाज और राष्ट्र को देखें। लोगों की परेशानियों को दूर करने की कोशिश करें।

आज मोहल्लों की सबसे बड़ी समस्या अतिक्रमण है, इसके पीछे दलगत राजनीति सबसे बड़ा कारक होती है। एेसे लोगों का काम राजनीति के नाम पर कब्जे करना है, लोगों को लड़वाना है। अधिवक्ता एेसे लोगों पर नजर रखें, इनकी शिकायत करो और साथियों उनके मुकदमे लड़ो।

मैंने देखा है बड़े-बड़े पहलवान, दादा कोर्ट में आते हैं तो वकील को झुककर नमस्ते करते हैं और कठघरे में जाने की बारी आती है तो वकील के पीछे खड़े होकर घबराते हैं, वकील साहब देखना, नुकसान न हो जाए। एेसे में हमारा कर्तव्य है, अपने व्यवसाय, अपने पेशे के साथ इस देश के योग्य नागरिकों को आगे लाने में मदद करें वहीं गुंडे-बदमाश, समाज को बांटने वाले, अवैध कब्जे करने वालों के खिलाफ लड़ें।

2. दीपचंद यादव - वरिष्ठ अधिवक्ता: जब हम देश और राजनीति की बात करते हैं तो एक बात मेरे दिमाग में आती है कि जब पेट की आग मस्तिष्क तक पहुंचती है, तब क्रांति होती है। जब क्रांति होती है तब देश बदलता है। यह मशाल जो पत्रिका ने उठाई है, वह सराहनीय है। इसके लिए राजनीतिक पार्टियों को भी परिवर्तन लाना होगा। चुनाव आयोग को परिवर्तन करना होगा। कानून में प्रावधान करना होगा, कि हमें किन्हें जनप्रतिनिधि बनाना चाहिए और किन्हें नहीं।

क्योंकि जनप्रतिनिधि हमारे राज्य , देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में हमारा प्रतिनिधित्व करते हैं। आज आजादी खतरे में है। फिर से देश को पुराने युग में ले जाना चाहते हैं। एेसा खतरा आगे बढ़ता रहेगा। जहां पर देश खतरे में हो, जहां पर इतिहास खतरे में वहां कोई सुरक्षित नहीं रहेगा।

यदि राष्ट्र सुरक्षित रहेगा तो हम सब लोग सुरक्षित रहेंगे, यदि राष्ट्र टूट जाएगा ता हम भी नहीं बचेंगे। इसलिए मेरा निवदेन है कि राष्ट्र को बचाने के लिए कदम उठाएं।

पत्रिका जो राजनीति में स्वच्छता की बात कर रहा है, उसके साथ कदम उठाएं। आप अपने अंदर से स्वच्छ होंगे तो तो आसपड़ोस स्वच्छ होगा, यदि आप स्वच्छ होंगे तो देश स्वच्छ होगा, राष्ट्र निर्माण के लिए अपने अंदर से लेकर बाहर तक बुराईयों को दूर करने की जरूरत है।

3. सैय्यद साजिद अली - वरिष्ठ अधिवक्ता: आज सत्ता में जो भी अच्छे नेता देखने में मिल रहे हैं उनमें से अधिकांश अधिवक्ता बंधुओं में से निकलकर आ रहे हैं। चाहे वे कपिल सिब्बल हों, अरुण जेटली या विवेक तन्खा। जो भी अधिवक्ता राजनीति में आए हैं, उन्होंने अपना अलग मुकाम बनाया है। राजनीति में जो पतन हो रहा है, उसका कारण है कि वर्तमान में इसमें अच्छे लोग नहीं आ रहे। अच्छे लोग जब तक राजनीति में नहीं आएंगे, तब तक सुधार नहीं हो सकेगा।

देश के बारे में सोचते हुए एक बात दिमाग में आती है। इस मुल्क को कौन नुकसान पहुंचाना चाहता है? पड़ोसी मुल्क, आतंकवादी.़.़। कोई आकर यदि दो-चार पांच लोगों को मारकर चला जाता है, कुछ नुकसान करके चला जाता है, उससे पड़ोसी मुल्क को क्या फायदा? यदि इतने बड़े देश में कुछ करोड़ का नुकसान पहुंचा भी दे तो इससे पूरे देश पर समग्र रूप में क्या असर पड़ता है?

फिर भी चंद लोगों को मारने और नुकसान पहुंचाने की यह हरकत क्यों हो रही है? मेरा विचार है, इसके पीछे सोची-समझी साजिश है, देश को धर्म और जात-पात के नाम पर बांटने की। वे लोग नहीं चाहते कि मुल्क में आवाम मिलजुल कर रहे। जो भी एेसा करेगा वह उस मुल्क का हितैषी है। यदि यह सोची-समझी साजिश है तो उस साजिश को तोड़ा कैसे जाए? क्या यह इतना आसान है? यह कठिन इसलिए है क्योंकि आज हम देखते हैं, किसी भी इलाके में कोई व्यक्ति जीतता है वह धर्म जाति के कारण जीतकर आता है।

चाहे वह कितना भी बड़ा अपराधी भ्रष्टाचारी क्यां न हो? मैं एेसे लोगों से मिला हूं जिन पर बड़े-बड़े इल्जाम हैं? वह लोग जीतकर आए, आज वह अंदर हैं, अच्छे लोग बाहर हैं, क्यों? क्योंकि चुनाव का पैमाना काबिलियत नहीं है। पैमाना जात-पता है, धर्म है। लेकिन जैसे ही काबिलियत पैमाना बन जाएगी, तब देश को तरक्की से कोई नहीं रोक सकता। मैं कामना करता हूं सभी अच्छे लोगों को आगे बढ़ाने की कोशिश करें, ताकत दें।

4. टीपी विश्वकर्मा - पूर्व अध्यक्ष जिला बार एसोसिएशन : चेंजमेकर राजनीति में स्वजमेकर राजनीति में स्वच्छता को लेकर शुरू किया गया है। राजनीति में स्वच्छता यह कहता है कि अस्वच्छता तो है और उसे स्वच्छ करने की जरूरत भी है। आज राजनीति सर्वजन सुखाय, सर्वजन हिताय के बजाय स्वार्थ की बनकर रह गई है। अधिवक्ता चाहे राजनीति से जुड़ा हो या न हो, लेकिन उसका चिंतन होना चाहिए। उसे पता होना चाहिए कि देश और राजनीति कहां जा रही है? अधिवक्ता समय के प्रति सजग रहें।


5. एचएल झा - पूर्व लोक अभियोजक: पत्रिका समूह को धन्यवाद जिसने आज की राजनीति में प्रमुख भूमिका निभाने वाले अधिवक्ताओं से सम्पर्क किया। अधिवक्ता ही अपनी बात निर्भीकता से रख सकता है। क्योंकि किसी भी पार्टी का व्यक्ति जब कोर्ट आता है तो वह अपनी विचारधारा का व्यक्ति नहीं बल्कि एक अच्छा अधिवक्ता खोजता है। हर कालखंड में अच्छे अधिवक्ता अच्छे राजनेता साबित हुए हैं। अधिवक्ता राजनीति से जुड़ें तब ही स्वच्छ राजनीति का आगाज होगा।

6. प्रियनाथ पाठक - वरिष्ठ अधिवक्ता : समाज में दो तरह की राजनीति चल रही है। सर्वजनिक हित की और व्यक्तिगत हित की। सार्वजनिक हित की बात चेंजमेकर करता है और इसकी बात कर कोई भी चेंजमेकर बन सकता है। इसके लिए आप अपने मोहल्ले से शुरू करें। मोहल्ले वालों की छोटी-छोटी समस्याओं को दूर करने के लिए निस्वार्थ भाव से काम करें। पहले ५०-१०० घर से आपका दायरा हजार घरों तक पहुंच जाएगा। धीरे-धीरे आपको बदलाव भी दिखने लगेगा।

7. अनिल भार्गव - पूर्व उपाध्यक्ष जिला बार एसोसिएशन : रूल ऑफ लॉ कहता है राजनीति लोक कल्याण की योजना और कानून से संचालित होगी, लेकिन एेसा हो नहीं रहा है। कानून की जानकारी न होने से लोग डरते हैं। जहां डर होता है, वहां आजादी नहीं होती। इसलिए वकील सबसे पहले विधिक साक्षरता की बात करें। डर निकल जाएगा तो ही बदलाव होगा। राजनीति में स्वच्छता के लिए युवाओं को जोडऩा सबसे जरूरी है, युवाओं को नहीं जोड़ेंगे तो बदलाव नहीं होगा।

8. संजय गुप्ता - वरिष्ठ अधिवक्ता : राजनीतिक स्वच्छता के साथ अधिवक्ताओं का जोड़ बिल्कुल सही निर्णय है। राजनीति जब से पूर्णकालिक बनी है तब से यह उद्योग बनकर रह गई है। एक अधिवक्ता के रूप में 80 के दशक से प्रत्याशियों के फॉर्म भर रहा हूं। जब पहली बार सम्पति की बात आती है तो एक स्कूटर और थोड़ी सी सम्पति निकलती है, लेकिन पांच साल बाद जब वही प्रत्याशी आता है तो वह कई किलो सोने से लेकर जमीन-जायदाद का पूरा पोथा साथ लाता है।

9. राजेश व्यास - अध्यक्ष जिला बार एसोसिएशन: राजनीति में बदलाव लाने के लिए उठाया गया कदम चेंजमेकर्स गंभीर विषय है। इस विषय पर अधिवक्ताओं के साथ मिलकर कदम उठाने से लक्ष्य को पाया जा सकेगा। पत्रिका ने अच्छा मुद्दा उठाया है, प्रदेश की हर तहसील तक में अधिवक्ताओं का साथ रहेगा। पत्रिका ने जिस तरह से चेंजमेकर को बढ़ाया है, इसके चलते पत्रिका भी चेंजमेकर है। नेतृत्व करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की आंकक्षा रहती है कि वह इतिहास रचे, अब यह संभव हो पाएगा।

10. राबर्ट एंथोनी - वरिष्ठ अधिवक्ता: राजनीति की स्वच्छता से पहले हमें खुद को समर्थ बनाना होगा। आज अधिवक्ता अपनी सुरक्षा के लिए राजनेताओं के सामने जा रहे हैं। आजादी की लड़ाई में जिन महात्मा गांधी, नेहरू जी का योगदान था वे बैरिस्टर थे। बाबा साहेब अम्बेडकर बैरिस्टर थे। जब हम खुद सुरक्षा के प्रति जागरूक नहीं रहेंगे तो हम चेंजमेकर कैसे बन सकते हैं? राजनीति, वकालत, पत्रकारिता सभी पेशों में ईमानदार और बेबाक लोगों की जरूरत है।

11. पीसी कोठारी - सचिव, जिला बार एसोसिएशन: राजनीति में ऐसे व्यक्तिको ही आना चाहिए जो समाज के प्रति जिम्मेदार हो और अपने दायित्वों को सही तरह से निभाने का दम रखता हो। राजनीति में आनेवाले व्यक्ति का शिक्षित होना बहुत जरूरी है। अपराधिक रिकॉर्ड वाले व्यक्ति को तो इससे दूर ही रहना चाहिए। पत्रिका के इस चेंजमेकर अभियान की आज काफी जरूरत थी। इस अभियान से समाज को एक नई दिशा मिलेगी और अच्छे व्यक्ति को राजनीति में जगह।

12. वासु वासवानी - वरिष्ठ अधिवक्ता: राजनीति का क्या स्तर हो गया है कि कर्नाटक में कल ही चुने गए विधायकों को आज हेलीकॉप्टर से ढूंढना पड़ रहा है। विधायकों को छुपाना पड़ रहा है। राजनीति में एेसी नौबत क्यों आई? यह हमें सोचना होगा। राजनीति में स्वच्छता के लिए चेंजमेकर्स को आगे लाना ही होगा। इसके बाद ही राजनीति में स्वच्छता की शुरुआत हो सकेगी। इसके लिए पत्रिका का कदम सराहनीय है। इसमें सभी को साथ देना चाहिए।

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