12 साल बाद फिर भोपालाइट्स ने कहा वाह उस्ताद वाह

उस्ताद जाकिर हुसैनी की प्रस्तुति में बारिश हुई तो बूंदों और बादल की गजरने की आवाज से मौसम का किया अभिवादन

By: hitesh sharma

Published: 03 Mar 2019, 03:23 PM IST

भोपाल। 12 सालों के लंबे इंतजार के बाद राजधानी में एक बार फिर उस्ताद जाकिर हुसैन के तबले की थाप ऐसी गूंजी कि वक्त ठहर सा गया। मौसम ने भी उनका स्वागत बौछारों से किया। उस्ताद भी कहां पीछे हटने वाले थे, उन्होंने अपने तबले से ही बारिश की बूंदों और बादल की गजरने की आवाज पर प्रस्तुति देकर मौसम का अभिवादन किया। उन्होंने वादन की शुरुआत में 14 मात्रा में राग सरस्वती का चयन किया। वादन से पूर्व श्रोताओं को राग से परिचित कराते हुए कहा कि भगवान शिव के तांडव का 'ता' और देवी पार्वती के लस्य से 'ल' लेकर 'ताल' की रचना हुई। हम अपनी प्रस्तुति में उन्हें ही अपनी आंखो में बसाकर वादन करते हैं। गौरतलब है कि 2007 में उन्होंने बीयू के ज्ञान-विज्ञान भवन में प्रस्तुति दी थी। इससे पहले कालिदास सम्मान मिलने पर 1997 में भारत भवन में अंतिम बार परफॉर्मेंस दी थी।

news

प्रस्तुति को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि गुरु जी का सिखाया कायदा है, जिसमें धीरे-धीरे गति बढ़ती है। जैसे जब जीटी निकलती है और आगे बढ़ती है तो कैसे बढ़ेगी। हंसते हुए कहा, मैं अपनी जवानी के दिनों की बात कर रहा हूं, अब तो शताब्दी आ गई है। उनकी इस रोचक प्रस्तुति में श्रोताओं ने बढ़ती जीटी के साथ ताल से ताल मिलाई। प्रस्तुतियों की इस श्रृंखला में उन्होंने बंदिशें और चक्करदार पेश किए। फरमाइशी चक्करदार पेश करते हुए एक 300 साल पुरानी कहानी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पंजाब के लड़के से दिल्ली की लड़की से शादी हुई तो गुरुजन ने 500 बंदिशें दहेज में दी। इन्हें लाहौरी गत कहा जाता है। उन्हें सुनने के लिए श्रोताओं की भारी भीड़ उमड़ी। शाम 5.30 बजे से लंबी लाइन लग गई थी। इस मौके मजाकिया अंदाज में उन्होंने कहा कि मैं वर्षगांठ समारोह में आने वाला था लेकिन नहीं आ सका। मैंने सोचा कि पता नहीं लोग सुनने आएंगे कि नहीं आएंगे सोच रहे होंगे पहले तो आया नहीं, न जाने आज आएगा कि नहीं।

newsnews
hitesh sharma Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned