scriptAfter the martyrdom of the son, he dedicated his life to help family | बेटे के शहीद होने के बाद शहीदों के परिजनों की सहायता के लिए समर्पित कर दिया जीवन | Patrika News

बेटे के शहीद होने के बाद शहीदों के परिजनों की सहायता के लिए समर्पित कर दिया जीवन

शहीद कैप्टन देवाशीष शर्मा की मां निर्मला शर्मा सिरेमिक के पॉट बनाकर प्रदर्शनी लगाती हैं और बिक्री से जो राशि मिलती है वह सैनिकों के कल्याण के लिए पूरी दान कर देती हैं।

भोपाल

Published: January 15, 2022 03:35:12 pm

भोपाल. राजधानी के कई सपूतों ने देश की रक्षा की खातिर अपनी शहादत दी हैं। इन्हीं में से एक हैं कैप्टन देवाशीष शर्मा जो 10 दिसंबर 1994 को कश्मीर में मिशन रक्षक के दौरान आतंकियों से लड़ते हुए शहीद हो गए थे। अपने इकलौते बेटे को खोने के बाद पूरा परिवार महीनों तक सदमे में रहा। बेटे के जाने का दुख देवाशीष के पिता भी नहीं झेल पाए और कुछ साल बाद वे भी दुनिया से विदा हो गए।

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इसके बाद अकेली बची उनकी मां पेशे से शिक्षिका रही निर्मला शर्मा ने न सिर्फ खुद को संभाला बल्कि शहीदों के परिवारों का संबल बनने का भी फैसला किया। अब वे सिरेमिक की कलाकृतियां बनाती हैं और उनकी बिक्री से जो राशि मिलती है वह पूरी शहीद सैनिकों के परिजनों के लिए दान कर देती हैं। अब तक वे 10 लाख से अधिक राशि दान कर चुकी हैं। निर्मला शर्मा हर साल कहीं भी हों लेकिन सेना झंडा दिवस पर सैनिक कल्याण बोर्ड में अपनी कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाना नहीं भूलती हैं।

उन्होंने बताया कि 2007 से प्रदर्शनी लगाना शुरू की है। पहली प्रदर्शनी में 20 हजार रुपए आए थे जो उन्होंने दान किए थे, लेकिन सैनिक कल्याण बोर्ड ने काम की लागत देखते हुए 5 हजार रुपए लौटा दिए। तब से हर साल मैं सालभर जितनी भी एग्जीबिशन लगाती हूं, उसमें बिके माल का सारा पैसा दान कर देती हूं। अब तक देश के कई स्थानों पर प्रदर्शनी लगा चुकी हूं।

सिरेमिक के पॉट पर अपने हाथ से लिखती हैं कविताएं
निर्मला शर्मा सिरेमिक मिट्टी से घरेलू उपयोग के बर्तन और सजावटी पॉट बनाती हैं। देशभर के कवियों की प्रेषित कविताओं का वे इन पॉट्स पर लेखन करती हैं। इन कविताओं की लाइनों में एक मां का दर्द भी छिपा रहता है और जीवन जीने का संघर्ष भी। इन लाइनों में अंधेरे में उजेले का दीप जलाकर औरों को प्रकाशमान करने का संदेश भी समाहित होता है। वीर माता निर्मला शर्मा बताती हैं कि उन्हें यह काम करके आत्मिक शांति मिलती है। सबकुछ खोने के बाद अब ये कला ही मेरे जीवन का आधार है। इसी में मैं अपने आप को व्यस्त रखती हूं।

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