दो साल बाद फिर गुलजार होगा अभिरंग

दो साल बाद फिर गुलजार होगा अभिरंग

hitesh sharma | Publish: Sep, 06 2018 04:25:34 PM (IST) Bhopal, Madhya Pradesh, India

रिनोवेशन : भारत भवन में दोबारा शुरू होंगी पोएट्री, फिल्म, सोलो ड्रामा और डिस्कशन जैसी गतिविधियां

भोपाल भारत भवन में जल्द ही अभिरंग की गतिविधियां भी शुरू होगी। दो साल से बंद पड़े 'अभिरंग' में विभाग पोएट्री, फिल्म, सोलो ड्रामा और डिस्कशन जैसी गतिविधियां शुरू होगी। करीब एक करोड़ चालीस लाख की लागत से इसका रिनोवेशन किया हो रहा है। साथ ही एक नई इमारत भी तैयार की जा रही है। इसमें दो छोटे सभागृह बनेंगे, जिनमे ग्रीन रूम से लेकर प्रोजेक्टर की भी सुविधा होगी।

भारत भवन के प्रशासनिक अधिकारी प्रेम शंकर शुक्ला ने बताया कि एक घटना की वजह से 'अभिरंग' को करीब दो साल पहले बंद कर दिया गया था। एक्सटेंशन का काम शुरू हो चुका है। फरवरी तक इसे तैयार करने का टारगेट रखा गया है। इसमें साउंड स्टूडियो भी बनाया जाएगा, जिसमें कोई भी आर्टिस्ट कम्प्यूटर के इस्तेमाल से साउंड रिकॉर्ड भी कर सकेगा। इस स्टूडियो में बड़े लेखकों के साथ साहित्यकारों और कलाकरों के साथ इंटरव्यू भी ले सकेंगे।

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फंड नहीं मिलने से अटका देश का पहला वल्र्ड पोएट्री सेंटर
भारत भवन की वर्षगांठ पर एसीएस मनोज श्रीवास्तव ने तीन माह में वल्र्ड पोएट्री सेंटर शुरू करने की घोषणा की थी। भारत भवन ने इसे शुरू करने के लिए करीब एक करोड़ रुपए का प्रस्ताव भेजा लेकिन फंड नहीं मिलने से पोएट्री सेंटर भी शुरू नहीं हो पाया। यह देश का पहला पोएट्री सेंटर होगा।

1989 में हुआ था पहला कार्यक्रम
1989 में भारत भवन में वागर्थ वल्र्ड पोएट्री फेस्टिवल हुआ था। इसमें देश-विदेश के 200 रचनाओं ने शिरकत की थी। तब संवाद कार्यक्रम में तय हुआ था कि यहां एक वल्र्ड पोएट्री सेंटर की स्थापना की जाए ताकि विश्व के नामी कवियों की रचनाशीलता पर चर्चा हो सके, साथ ही विश्वभर के कविताओं को एक मंच पर लाया जा सके।

हर साल करीब एक करोड़ के फंड की जरूरत
भारत भवन प्रशासन पोएट्री सेंटर की शुरुआत लाइब्रेरी के पास खाली पड़ी जगह में करना चाहता है। यहां एक हिस्से को तोड़कर गतिविधियों की शुरुआत की जाएगी। वल्र्ड के प्रसिद्ध राइटर्स की बुक की खरीदी के साथ ही यहां एक डायरेक्टर, एडिटर सहित करीब 15 एक्सपर्ट की जरूरत होगी। जो विश्व की विभिन्न लिट्रैचर का ट्रांसलेश्न कर सके। विश्व स्तर की गतिविधियों के लिए हर साल करीब एक करोड़ रुपए के फंड की आवश्यकता होगी।

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