scriptagriculture waste make a lots of problems for human | धान की पराली से खेतों को उपजाऊ बनाना होगा आसान | Patrika News

धान की पराली से खेतों को उपजाऊ बनाना होगा आसान

-कृषि अभियांत्रिकी संस्थान के वैज्ञानिकों के सहयोग से बनीं तीन ट्रैक्टर चलित मशीनें
-समय के साथ ही पैसों की होगी बचत, आग से होने वाले नुकसान से भी बचेंगे खेत

भोपाल

Published: June 09, 2022 09:38:42 pm

भोपाल. फसलों की हार्वेस्टिंग के बाद कृषि अवशेषों (पराली) को खेतों में जलाने की समस्या इन दिनों मप्र समेत अन्य प्रदेशों के परेशानी का सबब बनी हुई है। पराली को जलाने से पर्यावरण और खेतों की उवर्रक क्षमता को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए नबी बाग स्थित कृषि अभियांत्रिकी संस्थान के वैज्ञानिकों के सहयोग से ट्रैक्टर चलित यंत्रों को विकसित किया गया है, जो खेतों के अवशेषों को कम लागत और कम समय में जैविक खाद में तब्दील करने में मददगार हैं। बता दें, मप्र में धान का रकबा लगातार बढ़ा है। ऐसे में धान की पराली को खेतों में ही उपयोग लायक बनाने के लिए आधुनिक कृषि यंत्र तैयार किए हैं। कृषि अभियांत्रिकी संस्थान के डायरेक्टर डॉ. सीआर मेहता बताते हैं कि इन कृषि यंत्रों से धान की पराली का बेहतर निष्पादन संभव है। इसकी लागत कम है, जिससे किसान इसे आसानी से उपयोग में ले सकते हैं। केंद्र सरकार ने धान की पराली के यंत्रों के जरिये प्रबंधन के लिए 1700 करोड़ रुपए की परियोजना तैयार की है। इसमें धान उत्पादक प्रमुख प्रदेश पंजाब, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, मप्र, उप्र समेत अन्य राज्य शामिल हैं।
धान की पराली से खेतों को उपजाऊ बनाना होगा आसान
धान की पराली से खेतों को उपजाऊ बनाना होगा आसान
पराली जलाने से होता है इतना नुकसान
देशभर में हर साल तकरीबन 50 करोड़ टन फसल अपशिष्ट निकलता है। इसमें से 14 करोड़ टन अपशिष्ट यानी फसलों के तने को अगली फसल की तैयारी के लिए खेतों में ही जलाया जाता है। धान की एक टन पराली को जलाने से 60 किग्रा. कार्बन मोनो ऑक्साइड, 1460 किग्रा. कार्बन डाइ ऑक्साइड, 199 किग्रा राख, 2 किग्रा सल्फर डाइ ऑक्साइड और तीन किग्रा हानिकारक पर्टिकुलेटेड कण निकलते हैं, जो मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। ये हानिकारक अवयव हृदय एवं फेफड़ों से संबंधित रोग की मुख्य वजह हैं। इसके अलावा यदि एक टन धान की पराली को खेतों में उपयोग किया जाता है तो 5.5 किग्रा नाइट्रोजन, 2.3 किग्रा फास्फोरस, 25 किग्रा पोटाश, 1.2 किग्रा. सल्फर मिलता है।
ऐसे धान की पराली आफत की बजाय बनेगी उवर्रक
तना कटाई मशीन: ये मशीन धान के तने को काटने के साथ ही भूसे को खेत में ही फैलाती है। इस मशीन से एक हेक्टेयर की पराली को 40 मिनट में खत्म किया जा सकता है। इस मशीन को खेत में चलाने के बाद सिंचाई की जाती है, जिससे भूसा आसानी से मिट्टी में मिल जाए। इसकी कीमत 1.60 लाख से 2.50 लाख तक है।
हैप्पी सीडर: इस मशीन में तने से भूसा बनाने के लिए रोटर का उपयोग होता है। ये मशीन भूसे को बोवनी के लिए तैयार किए जाने वाले कतारों में इक_ा करती है। ये भूसा खेतों में मल्चिंग का काम करता है। इस मशीन से एक घंटे में 0.33 हेेक्टेयर में पराली का प्रबंधन संभव है। इसकी कीमत 1.30 लाख से 1.40 लाख रुपए है।
ब्रूजर टाइप स्ट्रा प्रबंधन: इस मशीन के मुख्य भाग स्ट्रा मैनेजर और स्प्रेडर हैं। इसे कंबाइन हार्वेस्टर के पीछे लगाकर उपयोग में लाया जाता है। ये तनों का आकार 60 से 80 फीसदी तक कम करता है। इसके बाद हैप्पी सीडर चलाकर पराली का पूरी तरह निष्पादन हेाता है।

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