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गर्मियों में एमपीनगर तो सर्दियों में गोविंदपुरा इंडस्ट्रीयल एरिया रहता है शहर में सबसे प्रदूषित

- एआरएआइ पुणे की रिसर्च में खुलासा, भोपाल में सड़कों पर उड़ती धूल यहां के लोगों को बीमार कर रही - अगर राजधानी में निवेश चाहिए तो पहले यहां की हवा की गिरती गुणवत्ता को सुधारना होगा

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शहर में बढ़ता प्रदूषण

भोपाल. शहर में बढ़ते एयर प्रदूषण में 62 फीसदी भागीदारी यहां की टूटी सड़कों से उड़ती धूल है। इस बात का खुलासा एमपीपीसीबी की ओर से हुई एक दिवसीय कार्यशाला में हुआ। भोपाल के एयर क्वालिटी पर काम कर रहे पुणे की संस्था एआरएआइ ने पिछले 4 साल शहर में पांच अलग-अलग जगह मॉनिटरिंग कर रिपोर्ट पेश की। पिछले 4 सालों में साफ हवा के दिनों में लगातार गिरावट हो रही है।

इन पांच स्थानों पर हुई स्टडी

निरेह, भौंरी बायपास रोड़

टॉप एंड टाउन आइसक्रीम फेक्ट्री गोविंदपुरा इंडस्ट्रीयल एरिया

संकल्प नेत्रालय, जोन 2, एमपी नगर

अनुपम हॉस्पिटल, कोलार रोड़

मुस्कान चिल्ड्रन एंड जनरल हॉस्पिटल, डीआईजी बंगला, बैरसिया रोड

राजधानी में पीएम 10 बढ़ने के कारण

शहर में एक साल में 10,309 टन पीएम10 निकला

रोड डस्ट - 62 फीसदी

ट्रांसपोर्टेशन - 13 फीसदी

कंस्ट्रक्शन - 12 फीसदी

वेस्ट - 3 फीसदी

अन्य - 8 फीसदी

राजधानी में पीएम 2.5 बढ़ने के कारण

शहर में एक साल में 4,121 टन पीएम 2.5 निकला

रोड डस्ट - 38 फीसदी

ट्रांसपोर्टेशन - 29 फीसदी

कंस्ट्रक्शन - 7 फीसदी

वेस्ट - 7 फीसदी

अन्य - 19 फीसदी

रिपोर्ट में पेश आंकड़ों के मुताबिक एमपीनगर में पूरे साल सबसे ज्यादा हवा दूषित रहती है। हालांकि ये मौसम के हिसाब से बदल रहा है। तापमान में गिरावट होती है तो हवा ज्यादा दूषित हो रही है। पूरे साल में सबसे ज्यादा दिसंबर और जनवरी में शहर में पॉल्युशन रहता है। रिपोर्ट में दावा के अनुसार सबसे साफ भौंरी बायपास रोड़ के आसपास का इलाका है।

ऐसे ही रहा तो भोपाल ग्रीन सिटी नहीं रहेगा

एआरएआइ पुणे के जनरल मैनेजर और भोपाल के सोर्स पर्सन मौक्तिक बावसे ने बताया कि भोपाल में आने वाले समय में ये एक बड़ा चैलेंज बनेगा। ये सिर्फ ग्रीन सिटी नहीं रह जाएगी। हमारी टीम 2019 से मॉनिटरिंग कर रही है। यहां की रोड़ डिजाइन सही तरीके से होनी चाहिए। अब नए टूल्स और टेक्नॉलॉजी के साथ काम करने की आवश्यकता है।