WII ने किया अलर्ट 'आपरेशन मानसून' से रुकेगा बारिश में बाघों का शिकार

WII ने किया अलर्ट 'आपरेशन मानसून' से रुकेगा बारिश में बाघों का शिकार

Ashok Gautam | Updated: 14 Jul 2019, 07:53:43 AM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

नेशनल पार्क और सेंचुरी ने तैयार किया ऑपरेशन मानसून

भोपाल. वाइल्ड लाफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) देहरादून ने अलर्ट किया है कि बारिश में बाघ सहित अन्य जंगली जानवरों के शिकार की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। आगामी तीन-चार माह में जंगली जानवरों की सुरक्षा के लिए विशेष दल और बल लगाकर गश्ती की जाए, जिससे वन अपराधों को रोका जा सके। इसके चलते सभी नेशनल पार्क और सेंचुरी में ऑपरेशन मानसून ( operation monsoon ) तैयार किया है। इसमें उन्होंने वन और वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिए कार्ययोजना तैयार की है।


नेशनल पार्क और सेंचुरी के सभी डायरेक्टरों ने आपरेशन मानसून के तहत सुरक्षा के उपायों की रिपोर्ट वाइडल्ड लाइफ मुख्यालय को भी भेज दी है। रिपोर्ट में बताया कि नेशनल पार्क और सेंचुरी में सबसे तगड़ी सुरक्षा पगडंडियों में लगाई गई है।

इसकी मुख्य वजह यह है कि बारिश में मार्ग से वाहनों का आवागमन पूरी तरह से बंद हो जाता है। इसके अलावा बारिश में वाहन लेकर अपराधी प्रवेश भी नहीं करते हैं। इसके चलते सभी पगडंडियों का चिंहित कर उसमें सुरक्षाकर्मियों को तैनात कर दिया गया है। इसके साथ ही जिस गांव और क्षेत्र से होकर पगडंडियां गुजरती हैं वहां के लोगों को भी इस संबंध अलर्ट कर दिया गया है तथा सुरक्षाकर्मियों को उन क्षेत्रों में मुखबिर तंत्र को मजबूत करने के लिए कहा गया है। प्रत्येक सुक्षाकर्मियों को हर दिन के गस्ती क्षेत्र की सीमा तय की गई है। ये गांववालों के साथ मिलकर जगह-जगह कैंप लगाएंगे।

बाघ के क्षेत्रों में हाथियों से गश्ती

पार्क के जिन क्षेत्रों में बाघों के रहने की संभावनाए हैं वहां हाथियों से गश्ती की जाएगी। अपराध के दृष्टि से जो क्षेत्र ज्यादा संवेदनशील हैं वहां हर समय हाथियों से गश्ती की जाएगी। उन्हीं क्षेत्रों में जंगलों के बीच-बीच में अस्थाई चौकियां भी बनाई गई हैं, इससे सुरक्षाकर्मी पार्क के अलग-अलग हिस्सों में नजर रख सकेंगे। चौकियों में उनके साथ हाथी भी रहेगी, जिससे वे रात और दिन में जंगलों गश्ती कर सकें। सुरक्षाकर्मी वायरलेस और मोबाइल फोन से हर समय का अपना लोकेशन पार्क प्रबंधन को देते रहेंगे।

पारधी ठिकानों पर नजर

वन क्षेत्रों में पारधी, बंजारा और अन्य घुमंतू जातियों का डेरा किन-किन क्षेत्रों में है, इसका हर सप्ताह सर्वे किया जाएगा। उनके गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। उसके कार्यों तथा दिनचर्या के बार भी रिकार्ड तैयार करने के लिए वनकर्मियों को कहा गया है। सुरक्षाकर्मियों को यह भी निर्देश दिए गए है कि अगर ऐसे समूहों के रात में रुकने की जानकारी मिलती है तो वे उस क्षेत्र में खुद उनके संबंध में जानकारी लेंगे और इसकी सूचना उच्च अधिकारियों को देंगे।


विद्युत लाइनों का रिपोर्ट

सुरक्षाकर्मी जंगलों से होकर गुजरने वाली विद्युत लाइनों का सर्वे रिपोर्ट तैयार करेंगे। अगर कही लाइन में फाल्ट है अथवा तार टूट गया है तो इसकी सूचना बिजली विभाग को देंगे। अगर कहीं बिजली का तार जमीन में दिखाई देता है तो उसकी जांच करने के बार ही उसे वहां से हटाने का प्रयास करें, क्योंकि उसमें करंट की संभावना हो सकती है। बिजली के तार से कर्मचारियों को भी सजग रहने के लिए कहा गया है।

मछली पकडऩे पर भी प्रतिबंध

पार्क और सेंचुरी की सीमा में नदी-नालों में मछली पकडऩे, मारना पर पूरी तरह से प्रतिबंधित लगा दिया है। अक्सर यह देखने में आया है कि मछली मारने के बहाने अपराधी पार्क में प्रवेश कर बड़ी घटना को अंजाम दे देते हैं। एेसे लोगों पर नजर रखने के लिए बड़ी नदियां और जलाशयों में भी गस्ती की जा रही है। अगर वहां मछली पकड़ते हुए संदिग्ध लोग मिलते हैं तो उन्हें पुलिस के हवाले किया जा रहा है। इसके साथ ही पार्क में बाहरी लोगों का पूरी तरह से प्रवेश प्रतिबंधित किया गया है।

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