माइनिंग अफसरों और कंपनियों का गठजोड़.. देखें पूरा मामला!

Yogendra Sen

Publish: Apr, 17 2018 10:00:00 AM (IST)

Bhopal, Madhya Pradesh, India
माइनिंग अफसरों और कंपनियों का गठजोड़.. देखें पूरा मामला!

30 साल का एग्रीमेंट, 17 का ही शुल्क जमा कराया

भोपाल। प्रदेश के माइनिंग अफसरों, पंजीयकों और कोल कंपनियों के गठजोड़ के चलते कोल ब्लाकों से 11.70 करोड़ रुपए स्टांप शुल्क कम वसूला गया। इसका खुलासा महा लेखा परीक्षक (कैग) ने हाल ही में किया है। पंजीयन कार्यालय के अधिकारी रिकवरी करने पहुंचे तो माइनिंग कॉरपोरेशन ने बताया कि केंद्र सरकार सभी कोल ब्लाक बंद कर चुकी है। इससे 30 साल का पंजीयन शुल्क देने का सवाल ही नहीं उठता। प्रदेश में पांच साल पहले शुरू हुए 10 कोल ब्लाक के संचालन के लिए माइनिंग कॉरपोरेशन ने निजी कंपनियों के साथ ज्वाइंट वंचर (जेवी) कंपनी बनाई थी।

इनसे हुई कम वसूली
जिला कोल ब्लाक जेवी
सिंगरौली मरकी-बरका एसीसी सीमेंट
सिंगरौली अमिलिया नाथ जेपी
शहडोल विचारपुर एसीसी सीमेंट
उमरिया सेमरिया पिपरिया एसीसी सीमेंट
छिंदवाड़ा मंडला साउथ जेपी सीमेंट
कोरबा छग मोरगा मोनटेक
कोरबा मोरगा-4 एसीसी सीमेंट

17 साल का बनाया प्लान
इन कंपनियों ने 17 साल का माइनिंग प्लान बनाया था। इसी के अनुसार स्टांप शुल्क जमा किया। जबकि, जिन जिलों में कोल ब्लाक शुरू होने थे, वहां के जिला माइनिंग अधिकारियों ने 30 साल का अनुबंध अलग से किया था। इससे कैग ने 13 साल का 11.70 करोड़ रुपए स्टाम्प शुल्क कम जमा कराने की रिपोर्ट तैयार कर दी। इस पर पंजीयन विभाग ने नोटिस दिया।

क्र100 के स्टाम्प खदान
माइनिंग कॉरपोरेशन में डेढ़ साल पहले 100 रुपए के स्टाम्प पर 12 करोड़ से अधिक की रेत खदान देने का मामला सामने आया था। निगम ने 100 रुपए के स्टाम्प पर दो दर्जन कंपनियों को रेत खदानें आवंटित कर दी थी। इस पर पंजीयन विभाग ने कॉरपोरेशन को नोटिस जारी कर खदान संचालकों से 12 करोड़ रुपए से अधिक वसूलने को कहा था करोड़ रुपए से अधिक वसूलने को कहा था।

पंजीयन विभाग ने जो राशि बताई थी, वह माइनिंग कॉरपोरेशन ने जमा कर दी थी। रिकवरी बाद में निकाली है। इसका परीक्षण किया जा रहा है।
-मनोहर दुबे, एमडी, एमपी माइनिंग कॉरपोरेशन

डाउनलोड करें पत्रिका मोबाइल Android App: https://goo.gl/jVBuzO | iOS App : https://goo.gl/Fh6jyB

1
Ad Block is Banned