सिगरेट के आदी थे पं. नेहरू, रात बिताने इस कोठी में ही आते थे

सिगरेट के आदी थे पं. नेहरू, रात बिताने इस कोठी में ही आते थे
Jawaharlal nehru

पं. जवाहरलाल नेहरू का जन्म दिवस 14 नवंबर को है। इस दिन बाल दिवस मनाया जाता है। चाचा नेहरू को भोपाल की आबोहवा उन्हें यहां अक्सर खींच लाती थी। जब-जब भी वे भोपाल आए उनसे कुछ किस्से जुड़ गए।


(पं. जवाहरलाल नेहरू का जन्म दिवस 14 नवंबर को है। इस दिन बाल दिवस मनाया जाता है। चाचा नेहरू को भोपाल की आबोहवा उन्हें यहां अक्सर खींच लाती थी। जब-जब भी वे भोपाल आए उनसे कुछ किस्से जुड़ गए। प्रस्तुत है यादों के पन्नों से लिए गए कुछ रोचक प्रसंग...।)


भोपाल। मध्यप्रदेश और पंडित जवाहरलाल नेहरू का गहरा नाता रहा है। मध्यप्रदेश का नामकरण पं. नेहरू ने ही किया था। उस दौर के नेता शंकरदयाल शर्मा से उनकी खासी नजदीकियां थीं।

इस वजह से नेहरू अक्सर भोपाल आना-जाना करते थे। वे जब तक प्रधानमंत्री रहें करीब डेढ़ दर्जन बार भोपाल आ चुके हैं। उन्हें भोपाल काफी पसंद था। उन्हें भोपाल के प्राकृतिक रंग और आबोहवा काफी पसंद थी। उनके नाम पर भोपाल में कई संस्थाएं हैं, अस्पताल हैं, स्कूल हैं।

स्पेशल प्लेन से मंगवानी पड़ी थी सिगरेट

एक बार नेहरू भोपाल दौरे पर थे, तब वे राजभवन आए हुए थे। उनकी सिगरेट खत्म हो गई थी। इसी दौरान नेहरू का 555 ब्रांड सिगरेट का पैकेट भोपाल में नहीं मिला। नेहरू को खाना खाने के बाद सिगरेट पीने की आदत थी। जब यहां स्टाफ को पता चला तो उन्होंने भोपाल से इंदौर के लिए एक विशेष विमान पहुंचाया। वहां एक व्यक्ति इंदौर एयरपोर्ट पर सिगरेट के कुछ पैकेट लेकर पहुंचा और वह पैकेट लेकर विमान भोपाल आया। राजभवन की वेबसाइट में इस रोचक प्रसंग का उल्लेख है।




चिकलोद कोठी बेहद पसंद थी
भोपाल के करीब चिकलोद कोठी नवाबी दौर की शान मानी जाती थी। यह कोठी तीन तरफ से पहाड़ों से घिरी होने और तालाब के किनारे होने के कारण खासी आकर्षण का केंद्र थीं। भोपाल से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित चिकलोद कोठी देश के प्रधानमंत्री को भी पसंद थी। वे यहीं रुकना पसंद करते थे। यहां चारों तरफ हरियाली और पहाड़ थे। खूबसूरती के साथ ही यह जगर सर्वसुविधायुक्त थी।




जब नाराज हो गए राज्यपाल
हालांकि आधिकारिक यात्रा पर आने के दौरान वे राजभवन में नहीं रुकते थे, इसलिए उनका कुछ विरोध भी होता था। यह विरोध MP के राज्यपाल हरि विनायक पाटस्कर ने किया था। 

चाचा नेहरू ने दी थी बीएचईएल की सौगात
BHEL की जमीन आवंटन से लेकर इसकी नींव रखने और उसे देश को समर्पित करने में देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का बड़ा योगदान माना जाता है। वे भेल भोपाल का लोकार्पण करने आए थे। उन्होंने भेल के सभी ब्लाकों का दौरा किया था और बारिकी से उत्पादन करने वाले कर्मचारियों से चर्चा की थी।

शहर में सबसे पहले नेहरू के पास आई थी कार
नेहरू स्वयं के रहन-सहन पर काफी ध्यान रखते थे। उनका अंदाज ही सबसे अलग था। इसलिए वे हमेशा चर्चाओं में रहते थे। पंडित नेहरू का बचपन इलाहाबाद में गुजरा था और उनके पिता मोतीलाल नेहरू इलाहाबाद के प्रतिष्ठित परिवार के थे। वे काफी लाड़-प्यार से पले थे। एक बार नेहरूजी के लिए पिता ने विदेशी साइकिल मंगवाई थी।

इसके अलावा 1904 में विदेशी कार मंगवाई। खास बात यह थी कि इलाहाबाद की सड़कों पर आने वाली यह पहली कार थी। इसकी चर्चा पूरे शहर में होती थी। बताया जाता है कि नेहरू परिवार का इलाहाबाद स्थित घर आधुनिक सुविधाओं के कारण भी प्रसिद्ध था। उस जमाने में उस बंगले में स्वीमिंग पूल, टेनिस कोर्ट जैसी सुविधाएं थीं। इस घर में कई चीजें अब संग्रह करके रखी गई है।

अंग्रेज शिक्षक देते थे नेहरू को ट्यूशन
इकलौते पुत्र होने के कारण जवाहर का बचपन विलासितापूर्ण तरीके से बीता। जिस बच्चे को अंग्रेज शिक्षक घर पर पढ़ाने आते रहे हों, 15 वर्ष की आयु में स्कूली शिक्षा भी लंदन के हैरो स्कूल में हुई और विश्वविद्यालयीन शिक्षा भी कैम्ब्रिज में हुई, उस बच्चे की शिक्षा का स्तर भी उच्च ही रहा।

लंदन से धुलकर आते थे नेहरू के कपड़े
नेहरू से जुड़ी यह बात भी काफी प्रचलित है कि उनके कपड़े धुलने के लिए लंदन भेजे जाते थे। खानदान की जन्मभूमि कश्मीर थी और नेहरू के दादा पंडित गंगाधर नेहरू दिल्ली के कोतवाल हुआ करते थे। इसलिए उनका रौब भी उनकी जिंदगी पर पड़ा। पिता पंडित मोतीलाल नेहरू इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सबसे प्रसिद्ध और सबसे रईस वकील थे। जो बेहद अनुशासनप्रिय, शानो-शौकत और अंग्रेजी चाल-ढाल और अपने पहनावे के लिए जाने जाते थे।

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