Amitabh की लंदन में लगी थी नौकरी, बच्चों को सुधारने लौटे तो कर दिया कमाल

- आदिवासी गांव केकडिय़ा में डिजीटल लर्निंग

- आधुनिक शिक्षा के बीच जैविक खेती, तलाशे जा रहे रोजगार के विकल्प

 

By: शकील खान

Updated: 13 Sep 2020, 12:04 AM IST

भोपाल। आदिवासी क्षेत्र में ई लर्निंग के जरिए बच्चों हो रही है। इतना ही नहीं गांव में बाकायदा आई टी लैब के जरिए ये काम हो रहा है। ये सब मुमकिन हुआ एक युवा अमिताभ सोनी की बदौलत। करीब पांच साल पहले लंदन से नौकरी छोड़ इन्होंने राजधानी से करीब 23 किमी दूर केकडिय़ा गांव में काम शुरू किया तो शिक्षा के साथ यहां रोजगार के हालात भी बदल गए। कोरोनाकाल में ग्रामीण परिवेश में जीवन यापन की सीख के साथ शिक्षा के नए तरीकों पर काम कर रहे हैं।

अमिताभ लंदन में ब्रिटिश सरकार की सोशल वेलफेयर बोर्ड में नौकरी करते थे। 2014 में इसे छोड़ अपने देश लौट आए। इसके एक साल बाद से ये शिक्षा को बढ़ावा राजधानी के आदिवासी गांव केकडिय़ा में काम कर रहे हैं। गांव में सरकारी स्कूल में करीब पांच सौ बच्चे हैं। इन्हें पढ़ाने के वहीं पुराने तरीके है। अब कम्प्यूटर शिक्षा पा रहे हैं। शिक्षा के लिए सभी को शहर आने की बजाय गांव में ही शिक्षा दी जा रही है। अब यहां साक्षरता बढ़ रही है। पहले 1200 की आबादी वाले इस आदिवासी गांव में 30 साल से ऊपर की आबादी में केवल 4 लोग साक्षर थे।
कोरोनाकाल के चलते स्कूलें बंद हैं। अमिताभ ने बताया संसाधनों के साथ नेटवर्क की दिक्कत बाधा बन रही है।

आईटी लैब के जरिए लर्निंग
आधुनिक शिक्षा के लिए इन्होंने गांव में आईटी लैब की स्थापना की। कई ग्रामीण युवाओं का इसमें सहयोग रहा। इस लैब में ई-लर्निंग के साथ युवा भी कम्प्यूटर की शिक्षा पा रहे हैं। इस काम में कई लोग सहयोग कर रहे हैं। अमिताभ के मुताबिक शलभ तिवारी, पवन श्रीमाल, स्वपनिल राय सहित कई लोग हैं जो सहयोग करते हैं। सोशल मीडिया के जरिए भी मदद जुटाई जाती है।

गांवों में ही व्यापार, आमदनी का जरिए

शिक्षा के साथ रोजगार की दिशा में यहां काम चल रहा है। जैविक खाद से खेती को बढ़ावा दिया। हाट शुरू कराया ताकि आमदनी के लिए बाहर न जाना पड़े। कुछ हद तक इसमें कामयाबी भी मिली है।

विदेशों में गांवों की ओर वापसी के लिए कोर्स

अमिताभ बताते हैं कि वे करीब दस साल लंदन में रहे। आधुनिक तरीकों से जिंदगी गुजारने के बाद अब यहां लोग गांवों की वापसी करना चाहते हैं। इसके लिए बाकायदा यहां कन्टी लाइफ लिविंग स्किल कोर्स भी चलाया जा रहा है। प्रकृति के बीच जीने के तरीकों को सीखना लोगों की जरूरत बन गया है। इन्होंने बताया कि राजधानी में जंगल यूनिवर्सिटी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। अब तक कई विशेषज्ञों से बात की गई है।

शकील खान
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