आंगनवाड़ियों में खर्च हो रहे हैं करोड़ों, फिर भी MP के बच्चों को नहीं मिल रहा पोषण

आंगनवाड़ियों में खर्च हो रहे हैं करोड़ों, फिर भी MP के बच्चों को नहीं मिल रहा पोषण

rishi upadhyay | Publish: Jul, 27 2017 11:55:00 AM (IST) Bhopal, Madhya Pradesh, India

सरकार से सवाल पूछे जाने के बाद कुपोषण की स्थिति को लेकर श्वेत पत्र लाने की घोषणा कर दी गई थी। सरकार का दावा हमेशा यही रहा है कि मध्य प्रदेश बीमारू राज्य के तमगे को काफी पीछे छोड़ चुका है

भोपाल। कैग द्वारा पेश की गई पिछले 12 सालों की रिपोर्ट में मध्य प्रदेश में 3 बार पोषण आहार व्यवस्था में भ्रष्टाचार होने की बात सामने आई है, हालांकि हर बार सरकार द्वारा इस बात को नकार दिया गया। कैग की रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश में 32 फीसदी बच्चों तक पोषण आहार ना पहुचने के अलावा आगंनबाड़ी केन्द्रों में बड़ी संख्या में दर्ज बच्चों के फर्जी होने और पोषण आहार की गुणवत्ता खराब होने जैसे गंभीर कमियों को सामने लाया गया है। 


सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि कुपोषण से होने वाली मौतों में सबसे ज्यादा मौतें राजधानी भोपाल में हो रही हैं। उस भोपाल में जिसके हिस्से में सबसे कम ग्रामीण इलाका है। यहां पर पिछले एक साल में 1704 मौतें हुई हैं। माना जाता है कि ग्रामीण इलाकों में कुपोषण से सबसे ज्यादा मौतें होती हैं। बड़वानी में 1202 बच्चों की मौत हुई है। कुपोषण के लिए बदनाम क्षेत्र शिवपुरी में सिर्फ 628 मौतें ही हुई हैं।


आंगनवाड़ियां भी कुपोषण से निजात दिलाने में हो रही हैं पीछे
प्रदेश में आंगनवाड़ी और कुपोषण से निजात नहीं ताजा आंकड़ों के मुताबिक कुपोषण से निजात पाने के लिए मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में ही हर महीने करीब सवा दो करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन इतनी भारी रकम खर्च करने के बाद भी मध्यप्रदेश के इस जिले में करीब 23 हजार से ज्यादा बच्चों में 2669 बच्चे कुपोषित हैं।


इस जिले में 1538 आंगनवाड़ी केंद्र और 240 मिनी आंगनवाड़ी केंद्र खोले गए हैं। इन केंद्रों के जरिए बच्चों के लिए सुबह का नाश्ता और उनके लिए जरूरी पोषण आहार वितरित किए जाते हैं। 


कुपोषण दूर करने के लिए कम खर्च करती है सरकार
मध्यप्रदेश के लिये कुपोषण एक ऐसा कलंक है बन गया है जो पानी की तरह पैसा बहा देने के बाद भी नहीं धुल पा रहा है। लगभग एक दशक तक की गई कोशिशों के बाद भी कुपोषण गाहे बगाहे मध्य प्रदेश में बड़ी खबर के तौर पर छा ही जाता है। बीते कई सालों में विपक्षी दलों ने इसे राज्य सरकार की लापरवाही, भ्रष्टाचार और असफलता बताकर घेरा है। इतना ही नहीं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी मध्य प्रदेश राज्य सरकार को नोटिस जारी कर इस बारे में जवाब मांगा था। 


सरकार से सवाल पूछे जाने के बाद कुपोषण की स्थिति को लेकर श्वेत पत्र लाने की घोषणा कर दी गई थी। सरकार का दावा हमेशा यही रहा है कि मध्य प्रदेश बीमारू राज्य के तमगे को काफी पीछे छोड़ चुका है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य का जीडीपी 10 प्रतिशत से ऊपर और कृषि विकास दर 20 प्रतिशत से ऊपर है। हालांकि मानव विकास सूचकांक की रिपोर्ट ये कहती है कि मध्य प्रदेश में पिछले 10 सालों में करीब 11 लाख की आबादी गरीबी रेखा को पार कर गई है। 


बीते साल आई एमडीजी की रिपोर्ट के अनुसार राज्य सरकार स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और अन्य सामाजिक क्षेत्रों में कम निवेश करती है। इस रिपोर्ट के मुताबिक रिपोर्ट के मध्य प्रदेश सामाजिक क्षेत्रों में अपने बजट का 39 प्रतिशत हिस्सा ही खर्च करता है वहीं इसका राष्ट्रीय औसत 42 प्रतिशत है।


मोबाइल इलाकों में अभी भी जमी हैं जड़ें
मध्य प्रदेश के जिले के दूरस्थ और आदिवासी गांवों में बच्चों में अब भी कुपोषण मुख्य समस्या बनी हुई है। इसकी बड़ी वजह ये है कि इन इलाकों में आंगनवाड़ी केंद्र जरूर हैं, लेकिन यहां कि व्यवस्थाएं बच्चों को पोषित करने के अनुकूल नहीं हैं। आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों को दिए जाने वाला पोषण आहार रात को तैयार किया जाता है। रात में बने हुए खाने को दिन में बच्चे ठीक तरह से नहीं खाते। इतना ही नहीं कई बार खाना खराब होने के बाद भी बच्चों को परोस दिया जाता है, जिस वजह से बच्चों को पोषण आहार नहीं मिल पाता। 


एक कारण ये भी
मातृ एवं शिशु पोषण के लिए केंद्र एवं वल्र्ड बैंक की सहायता से आंगनवाड़ी केंद्रों में संचालित किए जा रहे गोदभराई एवं अन्नप्राशन योजनाओं के लिए अनुदान दिया जाता है। इन योजनाओं के तहत आंगनवाड़ी केंद्रों में हितग्राहियों एवं सामुदायिक सहभागिता नहीं हो पा रही है। गोदभराई एवं अन्नप्राशन योजनाओं की समीक्षा के दौरान जिलों को चार कैटेगरी में बांटा गया है।


जुलाई में 31 जिलों के 54,861 आंगनवाड़ी केंद्रों में से 48066 में गोदभराई एवं 45,253 में अन्नप्राशन आयोजन किए गए थे। 31 जिलों में से अन्नप्राशन आयोजनों के मामले में स्थिति बेहद खराब है। डी कैटेगरी में उमरिया, डिंडौरी, छिंदवाड़ा शामिल है, जबकि सी कैटेगरी में विदिशा, राजगढ़, आलीराजपुर, खरगोन, जबलपुर, टीकमगढ़, नीमच हैं। गोद भराई कार्यक्रम में डिंडौरी, छिंदवाड़ा, उमरिया, खरगोन, जबलपुर, टीकमगढ़ सीधी, कटनी में ज्यादा हालत खराब हैं।

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